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अभिव्यक्ति की आजादी

नया सवेरा नेटवर्क

        हमारे देश में जब संविधान बना तो उसमें सबकी दिनचर्या समान रूप से चले ,सब खुलकर बोल सकें,किसी पर किसी तरह का दबाव न पड़े,हर भारतवासी पूरे भारत में उत्तर से लेकर दक्षिण तक पूरब से लेकर पश्चिम तक कहीं भी जाकर रह सकता है, रोजी रोटी कमा सकता है।उसकी सुरक्षा की गारंटी संविधान देता है।उस पर कोई किसी तरह का दबाव नहीं बना सकता।न भाषा को लेकर न प्रांत को लेकर।जिसका नाम है अभिव्यक्ति की आजादी।इसका मतलब है कि देश विरोधी बात छोड़कर और जनता में आपकी बात से उन्माद न फैले,इस बात का ध्यान रखते हुए आप कुछ भी बोलने के लिए आजाद हैं।खासकर भाषा को लेकर यह नियम बहुत जरूरी था। इसलिए बनाया गया था। क्योंकि भारत में तमाम आंचलिक भाषाएं बोली जाती हैं।भाषा को लेकर विवाद न हो,इसलिए अभिव्यक्ति की आजादी जैसा कानून संविधान में बनाया गया।

       मगर अभिव्यक्ति की आजादी नेताओं की रखैल बनकर रह गई है।और संविधान नेताओं का बंधुआ मजदूर बनकर रह गया है। नेतागण जब चाहें जैसा चाहें संविधान को तोड़ मरोड़ सकते हैं,अपने हिसाब से।जैसे आरक्षण को ले लीजिए।आरक्षण संविधान में सिर्फ १०%शिक्षा के क्षेत्र में दलितों के लिए था।वह १० वर्ष के लिए।मगर हाय रे सत्ता की भूख और गिरी हुई राजनीति,आरक्षण खत्म करने की बजाय बढ़ाते गये।इतना बढ़ाये कि उसमें ओबीसी जोड़ दिए।आरक्षण केवल हिन्दू दलितों के लिए था।उसमें मुस्लिम व बौद्धों को भी शामिल किए। फिर पिछड़ा अति पिछड़ा महिला जोड़ दिए।आते आते १०%सवर्ण के लिए भी जोड़ दिए। सुप्रीम कोर्ट कहती रह गई कि आरक्षण की समीक्षा हो।५०% से अधिक न हो।मगर समीक्षा कौन कहे करने की।उसे हनुमान जी की पूंछ बनाते जा रहे हैं।और ७०- ७५ प्रतिशत तक पहुॅंचा दिए।

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      इसी तरह कई संसोधन कर बहुत कुछ उसमें घुसेड़ दिए।जैसे ३७०,३५ ए,वक्फ बोर्ड,पर्सनल ला बोर्ड,हिन्दू अधिनियम कोड बिल,वर्शिप आप पेशेस ऐक्ट, धर्मनिरपेक्षता,मंडल कमीशन आदि आदि।और जिसे घुसेड़े उसे शक्ती से लागू भी किए।और जो संविधान में लिखा था जैसे समानता का अधिकार,युसीसी,जनसंख्या नियंत्रण, अभिव्यक्ति की आजादी,जो जनता के मौलिक अधिकार थे, उसे आजतक लागू नहीं किए। सरकारें कई आई गईं।मगर वही किए जो उनके हित में था।जो जनहित में था,उसे कचरें में दबाती जा रही हैं। अभिव्यक्ति की आवश्यकता जनता को है।मगर नेता गण उसे अपने हिसाब से हांक रहे हैं।आज महाराष्ट्र में गैर मराठी भाषी लोगों की अभिव्यक्ति की आजादी छीन ली गई है तो,कोई नेता अभिव्यक्ति की बात नहीं कर रहा। जेएनयू में जब भारत विरोधी नारे लगे तब यही विपक्ष था,जो कह रहा था,ए तो अभिव्यक्ति की आजादी है।आज गरीब जनता से जबरन भाषा के नाम पर महाराष्ट्र सरकार उनका रोजगार छीन रही है। मराठी बोलने के नामपर, तो कोई भी पार्टी यह सवाल नहीं कर रही कि यह अभिव्यक्ति की आजादी का हनन है।मजे की बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट भी मौन है।इससे साफ जाहिर है कि संविधान नेताओं का बंधुआ मजदूर हैं।और अभिव्यक्ति की आजादी नेताओं की रखैल है।

पं.जमदग्निपुरी


एस.आर.एस. हॉस्पिटल एण्ड ट्रामा सेन्टर  📍 तेज डायग्नोस्टिक सेन्टर के सामने (पेट्रोल पम्प के बगल में), नईगंज तिराहा, जौनपुर   ☎️ 7355 358194, 05452-356555      🏥🏥🏥  👨🏻‍⚕️ डा. अभय प्रताप सिंह  MBBS (KGMU), DNB(Ortho), MS (Ortho) UCN, FIJR (Germany), MNAMS आर्थोस्कोपिक एण्ड ज्वाइंट रिप्लेसमेन्ट आर्थोपेडिक सर्जन हड्डी रोग विशेषज्ञ ओ.पी.डी. प्रतिदिन  👨🏻‍⚕️ डा. आनन्द त्रिपाठी  MBBS, MD, DM (Neuro) न्यूरो फिजिसियन ओ.पी.डी. प्रतिदिन  👨🏻‍⚕️ डा. राजेश त्रिपाठी  MBBS, MD (Anesthisia) एनेस्थिसिया रोग विशेषज्ञ ओ.पी.डी. प्रतिदिन  👩🏻‍⚕️ डा. नेदा सलाम  CGO स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ ओ.पी.डी. प्रतिदिन  👨🏻‍⚕️ डा. एस. के. मिश्र  MBBS, MS (General Surgeon) जनरल सर्जरी विजिटिंग ऑन काल  👩🏻‍⚕️  डा. चंचला मिश्रा  MBBS, MS (Obs & Gyn.) स्त्री रोग विशेषज्ञ विजिटिंग ऑन काल  👨🏻‍⚕️ डा. अरविन्द कुमार अग्रहरि  MBBS, MS, MCH (Neuro) न्यूरो सर्जन विजिटिंग ऑन काल
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