#JaunpurNews : मुझे एक बार फिर सरहद से मेरी मां बुलाती है | #NayaSaveraNetwork
नया सवेरा नेटवर्क
जौनपुर। साहित्य वाचस्पति डाॅ. श्रीपाल सिंह क्षेम की तेरहवीं पुण्यतिथि पर भव्य कवि सम्मेलन एंव मुशायरे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कवयित्री सुदामा सौरभ ने चरनन में मन लागा हमार माई वाणी वंदना से किया। इसके बाद शायर अंसार जौनपुरी ने-यहां पर मत बांटो त्रिशूल यहां पर मत बांटों तलवार। राम की धरती पर रावण की नहीं चलेगी यार।। जैसी कविताओं से राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। कवयित्री डाॅ० विभा तिवारी ने-इसलिए हां कहा मुझको, उसका चेहरा नहीं उतर जाये।
जैसी गजल सुनाकर श्रृंगार रस की छटा बिखेरी। संचालक सभाजीत द्विवेदी"प्रखर" ने डाॅ. क्षेम के व्यक्तित्व को रेखांकित किया। उन्होंने चूड़ी खनकायी तेरा बायां हाथ टूट गया। लगने लगा कि अब दाहिने के बारी है के माध्यम से पाकिस्तान को चेतावनी दी। ओज के कवि डाॅ. रणजीत सिंह ने-"वतन किस हाल में होगा यही चिंता सताती है। मुझे इक बार फिर सरहद से मेरी मां बुलाती है" जैसी रचनाएं सुनाकर श्रोताओं में राष्ट्रीय चेतना प्रवाहित की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पं. रामदयाल द्विवेदी ने डा. क्षेम की कविताएं सुनाकर उन्हे श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता पं. रामकृष्ण त्रिपाठी तथा आभार ज्ञापन अरविन्द कुमार सिंह"बेहोश जौनपुरी" ने किया। उक्त अवसर पर धात्री तिवारी, अंकुश कुमार, फूलचन्द्र भारती, दयाशंकर सिंह, देवी सिंह आदि उपस्थित रहे।


