Jaunpur News: आपसी सदभाव से ही समाज की प्रगति संभव
कर्मयोग, मद्य निषेध एवं विकसित भारत विषयक गोष्ठी का आयोजन
नशा-मुक्ति, जनजागरण एवं सामाजिक सुधार पर हुई सारगर्भित चर्चा
नया सवेरा नेटवर्क
उन्होंने कहा कि समाज की प्रगति तभी संभव है जब संकीर्णता समाप्त हो, आपसी सद्भाव बढ़े और विविधता में एकता के सिद्धांत को आत्मसात किया जाए। विभिन्न विभागों एवं समाज के सभी वर्गों के बीच समन्वय विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। कर्मयोग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कर्म ही पूजा है, कर्म से ही राष्ट्र व समाज का विकास संभव है। सेवा-भाव, निस्वार्थ कर्म तथा सद्भावना समाज को आगे बढ़ाने की सबसे बड़ी शक्ति है। काम, क्रोध और लोभ को मानव जीवन का पतनकारी बताया तथा इनसे दूर रहने का आह्वान किया।
उन्होंने वर्तमान पीढ़ी, विशेषकर छात्रों एवं युवाओं से कहा कि वे समाज, राष्ट्र और मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें और अपने कर्मों को यज्ञ-भाव से करें।
जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र ने कहा कि समाज और प्रशासन के सामंजस्यपूर्ण विकास में आध्यात्मिक संगठनों का योगदान महत्वपूर्ण योगदान है। गायत्री परिवार की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि गायत्री परिवार केवल एक संस्था नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर धर्म, संस्कृति और संस्कारों के ध्वजवाहक के रूप में कार्य कर रहा है। यह संगठन गांव गांव में पहुंचकर संस्कारित और जिम्मेदार नागरिक तैयार करने के अपने संकल्प को निरंतर आगे बढ़ा रहा है।
अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रतिनिधि डॉ संजय चतुर्वेदी ने कहा कि गायत्री परिवार केवल एक संस्था नहीं, बल्कि संस्कारवान मानव निर्माण का वैश्विक आंदोलन है। उन्होंने कहा कि समाज में नैतिकता, सद्भाव एवं सेवा भावना जगाने का कार्य यह संगठन निरंतर कर रहा है।
इस्कॉन परिवार के प्रतिनिधि दिव्य नितायी दास ने कर्मयोग, राष्ट्रनिर्माण तथा भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा पर विस्तृत प्रकाश डाला।
कहा कि मिशन कर्मयोगी प्रधानमंत्री द्वारा दिया गया एक दूरदर्शी कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक, कर्मचारी तथा अधिकारी को कर्मचारी से आगे बढ़कर कर्मयोगी बनाना है। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम हमें रूल बेस्ड से रोल बेस्ड कार्य पद्धति की ओर ले जाता है, जहां लक्ष्य केवल फाइल मूवमेंट नहीं, बल्कि परिणाम आधारित कार्य संस्कृति है। कर्म के तीन आयाम कर्मभोगी, कर्मत्यागी एवं कर्मयोगी का उल्लेख करते हुए कहा कि कर्मयोगी वह है जो व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण के लिए योगदान दे।
उन्होंने वसुधैव कुटुम्बकम् के आदर्श को मानवता का सर्वोच्च संदेश बताया तथा कहा कि भारतभूमि पर जन्म लेना एक विशिष्ट जिम्मेदारी है।
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उन्होंने सभी से आग्रह किया कि कर्मयोग के सिद्धांतों को जीवन में अपनाते हुए कर्तव्यनिष्ठ, परिणाममुखी और राष्ट्रहित सर्वोपरि रखने वाली कार्यशैली विकसित करें, ताकि भारत को पुनः विश्व गुरु के रूप में स्थापित किया जा सके।
इस दौरान विभिन विद्यालय से आए प्राचार्य और अधिकारी को मुख्य अतिथि ने भगवत गीता की पुस्तक भेट की। जिलाधिकारी ने अपने लिखी पुस्तक कर्मकुभ को मुख्य अतिथि सहित मंचासीन अतिथियों को भेंट किया।
मुख्य अतिथि द्वारा सभी उपस्थित लोगों को नशा मुक्ति हेतु शपथ भी दिलाई गई। संचालन सलमान शेख तथा मुख्य विकास अधिकारी ध्रुव खाड़िया ने आभार किया।


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