Poerty: बस इसी बहाने.....!
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बस इसी बहाने.....!
मित्रों....सामने वाले की....!
हर गलती को माफ करना,
मैंने अपनी आदत में.....
शुमार कर लिया है.....
एक इसी छोटे से....
हृदय परिवर्तन से प्यारे,
मैंने तो प्रशंसक अपने...
बेशुमार कर लिया है.....
इस माया जगत में प्यारे....!
लोग कहते हैं अक्सर...
कि छोटी सी जिंदगी जो है
मौज-मस्ती में काटो यारों...!
मोहब्बत में इसके ही तो....
मैंने आने वाले सुखों के लिए.....!
इंतजार कर लिया है.....
आस में इसके ही....मैने....
मुस्कुराने की डाल ली आदत ऐसी
कि राह के अजनबी से भी मैंने,
अपनी आँखें चार कर लिया है....
खुशनसीबी भी मेरी देखो तो यारों...
मिली आँखें जिससे भी मेरी...
खुद उन्होंने ही....अपने को....
मेरा गुनहगार कर लिया है.....
वफ़ाई की भी हद तो देखो मेरी...
साथ निभाने की पक्की कसम...
झट से खा ली मैंने....
लगता है ऐसा....जैसे मैंने....
सामने वाले से पगार लिया है
और तो और....बदले में...
लौटाई जो मोहब्बत मैंने ...
लोग कहने लगे कि....शायद....!
मैंने उनसे उधार लिया है...
कल्पना मत मानो इसे प्यारे....!
बवाली दुनिया मे...
ख़ुद अपने से ही....अपने को...
मैंने इतना सुधार लिया है....
इतना ही नहीं....दौराने नापंसन्दगी
मैंने मौन....अलग से साधकर....
सब कुछ सुन लेने की ठान लिया है...
आप सोचो कि क्या इससे मैंने....!
किसी का घर-बार लिया हैं....
पर सच मानो इसे प्यारे....
कि इसी बहाने....अपने जीवन को..
कर सदाबहार लिया है....!!
इसी बहाने....अपने जीवन को..
कर सदाबहार लिया है....!!
रचनाकार.....
जितेन्द्र कुमार दुबे
अपर पुलिस उपायुक्त, लखनऊ
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