Poetry: हुजूर बस अपना नाम देदो
नया सवेरा नेटवर्क
हुजूर बस अपना नाम देदो
लिखूं मैं,बस अपना नाम देदो
हुजूर बस अपना नाम देदो ।
तुम्हारा भी काम हो जाये
मेरा भी काम हो जाये।
मेरा भी कुछ बिक जाये
तेरा भी नाम हो जाये ।
हुजुर ! थोड़ी युगलबंदी हो जाय
फिर काम आसान हो जाय।
छप जायेगा,तेरा सीना दो गुना हो जायेगा
दोनों मजे मारेंगे, मेरा भी झोला भर जायेगा।
संगीत करते हो, साहित्य भी रचते हो
राजनीति करते हो, साहित्य भी रचते हो ।
जब लोग जान जायेंगे
तुम से मिलने आयेंगे ।
तेरा हस्ताक्षर लेंगे
साथ फोटो खिंचायेंगे ।
आभासी ही सही
दोस्तों को दिखायेंगे ।
दूसरों की कम सुनेंगे
अपनी पेलते जायेंगे।
हम किसी से नहीं कम हैं
हमारे में भी वो दम है ।
समय के अनुसार बदलो
नीरस चूसो,ये लो लोला लो ।
जमाने के हिसाब से गोला दो
हुजूर बस अपना नाम देदो।
कवि मुरलीधर मिश्र

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