Jaunpur News: जीवन से निराश हो चुकी मंशा चौबे को मिला नया जीवनदान
- हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अभय प्रताप सिंह, न्यूरो सर्जन डॉ. अरविंद कुमार अग्रहरि ने किया स्पाइन का सफल ऑपरेशन
- एसआरएस हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर में भर्ती थी श्रीमती चौबे
- लखनऊ, मुंबई, दिल्ली महानगरों जैसी सुविधा अब एसआरएस हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर नईगंज में भी उपलब्ध
नया सवेरा नेटवर्क
जौनपुर। जब किसी इंसान के जीने का आस छूट जाती है तो उसे जीने का कोई सहारा दिखाई नहीं देता है, लेकिन जब उसे उम्मीद की किरण दिखाई देती है तो उसकी खुशी का ठीकाना नहीं रहता। ऐसा ही कुछ वाकया एसआरएस हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर में देखने को मिला। यह कोई फिल्म की कहानी नहीं है यह हकीकत में एक महिला की दास्तां है। श्रीमती मंशा चौबे 35 वर्ष पत्नी अवनीश चौबे (गोपीपुर) को स्पाइन में दिक्कत होने के कारण वह अपना नित्य क्रिया भी नहीं कर पा रही थी। हालत यह थी कि व्हिल चेयर पर किसी तरह से बाथरूम में पहुंचती थी। उन्होंने पहले एसआरएस हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर में न्यूरो के डॉ. आनंद त्रिपाठी को दिखाई तो उन्होंने दवा दिया और साफ तौर पर कहा अगर इससे आराम हो जाएगा तो ठीक है नहीं तो इसका एक ही इलाज ऑपरेशन है। परेशान अवनीश चौबे अपनी पत्नी को लेकर पीजीआई गए।
पीजीआई में आराम न होने पर इसके बाद वह दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल गए और बीएचयू का भी दरवाजा खटखटा चुके थे। इसके अलावा वेदांता भी गए थे लेकिन कहीं से भी उन्हें आराम नहीं मिले। थक हारकर वह अपनी पत्नी को लेकर एसआरएस हॉस्पिटल नईगंज आए और हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अभय प्रताप सिंह एवं न्यूरो सर्जन डॉ. अरविंद कुमार अग्रहरि ने संयुक्त रूप से श्रीमती मंशा चौबे को स्पाइन का सफल ऑपरेशन किया।
हालत यह है कि ऑपरेशन के तीन दिन बाद ही वह अपने पैरों पर चलने लगी। एसआरएस हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर में भर्ती श्रीमती चौबे से जब पत्रकार ने पूछा तो उन्होंने साफ लहजे में कहा कि डॉक्टर अभय प्रताप सिंह एवं डॉ. अरविंद कुमार अग्रहरि हमारे लिए भगवान स्वरूप है।
यही नहीं मंगलवार को डिस्चार्ज होने के बाद मंशा चौबे खुद बुके लेकर हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अभय प्रताप सिंह के चेंबर में जाकर उन्हें भेंट किया और उन्हें अपने हाथों से मिठाई खिलाकर मुंह मीठा किया। कहने का तात्पर्य यह है कि जीवन से निराश हो चुकी मंशा चौबे को नया जीवन दान मिलने पर उनकी खुशी ठीकाना नहीं है। श्रीमती मंशा चौबे ने इसका पूरा श्रेय तेज डायग्नोस्टिक सेंटर के निदेशक बृजेश सिंह माधोपट्टी को दिया। उन्होंने ही इस अस्पताल में ऑपरेशन कराने का सुझाव दिया था।
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