Bareilly News: अलीगढ़, आगरा एवं बरेली मण्डल की ‘खरीफ उत्पादकता गोष्ठी‘ में सिंचाई और एमएसपी के मुद्दों पर किसानों ने उठाई आवाज
निर्भय सक्सेना @ नया सवेरा
बरेली। उत्तर प्रदेश के राज्य मंत्री कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान विभाग बलदेव सिंह औलख व पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह की उपस्थिति में अलीगढ़, आगरा एवं बरेली मण्डल की ‘मण्डलीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी-2026‘ हुई इस गोष्ठी‘ में पशुओं से होने वाले नुकसान, सिंचाई और एमएसपी के मुद्दों पर किसानों ने अपनी आवाज उठाई। आई वी आर आई संस्थान के विवेकानंद सभागार में हुई बैठक में समस्त मंडल के संबंधित अधिकारियो द्वारा अपने -अपने क्षेत्र की समस्याओ से मंत्रीगण और उच्च स्तरीय अधिकारियो को अवगत कराया गया। जनपद पीलीभीत द्वारा पशुओं से फसलों की सुरक्षा के लिए सोलर आधारित फेंसिंग की आवश्यकता बताई गयी साथ ही धारा-24 के अंतर्गत किसानों की भूमि संबंधी शिकायतों तथा बंदरों से फसलों को होने वाले नुकसान से निजात दिलाने की मांग की गई। शाहजहांपुर के किसानों ने कृषि यंत्रों के लक्ष्य बढ़ाने, छुट्टा पशुओं की समस्या के समाधान तथा खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
बदायूं से बताया गया कि मक्के के उत्पादन क्षेत्र में केवल एक ड्रायर उपलब्ध है जबकि अतिरिक्त ड्रायरों की आवश्यकता है। आलू उत्पादन अच्छा होने के कारण आलू आधारित कंपनियों की स्थापना बदायूं क्षेत्र में कराए जाने का भी सुझाव दिया गया। किसान विज्ञान केंद्र की लंबित किस्तों के कारण कार्य अधूरे होने की बात कही गई। साथ ही सोलर फेंसिंग पर अनुदान योजना लागू करने तथा पशु अभ्यारन केंद्र खोले जाने का सुझाव दिया गया। किसानों ने यह भी कहा कि एमएसपी पर किसानों की फसल खरीदी जाए न कि व्यापारियों की।
जनपद बरेली से अधिकारियों ने बताया कि गौवंश संरक्षण के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत कार्य किए जा रहे हैं तथा सहभागिता योजना के अंतर्गत किसानों को गौवंश उपलब्ध कराए जा रहे हैं, इसके बावजूद बड़े गौआश्रय स्थलों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। किसानों ने कहा कि क्लस्टर गठन योजना का लाभ छोटे किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा है क्योंकि उनकी जोत कम है। उन्होंने इस योजना में जोत सीमा कम करने की मांग रखी।
बैठक में परियोजना निदेशक डीआरडीए मथुरा ने बताया कि क्षेत्र में जलभराव की समस्या लगातार बढ़ रही है। अरावली की पहाड़ियों से मिट्टी कटाव के कारण जलभराव होता है, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचता है। वहीं अलीगढ़ के मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि मक्का की कुछ प्रजातियां अभी तक नोटिफाई नहीं हैं, उन्हें शीघ्र नोटिफाई कराया जाए साथ ही बाजरा खरीद का लक्ष्य बढ़ाने की मांग भी की गई क्योंकि अलीगढ़ में इसका उत्पादन अधिक है।
इस मंडलीय बैठक में छुट्टा नंदियों को पकड़ने के लिए ट्रैंकुलाइजर की अनुमति देने का विषय भी उठा। इस पर अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इसकी अनुमति उपलब्ध है तथा वन विभाग द्वारा पशु चिकित्साधिकारियों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
जनपद आगरा ने बताया कि वहां मिलेट्स का उत्पादन अधिक होने के बावजूद कोई प्रशिक्षण केंद्र उपलब्ध नहीं है। उन्होंने खारे पानी की समस्या का भी उल्लेख किया। मशरूम उत्पादन और पॉलीहाउस के लिए विद्युत कनेक्शन को कृषि श्रेणी में शामिल किए जाने की मांग रखी गई ताकि किसानों को राहत मिल सके। आगरा क्षेत्र से डेयरी संचालन के लिए बैंकों द्वारा ऋण न दिए जाने की समस्या भी बताई गई। साथ ही यमुना नदी पर बैराज निर्माण का सुझाव रखा गया।
बैठक में किसानों ने भविष्य में गोष्ठियां मण्डलवार आयोजित किये जाने की बात रखी । अलीगढ़ से ग्राम स्तर पर गौशालाएं स्थापित किए जाने का सुझाव भी आया।
