Poetry: कितना मुश्किल होता है...
नया सवेरा नेटवर्क
कितना मुश्किल होता है
कभी-कभी दिल को समझाना, कितना मुश्किल होता है, कभी-कभी खुद को ही मनाना, कितना मुश्किल होता है।
दिल में कुछ, आंखों में कुछ हो, सब के बस की बात नहीं, चेहरे पे चेहरे को लगाना, कितना मुश्किल होता है।
आंखों में बारिश थी उसके चेहरे पर आंधी तूफाँ, जज़्बातों को लब पर लाना, कितना मुश्किल होता है।
जाते हैं तो फिर न आए, सुनकर ऐसी बात कभी, जाते-जाते फिर न जाना, कितना मुश्किल होता है।
कहते हैं कि अब के आना, बादल में बरसात लिए, सूखे-सूखे लौट के आना, कितना मुश्किल होता है।
- संतोष झा
अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, कोंकण रेलवे

