Poetry: छोड़ देने से खुदा भी छूट जाता है
नया सवेरा नेटवर्क
छोड़ देने से खुदा भी छूट जाता है
आदमी तो आदमी, रिश्ता भी टूट जाता है
इसलिए समय समय पे हाथ मिलाते रहिए
थोड़ा दबाते रहिए और थोड़ा हिलाते रहिए
हिला देने से कोये के पत्ते झड़ जाते हैं
रुमानियत में दिल के भीतर गड़ जाते हैं
समय तो आता है, जाता है, नहीं रुकता है
तुम्ही कहो, आदमी कहीं इतना रूठ जाता है?
कोये=( आंख), पत्ते=आंसू
रचनाकार: मुरलीधर मिश्र
वाराणसी/देवरिया।
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