कविता: चंद्रयान 3 | #NayaSaveraNetwork
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चंद्रयान 3
नया द्वार खोलेगा चंद्रयान देखो,
बनेगा भारत की पहचान देखो।
मुट्ठी में मेरे रहेगा अब चंदा,
बढ़ेगा जगत में मेरा सम्मान देखो।
कठिन दौर से मेरे गुजरे वैज्ञानिक,
उनके भी चेहरों पे मुस्कान देखो।
ख्वाहिशें हमारी सदा से हैं जिन्दा,
उनके अंदर का अभिमान देखो।
स्वागत करो रोली,तंदुल, श्रीफल से,
धन्य होनेवालों की वो शान देखो।
तकदीर तो संवरेगी पूरे जहां की,
भारतमाता की आन देखो।
लहरेगा शान से चांद पे तिरंगा,
सोने की चिड़िया का जहान देखो।
कितना बड़ा बोझ उठाए वैज्ञानिक,
उनकी दुनिया का यशगान देखो।
माटी इस देश की गमकती जहां में,
वसुधैवकुटुंबकम् का अनुसंधान देखो।
त्याग, तप हमारी बुनियाद के पत्थर,
अटूट लगन का संधान देखो।
रामकेश एम. यादव, मुंबई
(रॉयल्टी प्राप्त कवि व लेखक)
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