नया सवेरा नेटवर्कमोदी सरकार के तीसरे शासन काल का पहला आम बजट 23 जुलाई को संसद में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया|आम चुनाव के बाद का यह पहला आम बजट था|पक्ष वाले इसे शानदार संतुलित व विकासोन्मुखी बजट बता रहे हैं|तो विपक्ष वाले सरकार बचाने वाला बजट बता रहे हैं|मगर इस आम बजट में आम आदमी को क्या मिला,न पक्ष बता रहा है न विपक्ष|पक्ष अपनी पीठ थपथपा रहा है|और विपक्ष सिर्फ विरोध कर रहा है|जो उसका सिद्धांत है|जिस पर वह अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानता है|चुनाव सभी आम आदमी को आगे रखकर लड़ते हैं|मगर चुनाव के बाद आम आदमी को इतना पीछे रखते हैं कि वह सीढ़ी लगाने के बाद भी नहीं दिखता|जैसा कि इस बार के बजट से भी दिख रहा है|सभी सेक्टर के लिए तमाम योजनायें तो दिख रही हैं|मगर आम आदमी के लिए दूर दूर तक कुछ भी नहीं है इस आम बजट में भी|
इस आम बजट में वह वस्तुएं सस्ती हुई हैं जो रोजमर्रा की नहीं हैं|वो वस्तुएं सस्ती नहीं हुई जो रोजमर्रा की हैं|जिससे आम आदमी रोज दो चार हो रहा है|आम आदमी के रोजगार की बात न के बराबर है|खाने पीने की वस्तुएं जस की तस बनी हुई हैं|तेल और गैस का भाव अपने उच्च स्तर पर ही बना हुआ है|जिससे आम आदमी की आज कमर टूट रही है|न कायदे का रोजगार देने की बात हुई है न मंहगाई कम करने की बात इस बजट में हुई है|सुलभ व सुरक्षित यात्रा की बात इस बजट में भी नहीं की गई है|इस आम बजट से अम आदमी खास करके मध्यमवर्ग एकबार फिर ठगा सा महसूस कर रहा है|हर बार की तरह इस बार भी जो मन में मंहगाई का भय था|इस आम बजट में भी कुल मिलाकर वही है|
रोजगार के नाम पर लालीपाप ही जनता को हर बार दिया जाता है|मोदी सरकार की मुद्रा लोन बेरोजगारों बेसहारों को सहारा देने की महत्वाकांक्षी योजना 2014 से बड़े जोर शोर से चलाई जा रही है|इस योजना के लाभार्थियों को बिना गारंटी के दस लाख लोन देने की बात मोदी सरकार ने की थी,और आज भी कर रही है|मगर इस लोन का लाभार्थी आज तक अपने पास पड़ोस व दूर दराज तक का कोई मिला नहीं|यह भी एक सफेद हाँथी जैसा ही है|सरकार कहती है मुद्रा योजना का लाभ उन बेरोजगारों को मिलेगा जिनके पास या तो रोजगार नहीं है,या है तो नाकाफी है|उनके सहयोग के लिए बिना गारंटी व गारंटर के यह लोन दिया जायेगा|बैंक कहती है पहले दस हजार बैंक में जमा करो|इसके बाद छ महीने का ट्रांजेक्शन यानी बैंक से लेन देन करो और अपना व्यापार दिखाओ,जिससे दस बीस हजार का उत्पादन हो रहा हो, वह दिखाओ|तब मिलेगा|इतना बड़ा विरोधाभास है सरकार की इस योजना में|और बहुत बड़ा छल है जनता के साथ|फिर भी मोदी सरकार आज भी उसी मद में वित्त रखके लोगों उलझाकर अपना उल्लू सीधा करने पर तुली है|
आज यदि पक्ष और विपक्ष की तरफ से जनता को सबसे अधिक ठगा जा रहा है तो, वह है रोजगार|पक्ष दस रोजगार देकर ऐसा प्रचारित कर रहा है जैसे बेरोजगारी खतम कर दिया|विपक्ष ऐसा प्रचारित कर रहा है जैसे किसी के पास रोजगार है ही नहीं|जबकी बेरोजगारी के लिए दोनो ही जिम्मेदार है|जो विपक्ष आजके आम बजट को रोजगार विरोधी बता रहा है|वही जब शासन में थे तब क्यों नहीं दिए|देना तो छोड़ो उनके ही शासन की गलत नीतियों के चलते तमाम मिलें फैक्टरियाँ बंद हो गई|जिसके चलते बेरोगारी बढ़ती गई और रोजगार घटते गये|जनसंख्या बढ़ती गई|यदि विगत सरकारों ने कुछ ढंग के काम किए होते तो आज के बजट पे रोजगार पर चर्चा करने की जरूरत ही नहीं पड़ती|लगभग सन दो हजार तक दसवीं पास को सिपाही की नौकरी मिल जाती थी|पर विगत की सरकारों ने कुंठा बस इसे बढ़ाकर बारहवीं पास कर दिया|जिसकी वजह से भी बेरोजगारी बढ़ गई है|आज वही विपक्ष में बैठकर बेरोजगारी पर बहस कर रहे हैं|तब का विपक्ष भी आज बेरोजगारी कम करने से बचता फिर रहा है|और बहानेबाजी कर रहा है|रोजगार उपलब्ध कराने के वजाय प्रचार में अधिक लिप्त है|और आम आदमी हताश और त्रस्त है बर्तमान और पूर्व की सरकारों की करतूँतों से|
कुल मिलाकर यह आम बजट भी मध्यम वर्ग विरोधी ही है|इस आम बजट से सबको तो कुछ न कुछ मिला|मगर आम आदमी खासकर मध्यम वर्ग हमेशा की तरह फिर से ठगा ही गया है|विपक्षियों का कहना भी सही है कि यह बजट सरकार बचाने वाला है|सरकार ने वस्तुएं सस्ती करने की वजाय प्रलोभन की व्यस्था अधिक किया है|जो की नहीं होना चाहिए था|सरकार को सब्सिडी भी गरीब मजदूर वर्ग के लिए रखनी चाहिए,वह भी नहीं किया|मुफ्तखोरी से बचना चाहिए,वह भी नहीं किया|मंहगाई पर तो बात ही नहीं की है|जो वस्तुएं वर्ष में एक बार खरीदी जायेंगी,उसको सस्ती करके क्या फायदा|सस्ती तो खाद्य वस्तुएं होनी चाहिए,जो सबके पेट से जुड़ी है|उस पर वित्त मंत्री महोदया ने कुछ काम ही नहीं किया हैं|इस आम बजट से आम आदमी रोये की हंसे|सस्ती एक्सरे मशीन मोबाईल आदि हुए हैं,मगर उनकी सेवा लेने वालों को इसका लाभ नहीं मिलेगा|क्योंकि न तो आम आदमी को मोबाईल का रिचार्ज यानी मोबाईल से बात करना सस्ता होगा|न ऐक्सरे का पैसा कम देना पड़ेगा|इस आम बजट से आम आदमी को पूरी तरह बेवकूफ बनाने का काम सरकार ने किया है|सोना चाँदी का दाम रोज घटता बढ़ता रहता है|उसे सस्ता करके सरकार क्या जतलाना चाहती है|क्या लोग सोना चाँदी खायेंगे|कुल मिलाकर आम बजट से आम आदमी खासकर मध्यम वर्ग इस बार भी ठगा ही गया है|
पं.जमदग्निपुरी