Bareilly News: साइबर ठगों से बचाव में आपकी सतर्कता एवं जागरूकता ही मददगार
निर्भय सक्सेना @ नया सवेरा
बरेली। ऑन लाइन कारोबार की गति बढ़ने एवं कुछ लालच के कारण भी लोग साइबर ठगी के अक्सर शिकार बन जाते हैं। कुछ वृद्ध या महिलाएं डिजिटल अरेस्ट की भी शिकार बन जाती हैं। ऐसे समय में आप लोग अपनी सतर्कता एवं जागरूकता ही आपको साइबर ठगी से बचा सकती है। फिर भी अगर आप साइबर ठगो के जाल में फंस कर वित्तीय धोखाधड़ी के शिकार हो जाते हैं तो आप तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पैनल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। साइबर अपराध की दर के मामले में तेलंगाना और कर्नाटक सबसे आगे हैं। उत्तर प्रदेश में साइबर धोखाधड़ी की अधिक शिकायतें दर्ज होती हैं।
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 से पहले प्रदेश भर में साइबर क्राइम के मात्र दो ही थाने थे। अब हर जिले में साइबर क्राइम के थाने भी बन गए है। स्मरण रहे बरेली पुलिस ने जुलाई 2026 में चलाए गए विशेष अभियान 'साईं-वज्र' के तहत 58 साइबर ठगों को गिरफ्तार कर 1.67 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा किया था। बरेली मे बीते माह में पुलिस ने अलग- अलग छापों में कुल 58 साइबर अपराधियों को दबोचा है, जिनके पास से लगभग 26.49 लाख रुपये की नकदी, 69 मोबाइल फोन और एटीएम कार्ड बरामद किए थे। अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन : अप्रैल 2026 में भी एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ था जिसके तार चीन और नेपाल तक जुड़े थे। यह साइबर ठग एपीके फाइल भेजकर लोगों का मोबाइल हैक करते थे। और मिनटों में बैंक खाते साफ कर देते थे। बरेली में एक कचहरी स्थित ऑटो कारोबारी ने किसी को धार्मिक चंदा देने के लिए बैंक का चेक दिया था। उस व्यापारी के बैंक में जमा हुए चेक का क्लोन बनाकर मोती रकम का चेक बैंक में साइबर ठगो ने पेश कर दिया था। पर बैंक में पैसा कम होने से वह व्यापारी करोड़ो की साइबर ठगी होने से बच गया। व्यापारी ने बैंक में इसकी शिकायत भी की थी। सोशल मीडिया पर प्राप्त जानकारी के अनुसार साइबर ठगी के तरीके निम्न हैं । इसमें साइबर आरोपी डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर, एल्गो ट्रेडिंग, ऑनलाइन गेमिंग, और फर्जी कस्टमर केयर नंबर के जरिए आम जनता को अपना शिकार बनाते थे। इस तरह बरेली पुलिस ने साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। अब उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में एक- एक साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन स्थापित किया जा चुका है, जिससे उत्तर प्रदेश में कुल साइबर थानों की संख्या 75 हो गई है। इसके अतिरिक्त, राज्य के प्रत्येक सामान्य पुलिस थाने में एक साइबर हेल्प डेस्क भी बनाई गई है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अगस्त 2025 से सभी 75 जनपदों में साइबर थाने सक्रिय खुलवा
दिए थे। उत्तर प्रदेश में मुख्य साइबर क्राइम मुख्यालय लखनऊ में स्थित है। यू पी में वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में साइबर क्राइम के मात्र दो ही थाने थे। अब हर जिले में साइबर क्राइम के थाने है। उत्तर प्रदेश में साइबर धोखाधड़ी की सबसे अधिक शिकायतें दर्ज होना बताई जाती हैं। जिसमें मेरठ जिला अग्रणी है। फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार, देश का लगभग 80 प्रतिशत साइबर अपराध केवल 10 जिलों से संचालित होता है। इनमें भरतपुर (राजस्थान) 18 प्रतिशत, मथुरा (उत्तर प्रदेश) 12 प्रतिशत, नूंह 11 प्रतिशत एवं गुरुग्राम (हरियाणा) 8.1 प्रतिशत, देवघर (झारखंड) 10 प्रतिशत, जामताड़ा (झारखंड) 9 प्रतिशत बताए जाते हैं।
