भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव | #NayaSaveraNetwork
नया सवेरा नेटवर्क
कंप्लेंट करने वाले को उल्टा फंसता हूं
शासकीय ठप्पे वाली वस्तुओं की हेराफेरी करता हूं
कंप्लेंट करने वाले को उल्टा फंसता हूं
ऑफिस में गाली गलौज का आरोप लगाता हूं
जांच रिपोर्ट अपने पक्ष में करवाता हूं
शासन द्वारा अलॉटमेंट वस्तुओं पर नज़र रखता हूं
योजनाओं से हड़पकर बाजार में भेजता हूं
मिलीभगत से माल बाहर निकलवाता हूं
कंप्लेंट करने वाले को उल्टा फंसता हूं
अनाज सीमेंट सभी पर नज़र रखता हूं
नीचे से ऊपर तक बात कर लेता हूं
चुपके से बाजार में पहुंचा देता हूं
कंप्लेंट करने वाले को उल्टा फंसता हूं
निजी कंस्ट्रक्शन में ठप्पे वाला सीमेंट देता हूं
पांच किलो योजना को भी नहीं छोड़ता हूं
घपले को अनदेखा करनें छुट्टी पर चला जाता हूं
कंप्लेंट करने वाले को उल्टा फंसता हूं
मिलीभगत चैन को पूरा खुश रखता हूं
हरे गुलाबी की बारिश करता हूं
हर साल फ्लैट प्लॉट की रजिस्ट्री करता हूं
कंप्लेंट करने वाले को उल्टा फंसता हूं
-लेखक - कर विशेषज्ञ स्तंभकार कानूनी लेखक चिंतक कवि एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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