Jaunpur News: मौत की बारिश ने खड़े किए बड़े सवाल, कौन है तीन युवाओं की मौत का जिम्मेदार!
पठानटोलिया से 26 घंटे बाद मिले बाकी दो के शव, अब किस विभाग पर तय होगा दोष!
बग़ैर ढक्कन वाले सीवर में प्रवाहित करंट बना तीन युवाओं का काल
सै. हसनैन कमर दीपू @ नया सवेरा
जौनपुर। बीते सोमवार की शाम 4.30 से 5.30 बजे तक एक घंटे बग़ैर धार टूटे अनवरत बारिश ने शहर को सराबोर कर दिया था। सड़क पर चलने वाले दुकानों की छांव ढूंढते रहे, यही वह समय था जब तारापुर कालोनी से पार्लर से लौट रही युवती प्राची मिश्रा मछलीशहर पड़ाव के उस खुले मैनहोल की चपेट में आ गई जहां करंट फैला था और वो नाले में जा गिरी। उसे बचाने को उधर से गुजर रहे युवक मो. समीर और ई रिक्शा चालक शिवा गौतम लपके तो वह भी 'पानी और करंट' रूपी काल के गाल में समा गए। इस तरह उनके लिए यह 'मौत की बारिश' साबित हुई। इसके बाद पुलिस-प्रशासन उसी सीवर लाइन के खुले मैनहोल को खोदने लगा जिसमें तीन जिंदगियां अपना अस्तित्व खो चुकी थीं यानी उनके पास नाले का ब्लू प्रिंट नहीं था।
दरअसल मछलीशहर पड़ाव जहां से तहसील मुख्यालय और कस्बे तक जाने को वाहन मिला करते रहे हैं, ऐसे ही नामधारी पड़ाव हर तहसील के लिए हैं, जहां पांच दशक पुराने खुले और बंद नाले हैं। घटना स्थल के सीवर लाइन का मैनहोल ढक्कन विहीन यानी जाली भी नहीं लगी थी। तेज़ बारिश में सड़क 'नहर' में तब्दील हो गई थी। उस खुले मैनहोल में पानी ऐसे खिंच रहा था जैसे उफनाई नदी में घूमती भंवर हो। इसी भंवर में प्राची मिश्रा खिंच गई और डूबते हुए उसके हाथ बाहर दिखे तो उसे बचाने के लिए समीर और शिवा दौड़ पड़े, लेकिन वह भी काल कवकित हो गए।
मछलीशहर पड़ाव के इस घटनास्थल पर दरअसल दो रूपों में मौत मौजूद थी, तीनों युवा पानी से तो बच जाते मगर छिपा हुआ करंट उनको ताकतविहीन कर दिया। अब यहीं दो विभाग के आला जिम्मेदार नगर पालिका की अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी और बिजली विभाग के अधिशासी अभियन्ता और एसडीओ पर पब्लिक की तरफ़ से सवाल खड़े हैं? इसका जवाब मिलना ही चाहिए क्योंकि अब जनता की जान जोखिम में पड़ चुकी है। दिलचस्प पहलू तो ये है कि इस घटना से घंटे भर पहले हुई प्रशासनिक बैठक में वाराणसी की तर्ज पर आगामी त्योहारों और बारिश के मद्देनज़र करंट के फैलने से रोकने को सभी बिजली के पोल पर प्लास्टिक की पन्नी चिपका दिये जाने का दावा बिजली विभाग ने किया था, जिसकी पोल नगर पालिका की तरह बिजली विभाग की भी तेज़ बारिश में खुल गई। पांच दशक में पहली बार अतिक्रमण भी परोक्ष रूप से जानलेवा साबित हुआ है।
मछलीशहर पड़ाव के घटना स्थल वाला नाला सड़क पर तो अंडर ग्राउंड था लेकिन पठानटोलिया तक वह खुला था, जैसे-जैसे विकास के नाम पर भवन बनते गए उसी रफ्तार में नाला सिकुड़ता और दफ़न होता गया, उसके ऊपर बड़े माल शॉप और सत्ताधारी दल के कई नेताओं के मकान भी पिलर के सहारे नाले पर ही बना हुआ दिखाई पड़ रहा है। जहांगीराबाद मोहल्ले से सटा हाल के दशकों से यह तहसील वाले पड़ाव के रूप में प्रचलित हुआ। आज स्थिति ये है कि यहां से रौजा तक जाने का रास्ता भी नहीं है, मृतकों के शव कटघरे वाले नाले से निकालने को एक दुकानों वाले कटरे से गुजरना पड़ा। डीएम डॉ. दिनेश चंद्र और एसपी डॉ. कौस्तुभ अपने मातहतों के साथ लगातार 26 घंटे तक घटनास्थल की जानकारी लेते रहे और समय समय पर मौका मुआयना भी करते दिखे। डीएम डॉ. दिनेश चंद्र ने त्रिस्तरीय जांच के लिए तत्काल आदेश दिए जिसमें सीआरओ, एसपी सिटी और अधीक्षण अभियंता विद्युत जांच के लिए नामित किया है, जो अपना कार्य में जुट गई है। प्रथम दृष्टया जो रिपोर्ट सामने आ रही है वो तीनों की मौत करंट की चपेट में आने से हुई है। ऐसे में लोगों की निगाहें जांच टीम की रिपोर्ट पर लगी हुई है। तीन मौत के जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी?
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