Varanasi News: संस्कृति में साहित्य से आई व्यापकता : मिथिलेशनंदिनी शरण
नया सवेरा नेटवर्क
वाराणसी। साहित्य ही सनातन का मूल है। सनातन धर्म से जुड़े जितने भी ग्रंथ हैं सब के सब अतिउन्नत साहित्य का ही हिस्सा हैं। साहित्य ने ही सनातन को सतत निरंतरता प्रदान की है। यदि हमारे पास उन्नत साहित्य की यह थाती न होती तो हमारी संस्कृति में व्यापकता और सकारात्मक विचारों के दर्शन का समावेश नहीं होता। ये बातें अयोध्या के हनुमत पीठाधीश्वर आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण महाराज ने कहीं। वह दुर्गाकुंड स्थित श्रीहनुमान प्रसाद पोद्दार अंधविद्यालय परिसर में रविवार से आरंभ हुए दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय काशी कवि कुंभ के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि काशी सदैव से ज्ञान की भूमि के रूप में संपूर्ण ब्रह्मांड को आलोकित करती आ रही है। आधुनिक काल में यही कार्य काशी की साहित्यिक संस्थाएं मिलकर इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से कर रही है। कविताम्बरा, विश्व हिन्दी शोध संवर्धन अकादमी, लोकभाषा अनुसंधान केंद्र एवं सेठ एमआर. जयपुरिया स्कूल बाबतपुर जैसे संगठनों का इस आयोजन से जुड़ा होना या प्रमाणित करता है कि साहित्य के उत्थान में समाज और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोग अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। अध्यक्षीय संबोधन में देहरादून के नवगीतकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने कहा कि यह दुखद पक्ष है कि वर्तमान समय में जीवन का छंद बिखरता जा रहा है। जीवन के उन्हीं छंदों को उनके मूल स्वरूप में लौटने का प्रयास ऐसे साहित्यिक आयोजनों के माध्यम से सफल हो सकता है।
नई सदी के स्वर भाग पांच में 181 रचनाकार
नई सदी के स्वर भाग पांच में देशभर के 181 रचनाकारों की रचनाओं का संग्रह किया गया है। यह कृति लगभग सात सौ पृष्ठों की है। इसके पूर्व के चार भागों को मिलाकर 4228 पृष्ठों का संग्रह तैयार हुआ है। पहले चार भागों में एक हजार से अधिक रचनाकार शामिल हैं। इसके भाग एक, दो और तीन पर शिवाजी विश्वविद्यालय कोल्हापुर, महाराष्ट्र में विद्यार्थियों द्वारा शोध भी किया जा रहा है। इसके भाग दो और तीन को इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स में भी स्थान मिल चुका है।
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साहित्यकारों का सम्मान
समारोह में लाइफ टाइम अचीवमेंट सम्मान समाजसेवी डॉ. एके. कौशिक और समाजसेवी डॉ. आर के. ओझा को दिया गया। वर्ष 2026 का उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान समाजसेवी डॉ. महेश जिंदल एवं समाजसेवी डॉ. आशुतोष मिश्र चिकित्सा विभूषण सम्मान, हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. अजय पांडेय को ‘जनसेवा शिरोमणि’ सम्मान भेंट किया गया। वरिष्ठ साहित्यकारों में लखनऊ डॉ. उमाशंकर शीतिकण्ठ, कोलकाता के महाकवि डॉ. रामेश्वरनाथ मिश्र ‘अनुरोध’, पटना के डॉ. रत्नेश्वर सिंह, आजमगढ़ के डॉ. रुद्रनाथ चौबे, मुंबई की डॉ. रोशनी किरण, मुजफ्फरपुर के आलोक त्रिपाठी, काशी के शैलेश अस्थाना, भोपाल के डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडेय, वाराणसी के गौरीशंकर तिवारी ‘तृप्त’ शामिल हैं। सभी को सम्मान स्वरूप मानपत्र, अंगवस्त्रम और पांच हजार की राशि दी गई। मधुलिका राय, जयप्रकाश धानापुरी, टीकाराम शर्मा ‘आचार्य’, शालिनी जायसवाल, ऋतु दीक्षित, प्रभात मिश्र, दीपक शर्मा, डॉ. नसीमा निशा, निशा दूबे, सत्यम मिश्रा, आजमगढ़ के विशाल चौरसिया एवं ग्वालियर की आरती अक्षत को सम्मान स्वरूप मानपत्र, अंगवस्त्रम एवं 11 सौ रुपये की राशि दी गई।
कवितांबरा व पुस्तकों का विमोचन
उद्घाटन सत्र में ‘नई सदी के स्वर’ भाग पांच, पं. हीरालाल मिश्र ‘मधुकर’ की कृति ‘वैदिक साहित्य में राम कथा’ एवं कविताम्बरा के दो अंकों का विमोचन मंचासीन अतिथियों ने किया। संगोष्ठी में किया विमर्श इसके बाद ‘आधुनिक हिन्दी साहित्य में राष्ट्रीय चेतना’ विषयक संगोष्ठी में नेपाल की सांसद डॉ. रेखा यादव ‘निर्झर’, डॉ. उमाशंकर शुक्ल ‘शीतिकंठ’, महाराष्ट्र राज्य हिंदी अकादमी, मुंबई के प्रभारी अध्यक्ष डॉ. शीतला प्रसाद दूबे, कोल्हापुर के प्रो.अर्जुन चौह्वाण, डॉ. रामेश्वरनाथ मिश्र ‘अनुरोध’, मुजफ्फरपुर के डॉ. संजय पंकज, मिर्जापुर के डॉ. ओमप्रकाश श्रीवास्तव ‘प्रकाश मिर्जापुरी’, नवगीतकार डॉ. रंजीत पटेल, रामायणधर द्विवेदी, कानपुर के अरुण तिवारी, गाजियाबाद की उपासना सिंह आदि ने संबंधित विषय पर सारगर्भित वक्तव्य दिए। आगतों का स्वागत पं. हीरालाल मिश्र ‘मधुकर’ और संचालन डॉ. रामसुधार सिंह ने किया।

