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Bareilly News: साहीवाल नस्ल के पांच उत्कृष्ट बछड़ों का सफल उत्पादन

निर्भय सक्सेना @ नया सवेरा 

बरेली। आईसीएआर–भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) ने स्वदेशी दुधारू पशु प्रजनन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल करते हुए उन्नत सहायक प्रजनन तकनीक के माध्यम से साहीवाल नस्ल के पांच उत्कृष्ट बछड़ों (4 नर एवं 1 मादा) का सफल उत्पादन किया है। पहला बछड़ा, ‘गौरी’ नामक मादा, 28 फरवरी 2026 को जन्मा जिसके बाद अगले चार दिनों में चार स्वस्थ नर बछड़ों का भी जन्म हुआ। स्वदेशी पशु नस्लों में उच्च स्तरीय जैव- प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग की दिशा में एक मील का पत्थर है। 

आईबीआरआई में अल्ट्रासाउंड-मार्गदर्शित ट्रांसवेजाइनल ओसाइट एस्पिरेशन, इन- विट्रो भ्रूण उत्पादन एवं एम्ब्रियो ट्रांसफर तकनीक के माध्यम से प्राप्त यह सफलता स्वदेशी पशु नस्लों में उच्च स्तरीय जैव- प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग की दिशा में एक मील का पत्थर है। पहला बछड़ा, ‘गौरी’ नामक मादा, 28 फरवरी को जन्मा, जिसके बाद अगले चार दिनों में चार स्वस्थ नर बछड़ों का जन्म हुआ। यह महत्वपूर्ण कार्य डॉ. बृजेश कुमार (पशु प्रजनन विभाग) के नेतृत्व में डॉ. विक्रांत सिंह चौहान एवं डॉ. विकास चंद्र (दैहिकी एवं जलवायु विज्ञान विभाग) तथा डॉ. एम. के. पात्रा (पशुधन उत्पादन प्रबंधन अनुभाग) के सहयोग से संपन्न किया गया। पिछले ढाई वर्षों में टीम ने साहीवाल, थारपारकर एवं मुर्रा भैंस में ओपीयू –आईवीएफ तकनीकों का सफल मानकीकरण किया।

यह उपलब्धि डॉ. एस. के. सिंह, संयुक्त निदेशक (शोध) के मार्गदर्शन में प्राप्त हुई, जिसमें डॉ. मुकेश सिंह, डॉ. एम. एच. खान, डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह एवं डॉ. अनुज चौहान का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संबंधित विभागों के शोधार्थियों ने भी इसमें उल्लेखनीय भूमिका निभाई।

इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए आई सी ए आर के उप महानिदेशक (पशु विज्ञान) एवं आई वी आर आई के निदेशक डॉ. राघवेंद्र भट्टा ने विश्वास जताया कि यह सफलता देश में सहायक प्रजनन तकनीकों के क्षेत्र में नवाचार को नई दिशा देगी और आनुवंशिक सुधार कार्यक्रमों को गति प्रदान करेगी।

कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) के सचिव एवं आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने इस उपलब्धि को भारतीय पशुधन क्षेत्र में परिवर्तनकारी कदम बताते हुए कहा कि उन्नत प्रजनन तकनीकों का व्यापक प्रसार किसानों की आय वृद्धि एवं सतत कृषि विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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आईवीआरआई भविष्य में इन तकनीकों के माध्यम से उत्कृष्ट स्वदेशी गोवंश एवं भैंसों के उत्पादन को और बढ़ाने के साथ-साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने पर भी विशेष ध्यान केंद्रित करेगा। यह पहल न केवल पशुधन उत्पादकता बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए देश के डेयरी क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएगी।

इन बछड़ों का उत्पादन उच्च आनुवंशिक क्षमता वाले जर्मप्लाज्म से किया गया है। दाता साहीवाल गाय प्रतिदिन 12 लीटर से अधिक दूध उत्पादन करने वाली उत्कृष्ट पशु थी, जबकि उपयोग किया गया वीर्य एक प्रमाणित सांड से प्राप्त था, जिसकी माता का दुग्ध उत्पादन लगभग 3320 किलोग्राम प्रति दुग्धावधि रहा है। यह चयनित प्रजनन दृष्टिकोण स्वदेशी नस्लों की उत्पादकता बढ़ाने के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

आईवीआरआई ने वर्षटी 2018 में एम्ब्रियो ट्रांसफर तकनीक के माध्यम से स्वदेशी गोवंश प्रजनन कार्यक्रम की शुरुआत की थी, जिसके अंतर्गत इन-विवो तकनीकों, विशेषकर मल्टीपल ओव्यूलेशन एंड एम्ब्रियो ट्रांसफर के जरिए लगभग 30 बछड़ों का उत्पादन किया गया। हालांकि, उच्च हार्मोनल लागत एवं संचालन संबंधी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने वर्ष 2022-23 में ओपीयू-आईवी एफ़ तकनीक को अपनाया, जो अधिक प्रभावी एवं व्यावहारिक सिद्ध हुई। 

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