Mumbai News: मुंबई में मेहनत, प्रतापगढ़ में भक्ति
आनंद पांडेय ने पेश की कामयाबी की नई मिसाल
नया सवेरा नेटवर्क
मुंबई. यदि व्यक्ति में इच्छाशक्ति, निष्ठा, ईमानदारी और जुनून हो तो कोई भी कार्य असम्भव नहीं है, जिसे पूरा न किया जा सके. सफलता के लिए न उम्र आड़े आती है और न ही धन वैभव. वह अपनी कर्मठता और सतत प्रयास से सफलता का इतिहास जरूर रच देता है. बहुत कम ही लोग हैं, जो व्यवसाय और धर्म क्षेत्र दोनों में एक साथ सफलता हासिल कर पाते हैं. ऐसे लोगों में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के कुंडा पुरानूपुर के मूल निवासी आनन्द पांडेय शामिल हैं. इन्होंने अपने यौवन के मात्र 13 वर्ष में सुप्रसिद्ध कथावाचक राजन महाराज की श्रीराम कथा आयोजित कर प्रतापगढ़ ही नहीं पूरे देश में चर्चा का विषय बन गए.
पांडेय जी की प्रारंभिक शिक्षा कुंडा के आस-पास के स्कूलों और कॉलेजों में हुई. शिक्षा पूरी होने के बाद रोटी रोजी की तलाश में आनन्द पांडेय 2012 में मुंबई पहुंचे. इन्होंने रिलायंस कैपिटल में नौकरी शुरू की. शुरुआत में इनका रिलायंस ऑफिस से डॉक्यूमेंटेशन ले जाना और दूसरे आफिस में पहुंचाना यही काम था. यह सिलसिला 2018 तक चलता रहा, लेकिन इसके बाद उन्होंने रिलायंस कंपनी का काम छोड़ दिया. रिलायंस कंपनी छोड़ने के बाद इन्होंने डंपर के व्यवसाय में अपना भाग्य आजमाने का निर्णय लिया. जैसे इन्होंने व्यवसाय शुरू किया, 2020 में महामारी कोरोना ने विश्व में ऐसा तहलका मचाया कि पुरानी कंपनियां भी दम तोड़ने लगीं.
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--कोरोना काल पांडेय के लिए बना वरदान
अन्य क्षेत्र में भी काम ठप हो गए. जीवन जैसे थम सा गया. लेकिन कोरोना काल पांडेय को वरदान साबित हुआ. कोरोना काल में इनका व्यवसाय रफ्तार पकड़ लिया. इन्हें इनको सफलता की मंजिल मिल गयी. इसके बाद इनके मन में भगवान की कथा कराने का विचार आया. ये अपने साथियों से ऐतिहासिक कथा के आयोजन की बात करते तो लोग हंसते थे. जब तक राजन महाराज ने व्यासपीठ से नहीं बता दिया कि 2025 अक्टूबर में आनंद पांडेय के यहां कथा होगी, तब तक इन पर कोई विश्वास ही नहीं करता था. इसके बाद माता पिता के आशीर्वाद से कथा की तैयारियां शुरू हुईं. भव्य तरीके से कथा का शुभारंभ हुआ.
--राजा भैया के संरक्षण में बही राम कथा की धारा
सुप्रसिद्ध कथावाचक राजन महाराज को सुनने के लिए प्रतापगढ़ ही नहीं आसपास के जिलों के लोग पहुंचने लगे. इस भव्य कथा के आयोजन में इनके गांव के लोगों का भी बहुत बड़ा योगदान है. कथा के लिए लोगों ने अपनी खड़ी फ़सलें कटवा दीं. इन लोगों ने नुकसान भरपाई के एवज में एक पैसा भी नहीं लिया. इस धार्मिक कार्यक्रम के संरक्षण का दायित्व विधायक राजा भैया संभाल रहे थे, इसलिए इस कथा में चार चांद लग गया. अंत में बड़े सरल भाव से आनंद पांडेय ने कहा, करते हैं कन्हैया मेरा नाम हो रहा है. ऐसा कार्यक्रम मैं नहीं हनुमत लला ने सम्पन्न कराया.

