Mumbai News: हिंदी के विद्यार्थियों ने रचा सफलता का इतिहास
के. सी. कॉलेज के चार विद्यार्थियों का राजभाषा विभाग में चयन
मुंबई। इस सप्ताह एचएसएनसी विश्वविद्यालय के के.सी. कॉलेज हिंदी-विभाग ने एक उल्लेखनीय उपलब्धि अर्जित की है। विभाग के चार प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का देश के पांच प्रतिष्ठित संस्थानों के राजभाषा विभागों में चयन हुआ है। यह सफलता न केवल विद्यार्थियों की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि हिंदी भाषा की व्यावसायिक संभावनाओं को भी सशक्त रूप से रेखांकित करती है। चयनित विद्यार्थियों में पल्लवी जायसवाल और सुप्रिया पंधारे का चयन आयात-निर्यात बैंक में, अभिमन्यु कुमार का मुंबई पोर्ट अथॉरिटी में एवं संस्कृति सिंह का चयन हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड राजस्थान रिफाइनरी कॉर्पोरेशन लिमिटेड में हुआ है। इन विद्यार्थियों का चयन लगभग 17 से 19 लाख रुपये के वार्षिक पैकेज पर हुआ है। विशेष उल्लेखनीय है कि पल्लवी जायसवाल का दो प्रतिष्ठित संस्थानों में चयन विभाग की शैक्षणिक गुणवत्ता और विद्यार्थियों की प्रतिभा का सशक्त प्रमाण है।
फोटो : पल्लवी जायसवाल, सुप्रिया पंढारे, संस्कृति सिंह, अभिमन्यु कुमार
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कुलपति ने दी बधाई
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) हेमलता बागला ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनकी मेहनत, योग्यता और जज्बे का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व को संस्कारित और पूर्ण बनाने वाली शक्ति है। रोजगार की दृष्टि से हिंदी के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं, किंतु योग्य प्रतिभाओं का अभाव स्पष्ट रूप से महसूस किया जा रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों और अभिभावकों से हिंदी को एक सशक्त करियर विकल्प के रूप में देखने का आह्वान किया।
प्राचार्य ने बताया प्रेरणास्रोत
महाविद्यालय की कार्य प्रभारी प्राचार्य प्रो. (डॉ.) तेजश्री शानभाग ने चयनित विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी सफलता अन्य भाषा-विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि इस तथ्य को प्रमाणित करती है कि हिंदी का अध्ययन आज कॉर्पोरेट और प्रशासनिक क्षेत्रों में भी सम्मानजनक स्थान दिला रहा है।
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विभागाध्यक्ष ने व्यक्त किया हर्ष
हिंदी-विभागाध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार राय ने इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इसका पूरा श्रेय विद्यार्थियों की लगन और सतत परिश्रम को जाता है। उन्होंने कहा कि हिंदी-विभाग का गौरवशाली इतिहास अनेक प्राध्यापकों, शिक्षकों, पत्रकारों और राजभाषा अधिकारियों के निर्माण से समृद्ध रहा है, और इन विद्यार्थियों ने उस परंपरा में एक और स्वर्णिम पृष्ठ जोड़ दिया है। यह उपलब्धि स्पष्ट करती है कि हिंदी आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि उज्ज्वल भविष्य की ठोस आधारशिला भी बन चुकी है।
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