भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव | #NayaSaveraNetwork
नया सवेरा नेटवर्क
मैं बहुत बिजी रहता हूं
मेरे पास पचासों काम रहते है
तुम्हारे समान खाली हूं क्या
मेरे पास टाइम नहीं
मैं बहुत बिजी रहता हूं
सिर्फ चार घंटे मित्रों से बतियाता हूं
सिर्फ दो घंटे धूप में बैठता हूं
सिर्फ दो घंटे नावेल पढ़ता हूं
मैं बहुत बिजी रहता हूं
संस्थाओं का काम अपने मतलब से करता हूं
स्वार्थी मतलबी बिजी आदमी हूं
कोई मुझसे बात करने आया तो छोड़ता नहीं
मैं बहुत बिजी रहता हूं
लोगों की बेकार की बातें ध्यान से सुनता हूं
मोहल्ले कॉलोनी के दो-चार चक्कर काटता हूं
टाइम कैसे कटे सोचता हूं पर दिखावा करता हूं
मैं बहुत बिजी रहता हूं
साथियों को अगर खाली हूं यह बताता हूं
दस काम फोकट में निकालते हैं
बिना फीस या मुनाफा दिए चले जाते हैं इसलिए
मैं बहुत बिजी रहता हूं
हकीकत है काम एक पैसे का नहीं पर फुर्सत
भी एक मिनट की नहीं दिखावा ऐसा करता हूं
बिजी बताने से प्रतिष्ठा बढ़ती है इसलिए
मैं बहुत बिजी रहता हूं
-लेखक - कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार कानूनी लेखक चिंतक कवि एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
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