Jaunpur News: बासंतिक नवरात्र में मां नवदुर्गा शक्ति स्वरूप का विशेष पूजन
नया सवेरा नेटवर्क
जौनपुर। सनातन धर्म में चैत्र नवरात्र का विशेष महत्व है। चैत्र नवरात्र देवी मां दुर्गा को समर्पित होता है। मां दुर्गा की पूजा करने से सुखों में वृद्धि होती है। इस बार 19 मार्च 2026 से चैत्र नवरात्रि की शुरूआत है जो 27 मार्च को समाप्त होगी। यह नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की भव्य पूजा को समर्पित है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि की शुरूआत होती है। इसका समापन नवमी तिथि पर किया जाता है। यह नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को भव्य पूजा को समर्पित है। इस अवधि में मां दुर्गा उपासना दुर्गा सप्तशती पाठ पूजन करने से साधक की सभी समस्याएं समाप्त होती हैं। साथ ही मां दुर्गा की विशेष कृपा भी प्राप्त होती हैं।कहते हैं कि नवरात्रि के दिनों में देवी पृथ्वी लोक पर आती हैं, इसलिए उनकी आराधना पूजन हमेशा विधि विधान से करनी चाहिए। इस बार चैत्र नवरात्रि में माता रानी पालकी पर सवार होकर आ रही है। मां दुर्गा की विदाई हाथी पर होगी। आपको बता दें कि देवी दुर्गा का वाहन सिंह होता है लेकिन जब माता रानी नवरात्रि में पृथ्वीलोक पर आती हैं तब उनकी सवारी बदल जाती है। नवरात्रि में मां अंबे का वाहन का अलग-अलग संकेत देता है पालकी पर सवार होकर आ रही हैं जो बेहद शुभ और धन लाभ का संकेत है। इस संयोग में माता की पूजा पूर्ण विधि से करने पर वह प्रसन्न होती है और
सभी दुखों को हरती है। ऐसे में नवरात्रि के पहले दिन की पूजा विधि के बारे में विस्तार से जानते है। पूजा से पहले कलश स्थापना का विधान है।
सबसे पहले एक पके मिट्टी के पात्र को लेकर थोड़ी सी मिट्टी पात्र के नीचे डाल दें। फिर इस पात्र में जौ के बीज डालकर उसे मिलाएं। इसके बाद मिट्टी के पात्र पर पानी से छिड़काव करें। अब आप एक लोटा लेकर उसपर स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं। उसके ऊपरी हिस्से में मौली बांधकर साफ जल भरें। इस जल में दूब, अक्षत, सुपारी और कुछ पैसे रख दें। अशोक की पत्तियां कलश के ऊपर रख दें। अब पानी के एक नारियल को लाल चुनरी से लपेटकर मौली बांध दें। नारियल को कलश के बीच चावल में रख दें और बाद में इसे पात्र के मध्य में स्थापित कर दें। नवरात्रि की पूजा से पहले विधि-विधान से शुभ मुहूर्त में घटस्थापना (कलश स्थापना) 19 मार्च 2026 को की जाएगी। मुख्य शुभ मुहूर्त सुबह 06:52 बजे से 07:43 बजे तक (51 मिनट) है। यदि सुबह का समय छूट जाए तो अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक घटस्थापना की जा सकती है। घट स्थापना करें।
वहीं नवरात्रि के पहले दिन शैलपुत्री माता की पूजा की जाती है। आप पूजा करने के लिए सबसे पहले अभ्यारी करें और उसपर लौंग का जोड़ा रखें अब देवी के समक्ष ज्योति जलाएं। फिर कुछ मौसमी फल और बताशे प्रसाद के रूप में रखें। अब कुमकुम, हल्दी, सफेद चंदन, अक्षत, सिंदूर अर्पित करें।
इसके अलावा आप पान, सुपारी, लींग, नास्थिल 16 श्रृंगार का सामान चढ़ा सकते हैं। नवरात्रि के पहले दिन देवी को सफेद रंग का पुष्प अर्पित करें। फिर दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। प्रथम
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चैत्र नवरात्र तिथि
पहला दिन - 19 मार्च को मां शैलपुत्री की पूजा। दूसरा दिन- 20 मार्च को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा।
तीसरा दिन-21 मार्च को मां चंद्रघंटा की पूजा।
चौथा दिन- 22 मार्च को मां कूष्मांडा की पूजा।
पांचवां दिन- 23 मार्च को मां स्कंदमाता की पूजा।
छठवां दिन-24 मार्च को मां कात्यायनी की पूजा।
सातवां दिन-25 मार्च को मां कालरात्रि की पूजा।
आठवां दिन-26 मार्च को मां गौरी 27 मार्च नवमी तिथि में मां सिद्धिदात्री की पूजा होगी। वासंतिक (चैत्र) नवरात्रि हिंदू नववर्ष (नवसंवत्सर) की शुरुआत में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का यह पावन पर्व जो शक्ति, शुद्धि और नई ऊर्जा का प्रतीक है। नौ दिनों के इस उपवास से आध्यात्मिक उन्नति, नकारात्मकता का नाश और रामनवमी के साथ धर्म की ध्वजा विजय सुनिश्चित होती है जो भक्त के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती है।
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