#Poetry: गुरु की महिमा का सार है अपार जहां | #NayaSaveraNetwork
नया सवेरा नेटवर्क
गुरु की महिमा का सार है अपार जहां,
स्वयं मां शारदे भी कहन न पाई हैं।
पारस तो लौह को सुवर्ण ही बनाता है,
गुरु निज शिष्य को बनाता अपने समान ,
कुबुद्धि के कीचड़ में फंसे हुए शिष्य को,
निर्मल करे उसे धोय गुरु ज्ञान जल ।
गुरु की महिमा का सार है अपार जहां,
स्वयं मां शारदे भी कहन न पाई हैं
गुरु से बड़ा नहीं है जग में दाता कोई,
शिष्य से बड़ा कोई याचक हुआ भी नहीं ,
तीनों लोक में नहीं है ऐसी संपत्ति कोई ,
गुरु के ज्ञान के समक्ष जो विराट लगे ।
गुरु की महिमा का सार है अपार जहां,
स्वयं मां शारदे भी कहन न पाई हैं।
सारी वसुंधरा को कागज बनाऊं यदि ,
कानन को कलम बनाऊं सारे ढूंढ - ढूंढ,
सातों पारावारों को जो स्याही बना डालूं ,
अनंत है गुरु महिमा ना लिखी जा सके ।
गुरु की महिमा का सार है अपार जहां,
स्वयं मां शारदे भी कहन न पाई हैं।
गुरु की कृपा के बिना ज्ञान मिलता है कहां ,
ज्ञान बिना मुक्ति को कैसे तुम पाओगे ,
गुरु से ज्ञान प्राप्त करो सिर भेंट देकर ,
गुरु ही हैं ऐसे जो गोविंद से मिलाएंगे।
गुरु की महिमा का सार है अपार जहां,
स्वयं मां शारदे भी कहन न पाई हैं।
अनामिका तिवारी "अन्नपूर्णा"✍️✍️✍️