Poetry: ज्योतिर्लिंग सोमनाथ पर कजरी
नया सवेरा नेटवर्क
ज्योतिर्लिंग सोमनाथ पर कजरी
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चला घूमि आई सोमनाथ धाम सखी
लइ भोले क नाम सखी न।
नीलकंठ, डमरू वाले,
सारी दुनिया में निराले,
जे भी जल चढ़ावइ,पूरा होला काम सखी
लइ भोले क नाम सखी न।
हौं सौराष्ट्र के अभिमान,
करइं देव भी गुणगान,
भक्त पुण्य घट भरइं जहां अविराम सखी
लइ भोले क नाम सखी न।
अइलें लूटइ आतताई
झोली भरि गइल हो भाई
सोना-चांदी पइलें म्लेच्छगण तमाम सखी
लइ भोले क नाम सखी न।
मिलल देश कइ आजादी
भइ पटेल कइ मुनादी
जीर्णोद्धार भइल दर क सुबहोशाम सखी
लइ भोले क नाम सखी न।
जे करइ जलाभिषेक
पावइ शुभ खबर अनेक
लइ कांवड़िया चला, कइ आई प्रणाम सखी
लइ भोले क नाम सखी न।
जबसे लाग बा सवनवां
वश मा बाटइ नाहीं मनवां
एनकेन करा कवनउ इंतजाम सखी
लइ भोले क नाम सखी न।
चला घूमि आई सोमनाथ धाम सखी
लइ भोले क नाम सखी न।
सुरेश मिश्र
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