स्मरण रहे साइबर क्राइम में वे सभी अवैध और आपराधिक गतिविधियां आती हैं, जो कंप्यूटर, मोबाइल, इंटरनेट या किसी डिजिटल नेटवर्क का उपयोग करके या उन पर हमला करके की जाती हैं। भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के अनुसार मुख्य साइबर अपराध निम्नलिखित हैं।
प्रमुख साइबर अपराध
ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, यू पी आई, डिजिटल वॉलेट या ऑनलाइन बैंकिंग के जरिए फर्जीवाड़ा करके पैसे चुराना, या क्रेडिट/डेबिट कार्ड का डेटा चुराकर ठगी करना।
फ़िशिंग। फर्जी ईमेल, मैसेज या लिंक भेजकर किसी भरोसेमंद संस्था (जैसे बैंक) के रूप में लोगों से उनके पासवर्ड, ओटीपी और गोपनीय जानकारी हासिल करना।
रैंसमवेयर : एक प्रकार का खतरनाक सॉफ्टवेयर (मैलवेयर) जो यूजर के कंप्यूटर या फाइलों को लॉक (ब्लॉक) कर देता है और उन्हें वापस खोलने के लिए फिरौती की मांग करता है।
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पहचान की चोरी : किसी व्यक्ति की निजी जानकारी या आईडी चुराकर उसका गलत इस्तेमाल करना या उसकी जगह खुद को पेश करना।
साइबर स्टॉकिंग और उत्पीड़न : इंटरनेट, सोशल मीडिया या ईमेल के जरिए किसी का पीछा करना, लगातार परेशान करना या धमकियां देना।
हैकिंग : किसी की अनुमति के बिना उसके कंप्यूटर, सर्वर या नेटवर्क में सेंध लगाकर डेटा चुराना या सिस्टम को नुकसान पहुंचाना।
अशोभनीय सामग्री या बाल यौन उत्पीड़न सामग्री : इंटरनेट पर बच्चों या किसी अन्य व्यक्ति की आपत्तिजनक व अवैध सामग्री प्रसारित करना।
मैलवेयर और वायरस : कंप्यूटर सिस्टम को नुकसान पहुंचाने, डेटा चुराने या कामकाज बाधित करने के लिए ट्रोजन, स्पाइवेयर या वायरस भेजना। अगर आप भी साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के शिकार हो जाते हैं तो आप भी तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पैनल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।
शिकायत दर्ज करने के मुख्य तरीके और
हेल्पलाइन नंबर : तुरंत 1930 डायल करें। यह वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने और पैसे को होल्ड करने में मदद करता है। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पैनल की
आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपनी शिकायत और घटना का पूरा विवरण दर्ज करें।
आप अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर सेल में भी रिपोर्ट दर्ज करा सकते हैं। साइबर क्राइम के नंबर 1930 पर कॉल करने या पोर्टल पर शिकायत करने पर 14 अंकों की पावती संख्या आपको मिल जाएगी।
सबूत सुरक्षित रखें : आप अपने ट्रांजैक्शन आईडी, बैंक स्टेटमेंट, स्क्रीनशॉट और संदेश को संभाल कर रखें।
त्वरित कार्रवाई : धोखाधड़ी होते ही जितनी जल्दी शिकायत करेंगे, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ही अधिक होगी। नेट पर प्राप्त जानकारी के अनुसार देश में साइबर धोखाधड़ी की सबसे ज्यादा शिकायतें उत्तर प्रदेश में दर्ज की जाती हैं जबकि साइबर अपराध की दर के मामले में तेलंगाना और कर्नाटक भी सबसे आगे हैं। उत्तर प्रदेश में साइबर धोखाधड़ी की अधिक शिकायतें दर्ज होती हैं। तेलंगाना और कर्नाटक राज्यों में साइबर अपराध का अनुपात और दर काफी उच्च दर्ज की गई है। जिन राज्यों में इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं का उपयोग अधिक है, वहां मामलों की संख्या भी ज्यादा है। फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार, देश का लगभग 80 प्रतिशत साइबर अपराध केवल 10 जिलों से संचालित होता है।
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