हाथरस जनपद ने बताया कि वहां 52 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में आलू उत्पादन हुआ है, लेकिन किसानों को उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने जिला कॉपरेटिव बैंक की स्थापना तथा बाजरे का लक्ष्य बढ़ाए जाने की मांग रखी। कासगंज से मोहनपुर मटर मंडी को मुख्य मंडी से जोड़ने का अनुरोध किया गया ताकि किसानों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। वहां उपनिदेशक कार्यालय की स्थापना पर आभार व्यक्त करते हुए हाईटेक नर्सरी बनाने की भी अपील की गई, जिस पर अवगत कराया गया कि हाईटेक नर्सरी स्वीकृत कर दी गयी है।
फिरोजाबाद के किसानों ने कहा कि किसानों की जोत लगातार छोटी हो रही है, इसलिए छोटे ट्रैक्टरों पर भी सब्सिडी दी जानी चाहिए। वर्मी कम्पोस्ट खाद पर पुनः सब्सिडी शुरू किए जाने की मांग भी की गई। बरेली क्षेत्र के किसानों ने बताया कि जब नवंबर में गेहूं बुवाई के लिए पानी की आवश्यकता होती है तब नहरों की सफाई का कार्य चलता रहता है और पानी दिसंबर में उपलब्ध कराया जाता है, जिससे किसानों को कठिनाई होती है।
बैठक में कृषि निदेशक ने किसानों को डेंचा और सनई जैसी हरित खाद फसलों के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसान खेतों की मेड़ों पर डेंचा उगाएं ताकि अगले वर्ष के लिए बीज उपलब्ध हो सके। उन्होंने बताया कि डेंचा बीज को 10 हजार रुपये प्रति कुंतल की दर से खरीदा जाएगा।
बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि उर्वरकों की बिक्री में किसी प्रकार की टैगिंग नहीं होनी चाहिए। यदि ऐसी शिकायत मिलती है तो संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। कृषि अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि उर्वरकों पर मूल्य स्पष्ट रूप से अंकित हो तथा बीजों की उपलब्धता और दरों की जानकारी प्रेस विज्ञप्तियों और प्रचार- प्रसार के माध्यम से किसानों तक पहुंचाई जाए।
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इस बैठक में यह भी बताया गया कि पहले किसान दिवस का बजट केवल 10 महीनों के लिए होता था, लेकिन अब 12 महीनों के लिए बजट की व्यवस्था कर दी गई है।
कृषि मंत्री औलख ने अपने संबोधन में कहा कि किसानों द्वारा उठाई गई समस्याओं और सुझावों पर गंभीरता से विचार कर कमियों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सिंचाई से जुड़े मुद्दों पर संबंधित विभाग से बात कर किसानों को समय पर पानी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने किसानों से सहफसली खेती अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि सरकार इसके लिए बीज उपलब्ध कराने का कार्य कर रही है।
प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि किसानों द्वारा उठाई गई सभी समस्याओं को गंभीरता से सुना गया है और कहा कि उनके समाधान की दिशा में कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि खाद की उपलब्धता बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर उर्वरक उत्पादन इकाइयों के साथ बैठक की गई है तथा उन्हें निर्देश दिये गए है कि 18 मण्डलों में गोबर से खाद बनाने वाले कारखाने स्थापित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने में कृषि और पशुपालन दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। साथ ही उन्होंने “हर घर जल” योजना के अंतर्गत उपलब्ध कराए जा रहे पेयजल के दुरुपयोग से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि योगी सरकार गांवों में भी शहरों जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। बड़े गौसदन निर्माण और गौवंश सुधार की दिशा में भी सरकार कार्य करेगी। उन्होंने जानकारी दी कि छह गौवंश पालने पर 6 हजार रुपये भरण- पोषण सहायता और पशुशेड उपलब्ध कराया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री द्वारा किसानों को उड़द एवं मक्का के बीज किट वितरित किए गए। दो किसानों को ट्रैक्टर की प्रतीकात्मक चाबी और 24 लाख रुपये के अनुदान का चेक भी प्रदान किया गया। गेहूं की फसल का नुकसान होने पर क्षतिपूर्ति के रूप में 51 हजार रुपये का चेक भी वितरित किया गया।
बैठक में पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह, प्रमुख सचिव कृषि, निदेशक कृषि विभाग, कृषि उत्पादन आयुक्त, आयुक्त बरेली मण्डल भूपेन्द्र एस चौधरी सहित अलीगढ, आगरा एवं बरेली मण्डल के मण्डल एवं जिला स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित रहे।
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