Poetry: ब्राह्मणवाद से आजादी
नया सवेरा नेटवर्क
ब्राह्मणवाद से आजादी
लोकतंत्र का हासिल क्या है, ब्राह्मणवाद से आजादी!
इस जीवन का मकसद क्या है, ब्राह्मणवाद से आजादी!
आजादी का मतलब क्या है, ब्राह्मणवाद से आजादी!
हरेक मर्ज की एक दवा है, ब्राह्मणवाद से आजादी।
घर में बीबी लड़े तो मांगो, ब्राह्मणवाद से आजादी!
पेट जोर से झरे तो मांगो, ब्राह्मणवाद से आजादी!
भाई से ना पटे तो मांगो, ब्राह्मणवाद से आजादी!
घर में राशन घटे तो मांगो, ब्राह्मणवाद से आजादी!
दही के ऊपर मलाई क्यों है, यह बाभन की गलती है।
भारत मे महंगाई क्यों है, यह बाभन की गलती है!
लड़ता भाई भाई क्यों है, यह बाभन की गलती है!
जुम्मन मियां कसाई क्यों है, यह बाभन की गलती है!
पॉल्यूशन को कम करना है तो ब्राह्मण को गाली दो!
भ्रष्टाचार खतम करना है तो ब्राह्मण को गाली दो।
दुखते पर मरहम करना है तो ब्राह्मण को गाली दो।
बदली दीन-धरम करना है तो ब्राह्मण को गाली दो।
जो सत्ता के बाहर है वह भी ब्राह्मण से लड़ता है,
जो सत्ता पर काबिज है, वह भी ब्राह्मण से लड़ता है।
सो सत्ता को ताड रहा, वह भी ब्राह्मण से लड़ता है!
जो सत्ता को मार रहा, वह भी ब्राह्मण से लड़ता है।
किसी की आत्मा जाग गयी, वह ब्राह्मण को गरियायेगा,
किसी की बीबी भाग गयी वह ब्राह्मण को गरियायेगा।
कोई लेखक ना बन सका, वह ब्राह्मण को गरियायेगा।
किसी की पुस्तक नहीं बिकी वह ब्राह्मण को गरियायेगा।
एक तरफ भिखमंगा भी है, और शोषण भी करता है,
बुद्ध कबीर ईशा मूसा निःशस्त्र सभी से लड़ता है।
सब उसको ही मार रहे हैं, हाय न फिर भी मरता है।
सत्ताधारी बिलख रहे कि शासन बाभन करता है।
गदहा खेत उजाड़े लेकिन दोष लगे पटवारी को,
घर में सोये सोये जनता कोस रही सरकारी को।
स्वर्ग के देवों नमन करो इस भारत की हुशियारी को!
जूते मारें असलम भाई, गाली पड़े तिवारी को!
अपनी असफलताओं खातिर दुनिया जिसपर खींस उतारे,
राजनीति में टिकने खातिर नेता जिसपर पत्थर मारें।
शत्रु धर्म के जिस से चिढ़ कर निशदिन अपनी गर्दन फाड़ें,
किंतु विप्र यह सब कुछ सह कर केवल अपना धर्म विचारे।
कवि सर्वेश तिवारी श्रीमुख
गोपालगंज, बिहार।
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