Poetry: निर्णय तुम ही लो......!
नया सवेरा नेटवर्क
निर्णय तुम ही लो......!
पिछली पीढ़ी मा भइया....!
सरसो कै सब तेल लगावै,
उबटन से मालिश होय....
अब तो पैदा होय से पहिले ही....!
तेल विदेशी घर-घर होय....
किसिम-किसिम कै साबुन लागै,
रंग-रूप सब भले अटपटा होय....
पाउडर सब कै सब एन्टीजर्म रहै...
पानी मा...एंटीसेप्टिक डाल नहाय...
तबहूँ अचरज देखा रे भइया....!
इन सबकै....खजुहट होय-2 जाय...
गड़ही-गुच्चा और तालाब मा,
या फिर....गँवई नदी-नाद मा....!
मलि-मलि देह सबै नहाय,
रोग-दोष से खुदै लड़ि लेवै,
हृष्ट-पुष्ट....सबकै देह देखाय....
चार मीटिंग सब भोजन लेवै,
देखि-देखि बदन उनकै....!
सबकै हिय हरसाय....
बरहौ मास एक तरह से....!
जीवन उनकै बीता जाय....
मन भर सब उछरैं-कूदैं
ठंडी-गर्मी दुइनौ ही....बदन से....!
आपहि आप भागि-2 चलि जाय....
ए सी-कूलर-हीटर कै नाम न जानै,
बस मटकी ही...सबका फ्रीज़ बुझाय
नीम के दतुईन मुँह में डारे,
कोस परग सब चलि-चलि जाय....
औ...लोटि-लोटि उहीं धूरी मा....!
सूघर देह सब लेय बनाय....
दतुईन के बदले अब ब्रश-मंजन,
आँखिन मा ना अब कबहुँ अंजन,
घर ही मा सब नित्य-क्रिया....!
घर ही मा सब मनोरंजन.....
माटी से दूरी भरपूर भईल बा,
गुल्ली-डंडा, कंचा-गोली से....
नयकी पीढ़ी....बहुतै दूर भईल बा...
छाती पर सबकै चढ़ा है क्रिकेट,
हर बात है इनकी बेहद सीक्रेट...
धुआँ उड़ाएं...हर ओर सड़क पर...
चाहे निकर बुलेट से छोड़ै,
या फिर....पी करके सिगरेट....
एतनै नाहीं भैया.....!
ख़ुद कै मानत हैं ई बेस्ट....
अउ....चारिउ ओर कहत हैं कि....
जनरेशन हउवे ई नेक्स्ट....
ई सब तो अपनी जगह मा भइया...!
नयकी पीढ़ी गाँव-देश मा,
ना देत बुजुर्गन के कउनो रिस्पेक्ट...
ना कबहुँ कउनो बातन में.....!
फील करत ई सब रिग्रेट....
अब निर्णय तुम ही लो मोरे भइया..!
कौन सी पीढ़ी है ग्रेट.....?
अउर कउन सी पीढ़ी कै....
गुणगान करी हम.....!
औ....कउने से करी हम हेट....?
रचनाकार.....
जितेन्द्र कुमार दुबे
अपर पुलिस उपायुक्त,लखनऊ


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