Jaunpur News: मछलीशहर पड़ाव कांड : डेढ़ माह पहले ही दिल्ली से घर आयी थी प्राची

मां-बाप और बहनों की लाडली थी प्राची, मौत से टूट गया परिवार

दिल्ली में बहनों के साथ रहती थी प्राची, डेढ़ माह पहले घर पर रहने का लिया था फैसला

अंकित जायसवाल / नया सवेरा नेटवर्क

जौनपुर। आज से लगभग 25 साल पहले मियांपुर मोहल्ले के निवासी लंबू पंडित जी के घर जब किलकारी गूंजी तो बेटी का जन्म हुआ था। परिवार में खुशी का माहौल था। फिर कुछ वर्ष बीता तो एक और लड़की ने जन्म लिया। अभी एक बिटिया का पालन पोषण कर ही रहे थे कि दूसरी लक्ष्मी स्वरूपा पुत्री का आगमन हो गया। फिर भी पंडित जी खुश ही थे। कुछ वर्ष और बीता दोनों बिटिया चलने फिरने लगी तो एक और बिटिया का जन्म हुआ। गंगा, जमुना, सरस्वती की तरह तीनों बिटिया पंडित जी के गोद में खेलने लगी। मां काली के अनन्य भक्त पंडित जी ने तीनों बिटिया का पालन पोषण बड़े लाड दुलार के साथ किया। 

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तारापुर कालोनी में ब्यूटी पार्लर किया था जॉइन

एक बिटिया लगभग 25 वर्ष की है, दूसरी लगभग 22 वर्ष की है और तीसरी लगभग 18-19 वर्ष की है। तीनों ने खूब पढ़ाई की और दिल्ली जैसे महानगर में जॉब भी करने लगी। कुछ माह पहले ही दूसरे नंबर की मंझली बिटिया प्राची दोनों बहनों के साथ घर आयी थी। बड़ी बिटिया और सबसे छोटी बिटिया से प्राची ने खुद कहा कि मैं पापा के पास रुक जाती हूं क्योंकि अब गणेश पूजा, दुर्गा पूजा का त्योहार आने वाला है, पापा की व्यस्तता बढ़ जाएगी। लगभग डेढ़ माह से प्राची घर पर ही थी इसी बीच उसने तारापुर कालोनी में एक ब्यूटी पार्लर जॉइन किया जहां वह प्रतिदिन पार्लर सीखने जाती थी। 


पिता का रखती थी खास ख्याल

प्रतिदिन की तरह 25 अगस्त को भी वह पार्लर गई थी और घर पर कहा था कि तीज का त्योहार है तो उधर से पूजा का सामान लेकर लौटूंगी। जाने से पहले 25 अगस्त की सुबह पिता लंबू पंडित जी ने उसे जगाया और कहा कि बेटा आज चाय नहीं बनाओगी क्या? उठ जाओ। एक ही आवाज में प्राची उठ गई और स्नान, ध्यान के बाद अपने पापा के लिए चाय बनाकर ले आयी। पंडित जी यह बताते हुए भावुक हो गए कि प्राची मेरा बहुत ख्याल रख रही थी। पैर में दवा लगा देती थी। पैर की मसाज कर देती थी। सुबह-शाम चाय बना देती थी और जब भी घर पर रहती तो पापा कुछ खाएंगे, क्या लाऊं, पूछती रहती थी। उसके मोहमाया ने आज हमें और झकझोर कर रख दिया है। 


पिता से आखिरी बार गले लगकर गई थी प्राची

25 अगस्त 2025 के दिन बेटी प्राची घर से निकलने से पहले वह अपने पिता के गले भी लगी थी। पहले ऐसा होता नहीं था। घर में शाम 5 बजे तक सबकुछ सामान्य चल रहा था, क्योंकि प्राची 5 बजे तक घर वापस आ जाती थी। घड़ी ने जैसे ही साढ़े 5 बजाया तो पिता लंबू पंडित जी परेशान होने लगे। उन्हें अचानक से घबराहट होने लगी उन्होंने फौरन प्राची को फोन लगाया लेकिन फोन नहीं लगा और स्वीच ऑफ बताने लगा। थोड़ा देर और इंतजार करने के बाद जब प्राची घर वापस नहीं आयी तो परिजन व्याकुल हो गए। लंबू पंडित जी घर से निकले और उसकी तलाश में तारापुर कालोनी की तरफ गए। फिर सूचना मिली कि एक लड़की और एक लड़का मछलीशहर पड़ाव के नाले में गिर गए हैं। 


