BREAKING

Jaunpur News: किसी को जीविका देना पुण्य से कम नहीं : विद्यार्थी

जिस घर में बड़ों का होता है सम्मान, वहां है रामराज

ठा. अशोक सिंह की पुण्यतिथि पर रामचरित मानस पाठ श्रवण कर श्रोता हुए मंत्रमुग्ध

नया सवेरा नेटवर्क

जौनपुर। ठा. अशोक सिंह की 5वीं पुण्यतिथि के अवसर पर महरूपुर स्थित हनुमान जी के मंदिर परिसर में आयोजित तीन दिवसीय रामचरित मानस पाठ के पहले दिन प्रकाश चंद्र पाण्डेय विद्यार्थी ने बाबू अशोक सिंह की पुण्यतिथि पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाबू अशोक सिंह बड़े ही शिद्दत के साथ रामकथा सुनते थे। इस दौरान वह रामकथा सुनते सुनते भावुक हो जाते थे। उनका कहना था कि जिस भाषण में राम का नाम न हो वह भाषण नहीं होता है। वह अक्सर किसी कार्यक्रम में भाषण के दौरान रामचरित मानस की चौपाइयां सुनाना नहीं भुलते थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में हजारों लोगों को जीविका दिया। किसी को जीविका देना भी बड़े पुण्य का काम होता है। रामचरित मानस पाठ के पहले दिन गुरु वशिष्ठ के साथ जनकपुर में गए राम लक्ष्मण के संवाद को बड़े ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि जिस घर में छोटा भाई बड़े भाई का सम्मान करता है उस घर में समृद्धि आने के साथ साथ रामराज स्थापित होता है।

उन्होंने कहा कि जनकपुर जाने के बाद रामजी का जनकपुर भ्रमण करने का मन था लेकिन उन्होंने गुरु से भाई लक्ष्मण का बहाना बनाकर जनकपुर का भ्रमण करने के लिए आज्ञा मांगी। रामायण में बहुत कम संवाद लक्ष्मण जी का रहा है। सबसे अधिक रामजी का ही रहा लेकिन जब भी उनका संवाद हुआ बड़ा ही कड़क था। उनके कड़क मिजाज से धरती भी डगमगा जाती थी। उन्होंने कहा कि बिना सत्संग के विवेक नहीं मिलता है और बिना राम की कृपा से सत्संग में जाने का सौभाग्य भी नहीं होता है। उन्होंने रामेश्वरम में सागर पार करने का भी बड़े ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुतिकरण किया। कहा कि समुद्र पार करने के लिए नल नील ने राम का नाम लिखकर जिस पत्थर से पुल बनाया उस पर पार होने के लिए संकट खड़ा हो गया। कोई भी वानरी सेना उस भगवान का नाम लिखे पत्थर पर पैर रखकर जाने को तैयार नहीं हुआ। स्थिति को भांपते हुए भगवान राम स्वयं उस पत्थर पर जाकर बीच समुद्र में खड़े होकर जलचर पुल तैयार किया। 

चंद घड़ी में जलचर पुल बनकर तैयार हो गया तो जामवंत जी ने कहा कि रामजी हम लोग इतना परेशान थे तो यह पुल पहले ही आप बना देते। पत्थर का बना पुल यह कर्तव्य का पुल है और दूसरा मेरी कृपा का पुल है। कहने का तात्पर्य यह है कि किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए कर्तव्य करना पड़ता है। नि:स्वार्थ भाव और निष्ठा से कर्तव्य करने वालों पर भगवान की कृपा स्वत: हो जाती है, इसीलिए हर मनुष्य को अपना मंजिल पाने के लिए कर्तव्य करना जरूरी है। डॉ. अनुप ओझा ने भी अपने मुखार बिंदु से रामचरित मानस के कई प्रसंगों को बड़े ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। इससे पूर्व टीडीपीजी कॉलेज के प्रबंधक राघवेंद्र प्रताप सिंह, देवेंद्र प्रताप सिंह, शिवेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व सांसद केपी सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र सिंह, पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. सुभाष सिंह, धर्मेंद्र सिंह, अशोक सिंह रघुवंशी, आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. आरएन त्रिपाठी, वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत सिंह, पूर्व ब्लॉक प्रमुख सुरेंद्र प्रताप सिंह, कथावाचक प्रकाश चंद्र विद्यार्थी का माल्यार्पण किया।

यह भी पढ़ें | Jaunpur News: शॉर्ट सर्किट से लगी आग से गेहूं की खड़ी फसल जलकर नष्ट









OPD Start : अशोक हॉस्पिटल महरुपुर वाराणसी-जौनपुर रोड जफराबाद जौनपुर | Emergency Contact : 7565955001, 7575955002
विज्ञापन


्र,



Admissions Open for Session 2026–27: Umanath Singh Higher Secondary School | 📞 Contact:  7705805821, 9839155647 | Shankarganj, Maharupur, Jaunpur, Uttar Pradesh – 222180
विज्ञापन



नया सबेरा का चैनल JOIN करें