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#Article: इंटरमिटेंट फास्टिंग करने का क्या है सही तरीका? | #NayaSaveraNetwork

नया सवेरा नेटवर्क

इंटर्मिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting) एक ऐसा आहार तरीका है जिसमें खाने और उपवास करने के बीच समय का अंतर रखा जाता है। इसमें दिन के कुछ घंटों या सप्ताह के कुछ दिनों तक उपवास किया जाता है और बाकी समय में भोजन किया जाता है। यह पद्धति इस बात पर जोर देती है कि कब खाना चाहिए, न कि क्या खाना चाहिए।
उद्देश्य: 
इंटर्मिटेंट फास्टिंग का मुख्य उद्देश्य शरीर को एक नियमित उपवास की प्रक्रिया से गुजरने देना है ताकि स्वास्थ्य में सुधार हो सके। यह वजन घटाने, चयापचय सुधारने, और शरीर की प्राकृतिक प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने में मदद करता है। साथ ही, इसे जीवन को संतुलित और अनुशासित बनाने के लिए भी अपनाया जाता है।
प्रकार:
  • 16/8 विधि: इस पद्धति में आप 16 घंटे तक उपवास रखते हैं और बाकी 8 घंटे में भोजन करते हैं। यह सबसे लोकप्रिय तरीका है।
  • 5:2 विधि: इसमें हफ्ते के 5 दिन सामान्य भोजन किया जाता है और 2 दिन सिर्फ 500-600 कैलोरी का सेवन किया जाता है।
  • ईट-स्टॉप-ईट: इस विधि में हफ्ते में एक या दो बार 24 घंटे का उपवास रखा जाता है। जैसे रात के खाने से अगले दिन रात के खाने तक कुछ नहीं खाना।
  • वैकल्पिक दिन उपवास: इसमें एक दिन उपवास और अगले दिन सामान्य भोजन का चक्र होता है।
  • योद्धा आहार (Warrior Diet): इसमें दिनभर कम मात्रा में कच्चे फल और सब्जियों का सेवन किया जाता है और रात में एक बड़ा भोजन किया जाता है।
लाभ:
  • वजन घटाने में मदद: इंटर्मिटेंट फास्टिंग से शरीर की अतिरिक्त वसा कम होती है, जिससे वजन घटाने में सहायता मिलती है।
  • चयापचय में सुधार: यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है और इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाता है, जिससे टाइप 2 डायबिटीज का जोखिम कम होता है।
  • दिल की सेहत: कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप को नियंत्रित करके हृदय रोगों के जोखिम को कम करता है।
  • मस्तिष्क के लिए फायदेमंद: इंटर्मिटेंट फास्टिंग से मानसिक स्पष्टता बढ़ती है और मस्तिष्क की कार्यक्षमता में सुधार होता है।
  • दीर्घायु: कुछ शोध बताते हैं कि इंटर्मिटेंट फास्टिंग जीवन काल को बढ़ाने में मदद कर सकता है।
हानि:
  • चिड़चिड़ापन और थकान: शुरुआत में भूख की वजह से कुछ लोगों को चिड़चिड़ापन और थकान महसूस हो सकती है।
  • अत्यधिक भूख: लंबे समय तक उपवास के बाद अत्यधिक भूख लगने की संभावना होती है, जिससे अधिक खाने का खतरा होता है।
  • स्वास्थ्य समस्याएं: गर्भवती महिलाएं, मधुमेह रोगी और अन्य कुछ स्वास्थ्य स्थितियों वाले लोगों के लिए यह आहार पद्धति हानिकारक हो सकती है।
  • पोषण की कमी: अगर भोजन के समय में सही पोषक तत्व नहीं मिले, तो शरीर में पोषण की कमी हो सकती है।
निष्कर्ष: इंटर्मिटेंट फास्टिंग एक ऐसा आहार तरीका है जो सही तरीके से अपनाने पर न केवल शारीरिक स्वास्थ्य, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार ला सकता है। हालांकि, इसे शुरू करने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थितियों को ध्यान में रखना और डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। सही जानकारी और सावधानी से इस पद्धति का पालन करके इसके अधिकतम लाभ उठाए जा सकते हैं।

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