समाचार सुनते ही डर गया परिवार

यह समाचार सुनते ही पंडित जी को भय लगने लगा कि कहीं उसमें उनकी बेटी तो नहीं। समय बीतता गया और यह समाचार पूरे जनपद में आग की तरह फैल गया कि एक लड़की खुले मैनहोल में गिर गई और उसे बचाने में एक लड़का भी उस मैनहोल में चला गया। इतना ही नहीं इन दोनों को बचाने में एक रिक्शेवाले की भी जान चली गई। इधर लंबू पंडित जी बिटिया की तलाश में इधर उधर भटक रहे थे लेकिन कहीं कुछ पता नहीं चला। अंतत: उन्होंने यह स्वीकार कर लिया कि मेरी बिटिया ही खुले मैनहोल में गिर गई है। इधर मछलीशहर पड़ाव में सर्च ऑपरेशन जारी था। पूरा इलाका भीड़ से भरा हुआ था जितनी मुंह उतनी बातें हो रही थी। देखते ही देखते रात बित गई लेकिन किसी का कुछ पता नहीं चला। सर्च ऑपरेशन पूरे 26 घंटे तक चला। 


वी मार्ट के पीछे पठानटोलिया में मिला शव

वाराणसी से एसडीआरएफ की टीम आयी तब जाकर वी मार्ट के पीछे पठानटोलिया में दोनों का शव मिला। शव मिलते ही परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। समीर के परिजन लंबू पंडित जी से लिपटकर रोने लगे वह कहने लगे कि हमारा बेटा आपकी बेटी को बचाने में अपनी जान गवां बैठा। स्थिति इतना दर्दनाक हो गई कि वह शब्दों में बताया नहीं जा सकता। रात 8 बजे लंबू पंडित जी के परिवार को प्राची की बॉडी मिली इसके बाद शव को लेकर पहले जिला अस्पताल गए फिर वहां से पोस्टमार्टम हाउस ले गए। करीब 12 बजे के बाद प्राची का शव परिजनों को मिला। प्रशासन कह रहा था कि रामघाट पर अंतिम संस्कार कर दीजिएगा लेकिन परिवार ने कहा कि पहले शव लेकर हम घर यानी मियांपुर जाएंगे। करीब साढ़े 12 बजे शव लेकर परिजन मियांपुर पहुंचे। 


वाराणसी में अंतिम संस्कार की बात करती थी प्राची

बड़ी बिटिया प्रतिमा कह रही थी कि जब भी मरने जीने की बातें होती तो प्राची कहती थी कि हमें वाराणसी में ले जाकर जलाना। दोनों बहनें जिद करने लगी कि प्राची की अंतिम इच्छा पूरी की जाए। हालांकि पुलिस प्रशासन ने दोनों बहनों को समझाया कि वाराणसी में इन दिनों बाढ़ आयी है इनका अंतिम संस्कार रामघाट पर ही करिए। पिता लंबू पंडित जी ने भी कहा कि अब तक पूर्वजों का अंतिम संस्कार भी रामघाट पर ही किया गया है। समझाने बुझाने पर दोनों बहनें मान गईं और रात करीब 2 बजे उनका अंतिम संस्कार रामघाट पर किया गया। इसके बाद तीन बजे परिवार घर वापस आया और दोनों बहनें सुबह अस्थि कलश लेकर वाराणसी के गंगा में ले जाकर विसर्जन कर दिया। मियांपुर स्थित आवास पर शोक व्यक्त करने वालों का तांता लगा हुआ है। 


परिवार के ऊपर क्या बीत रही, इसे शब्द बयां नहीं कर सकते

पिता लंबू पंडित जी को ढांढस बंधाने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। पिता के ऊपर क्या बीत रही है यह तो वह ही जानते हैं लेकिन सबसे बातचीत कर रहे हैं। वहीं मां अपने कमरे में बदहवास पड़ी रो रही हैं। वह किसी से नहीं मिल रही है। उनका रो रोकर बुरा हाल है। पंडित जी बताते हैं कि तीनों बहनें किसी त्योहार पर एक जैसे कपड़े खरीदती थी और पहनती थी। तीनों में अच्छी बांडिंग है। अभी परिवार गरीबी से ऊबर ही रहा था कि एक बार फिर इतना बड़ा झटका लगा है। दिल्ली में दोनों बहनें थी वहां से फ्लाइट से बनारस आयी। इस दुर्घटना से परिवार को बड़ा झटका लगा है। लंबू पंडित जी दुर्गा पूजा, लक्ष्मी पूजा, गणेश पूजा, विश्वकर्मा पूजा और लोगों के घरों पर जाकर पूजा पाठ कराते हैं। 

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सवाल बहुत लेकिन जवाब देने वाला कोई नहीं

बस ईश्वर से यही प्रार्थना है कि इस दुख की घड़ी को सहन करने की शक्ति दें। सवाल यह उठता है कि जब बिजली के खंभे में करंट पहले से आ रहा था जिसकी चपेट में कुछ जानवरों की मौत हुई थी तो बिजली विभाग इसके बाद भी जागा क्यों नहीं? अगर गरीब परिवारों की जगह कोई प्रभावशाली व्यक्ति होता तो क्या महकमा अब भी शांत बैठा होता? आखिर इतनी बड़ी लापरवाही का जिम्मेदार कौन है? क्या महज 4-4 लाख रुपए की मदद से परिवारों का कल्याण हो जाएगा? सवाल बहुत है लेकिन जवाब देने वाला कोई नहीं है।

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