Jaunpur News: भगवान राम के हाथ तरना चाहता था रावण : डॉ. आरपी ओझा
अयोध्या में रामराज तब तक जब चारों भाई आए : विद्यार्थी
भगवान शिव ने हंस पक्षी का रूप धारण कर राम कथा सुनी
जिस पुत्र की प्रशंसा सुनकर पिता हो जाए प्रफुल्लित
ठा. अशोक सिंह की पुण्यतिथि पर रामकथा सुन मंत्रमुग्ध हुए श्रोतागण
नया सवेरा नेटवर्क
जौनपुर। ठा. अशोक सिंह की 5वीं पुण्यतिथि के अवसर पर महरूपुर स्थित हनुमान जी के मंदिर परिसर में आयोजित तीन दिवसीय रामचरित मानस प्रवचन के अंतिम दिन प्रकाश चंद्र पाण्डेय विद्यार्थी ने बाबू अशोक सिंह की पुण्यतिथि पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाबू अशोक सिंह बड़े ही शिद्दत के साथ रामकथा सुनते थे। इस दौरान वह रामकथा सुनते सुनते भावुक हो जाते थे।
ठा. अशोक सिंह की पुण्यतिथि के अवसर पर रामचरित मानस प्रवचन के अंतिम दिन प्रकाश चंद्र पाण्डेय विद्यार्थी ने कहा कि अपने पिता की समृद्धि, सम्मान और संस्कार को बनाए रखना पुत्र के लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि राम को राजा बनाने की कल्पना राजा दशरथ की नहीं हो पायी। अयोध्या में रामराज तब आया जब भगवान राम लक्ष्मण 14 वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद अयोध्या आए और भरत और शत्रुघ्न भी पहुंचे तब जाकर रामराज कायम हुआ। उन्होंने कहा कि जिस पुत्र की प्रशंसा सुनकर पिता प्रफुल्लित हो जाए उस पुत्र का जन्म लेना इस संसार में सार्थक हो जाता है। ऋषि भुसुंडी की कथा सुनने के लिए भगवान शिव ने हंस पक्षी का रूप धारण करके बड़े ही मन से कथा सुनी। उन्होंने कहा कि विभीषण की कुटिया के सामने हनुमान जी ने लंका में रामकथा सुनाई और अशोक वाटिका में हनुमान जी ने माता सीता के सामने राम की प्रशंसा की प्रस्तुति की। पूरे दुनिया में 137 भाषाओं में रामचरित मानस का अनुवाद हुआ है।
उन्होंने माता सबरी के भक्ति का बड़े ही मार्मिक ढंग से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि माता सबरी ने अपने गुरु के बताए हुए रास्ते पर चलकर एक दिन भगवान राम ने उनको अपना दर्शन दिया और उनके भक्ति की प्रशंसा भी की। सबरी ने भगवान राम का एक झलक पाकर संतुष्ट हो गई। कहने का एक तात्पर्य यह है कि जो भी भक्त धैर्य के साथ भगवान की भक्ति करेगा तो एक न एक दिन भगवान की कृपा उस पर अवश्य होगी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की योग्यता उसके विनम्रता में दिखाई देती है। अंतिम दिन विद्यार्थी ने कहा कि बाबू अशोक सिंह अखण्ड ज्ञान के दीप को जलाकर गए हैं और उसी दीप के उजाले में उनके पुत्र उनके यश और कीर्ति को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने धनुष यज्ञ के प्रसंक को बड़े ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राम ने सीता जी को देखा और सीता जी ने राम को देखा। लक्ष्मण ने धनुष यज्ञ के दृश्य को देखकर लक्ष्मण ने कहा हे प्रभु वर की माला आप ही के गले में पड़ेगी।
डॉ. आरपी ओझा ने रामचरित मानस पाठ के कई प्रसंगों को बड़े ही अच्छे ढंग से श्रोताओं को सुनाया। उन्होंने रावण और भगवान राम के बीच युद्ध को बड़े ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करते हुए कहा कि रावण सबकुछ जानते हुए भी अनजान बना हुआ था क्योंकि उसे भगवान के हाथ तरना था। उन्होंने कहा कि जब भगवान राम ने रावण को मारने के बाद निर्जन टीला पर बैठकर सोच रहे थे, उसी दौरान रानी मंदोदरी पहुंची इसीलिए कि वह जानना चाहती थी कि कौन सा ऐसा वीर है कि जो मेरे पति को मारा है वह कौन सा बलि है। रानी मंदोदरी को देखकर भगवान राम ने कहा कि इस निर्जन जगह पर आप क्यों आयी हैं? तो उन्होंने कहा कि लंकेश विद्वान और अच्छे कुल में पैदा होने के बाद इतना अत्याचार किया कि मुझे मजबूर होना मारना पड़ा। मंदोदरी ने कहा कि भगवान राम आपमें और मेरे पति में यही अंतर है कि वह इतनी अच्छी पत्नी के रहते हुए भी दूसरे की पत्नी का हरण किया और आप एक ऐसे पुरुष है कि किसी पत्नी को देखकर संबोधन से भी पता चल गया कि आप और लंकेश में क्या अंतर है।
कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेता ज्ञान प्रकाश सिंह ने ठा. अशोक सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ब्रह्मदेव मिश्रा, सत्यप्रकाश सिंह, वंशलोचन सिंह, कांग्रेस नेता इंद्रभुवन सिंह, पूर्व प्राचार्य डॉ. समर बहादुर सिंह, प्रो. अरविंद सिंह, पूर्व ब्लॉक प्रमुख सुनील प्रताप सिंह, पूर्व आयोग के सदस्य डॉ. आरएन त्रिपाठी, अशेाक रघुवंशी, पूर्व सांसद केपी सिंह, शिवेंद्र प्रताप सिंह, आशुतोष मिश्रा, वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र सिंह, दुष्यंत सिंह, विजय मौर्या, कृष्ण कुमार सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे।

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