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"अ" अनपढ़ से शुरू होती है,और "ज्ञ" ज्ञानी बनाकर समाप्त होती है! -पुष्पेन्द्र सिंह | Naya Sabera

 "अ" अनपढ़ से शुरू होती है,और  "ज्ञ" ज्ञानी बनाकर समाप्त होती है!  -पुष्पेन्द्र सिंह

"अ" अनपढ़ से शुरू होती है,और  "ज्ञ" ज्ञानी बनाकर समाप्त होती है!  -पुष्पेन्द्र सिंह


हिंदी विश्व की प्राचीन, समृद्ध, सरल और प्रेम की भाषा है।

हिंदी मात्र बोल-चाल की माध्यम नहीं है,अपितु यह संपूर्ण भारत को जोड़ने वाली पावन भाषा-सेतु है।

हिंदी भारत को एकात्मता में पिरोती है।यह भारतीय संस्कृति की संवाहक भी है,जो कि पूरे भारत को एकता के सूत्र में बांधती है।

मातृभाषा #हिंदी हमारी अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम होने के साथ-साथ हमारे चिंतन की गहराई तथा वैश्विक पटल पर भारत के बढ़ते गौरव की प्रतिध्वनि है। यह वह सेतु है,जो हमारी पारंपरिक मेधा को आधुनिक नवाचारों से जोड़ते हुए हमें विश्व नागरिक के रूप में विशिष्ट पहचान प्रदान करती है।

सभी हिंदी प्रेमियों को 'विश्व हिंदी दिवस' की हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं।

“हिंदी हमारी राष्ट्रीय एकता, समृद्ध संस्कृति एवं गौरवशाली परंपरा का दर्पण है। संपूर्ण विश्व में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली इस भाषा की सरलता,सहजता और अभिव्यक्ति के सामर्थ्य ने इसे वैश्विक समुदाय में विशेष सम्मान व प्रतिष्ठा प्रदान की है।”

आज इस विशेष दिन पर अपनी मातृभाषा हिंदी के गौरव की रक्षा करना हमारा सामूहिक दायित्व है। हिंदी को जन-जन की वाणी बनाने और इसे वैश्विक शोध एवं संवाद की मुख्यधारा में प्रतिष्ठित करने का संकल्प लें।


आइए, हिन्दी के उत्थान और प्रसार को अपना साझा दायित्व मानते हुए उसे अपनी दिनचर्या, संवाद एवं कार्य संस्कृति में अधिकाधिक स्थान देने हेतु संकल्पित हों।

आप सभी को विश्व हिंदी दिवस की हार्दिक बधाई व अशेष शुभकामनाएं।

🪷पुष्पेन्द्र सिंह🪷

(जनसेवक-मछलीशहर,जौनपुर)

 #WorldHindiDay



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