Jaunpur News: शीतला चौकियां धाम में प्रथम दिन पुरुषोत्तम मास श्री राम कथा का आयोजन
बिपिन सैनी @ नया सवेरा
जौनपुर। शीतला चौकियां धाम में पुरुषोत्तम मास में के प्रथम दिन मास पारायण श्री राम चरित्र महायज्ञ का आयोजन शीतला मातारानी मन्दिर के सामने स्थित गंगागीर बाबा मन्दिर पर बड़े ही विधि विधान से आचार्य डॉ अखिलेश चन्द्र पाठक जी सहयोगी वैदिक वेदपाठी ब्राह्मण आचार्य के साथ हवन कुंड में अग्नि कुण्ड प्रज्ज्वलित कर मास पारायण महायज्ञ पूजन आरंभ किया गया। कथा प्रवचन के दौरान डा अखिलेश चन्द्र पाठक जी ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार हर तीसरे साल सर्वोत्तम अर्थात पुरुषोत्तम मास की उत्पत्ति होती है। इस मास के समय जप, तप, दान से अनंत पुण्यों की प्राप्ति होती है। इस मास में श्रीकृष्ण, श्रीमद्भगवतगीता, श्रीराम कथा वाचन और विष्णु भगवान की उपासना की जाती है। इस माह उपासना करने का अपना अलग ही महत्व है। इस माह में तुलसी अर्चना करने का विशेष महत्व बताया गया है।
पुरुषोत्तम मास में कथा पढने सुनने से भी बहुत लाभ प्राप्त होता है। इस मास में धरती पर शयन एक ही समय भोजन करने से अनंत फल प्राप्त होते हैं। सूर्य की बारह संक्रान्ति के आधार पर ही वर्ष में 12 माह होते हैं। प्रत्येक तीन वर्ष के बाद पुरुषोत्तम माह आता है। पंचांग के अनुसार सारे तिथि-वार, योग-करण, नक्षत्र के अलावा सभी मास के कोई न कोई देवता स्वामी हैं। परन्तु पुरुषोत्तम मास में सभी मङ्गल कार्य, शुभ और पितृ कार्य वर्जित माने जाते हैं।
दान, धर्म, पूजन का महत्व शास्त्रों में बताया गया है कि यह माह व्रत-उपवास, दान-पूजा, यज्ञ-हवन और ध्यान करने से मनुष्य के सारे पाप कर्मों का क्षय होकर उन्हें कई गुना पुण्य फल प्राप्त होता है। इस माह आपके द्वारा दान दिया गया एक रुपया भी आपको सौ गुना फल देता है। इसलिए अधिक मास के महत्व को ध्यान में रखकर इस माह दान-पुण्य देने का बहुत महत्व है। इस माह भागवत कथा, श्रीराम कथा श्रवण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। धार्मिक तीर्थ स्थलों पर स्नान करने से आपको मोक्ष की प्राप्ति और अनंत पुण्यों की प्राप्ति मिलती है। वाराणसी से पधारे डॉ मदन मोहन मिश्रा मानस कोविंद जी ने कथा प्रवचन के दौरान बताया कि बताया कि
दैत्यराज हिरण्यकश्यप ने अमर होने की इच्छा से ब्रह्मा जी की घोर तपस्या की। ब्रह्मा जी के प्रकट होने पर उसने एक ऐसा वरदान मांगा जो उसे लगभग अमर बना दे। हिरण्यकश्यप ने कहा हे विधाता आपकी बनाई किसी भी सृष्टि से मेरी मृत्यु न हो न मनुष्य से, न पशु से, न देव से और न दैत्य से। मेरी मृत्यु न घर के भीतर हो, न बाहर; न दिन में हो न रात में। मैं न अस्त्र से मरूँ न शस्त्र से न पृथ्वी पर, न आकाश में। और सबसे महत्वपूर्ण, वर्ष के आपके बनाए उन 12 महीनों में मेरी मृत्यु न हो।
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ब्रह्मा जी ने 'तथास्तु' कह दिया। वरदान पाकर हिरण्यकश्यप निरंकुश हो गया और भक्तों पर अत्याचार करने लगा। जब पाप का घड़ा भर गया, तब भगवान विष्णु ने अपनी माया से 12 महीनों के बीच एक अतिरिक्त माह (अधिकमास) बनाया, ताकि हिरण्यकश्यप का वरदान भी बना रहे और उसका अंत भी हो सके।
नरसिंह अवतार लेकर भगवान ने खंभे से आधा नर और आधा सिंह (नरसिंह) के रूप में अवतार लेकर गोधूलि बेला (न दिन, न रात) में, देहरी पर बैठकर (न भीतर, न बाहर), अपनी जंघा पर रखकर (न भूमि, न आकाश), अपने नाखूनों से (न अस्त्र, न शस्त्र) उस दैत्य का वध कर दिया। इस मौके पर उपस्थित रामआसरे साहू, मदन साहू, गुड्डू उपाध्याय, प्रवेश त्रिपाठी,सावन त्रिपाठी, मनोज प्रधान, हनुमान त्रिपाठी, सिवासरे गिरी, त्रिभुवन त्रिपाठी, मुकेश श्रीवास्तव,अनील साहू, समेत अनेक कथा धर्म प्रेमीजन मौजूद रहे कथा प्रतिदिन सायं 7 बजे से रात्रि 10 बजे तक रामआसरे साहू मैरेज हाल में चल रही है।
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