Jaunpur News: आम, एवं शाकभाजी की फसल को कीट एवं व्याधि से बचाएं
नया सवेरा नेटवर्क
जौनपुर। जिला उद्यान अधिकारी डॉ. सीमा सिंह राणा द्वारा जनपद के किसान भाइयों और बागवानों को अवगत कराया है कि बदलते मौसम और वातावरण में बढ़ती आर्द्रता (50-60 प्रतिशत) के कारण आम, और सब्जियों में कीट व रोगों का प्रकोप बढ़ सकता है -उन्होंने वैज्ञानिक ढंग से फसल प्रबंधन हेतु निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए हैं- आम का प्रबंधनकीट नियंत्रणरू आम में भुनगा (लीफ हॉपर), थ्रिप्स और मिलीबग (गुजिया) के नियंत्रण हेतु प्रति हेक्टेयर 40-50 नीला या पीला चिपचिपा जाल (स्टीकी ट्रैप) पेड़ों पर 6-8 फीट की ऊंचाई पर लगाएं। शाकभाजी की सुरक्षा गंभीर प्रकोप की स्थिति में इमिडाक्लोरोप्रिड (17.8 प्रतिशत) या फिप्रोनिल (5 प्रतिशत एससी) की 0.5 मिली मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। फल सुरक्षारू टिकोलों को गिरने से बचाने के लिए प्लानोफिक्स (NAA) दवा का 1 मिली प्रति 3-4 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। शाकभाजी की सुरक्षा टमाटर की फसल में अगेती झुलसा व पछेती झुलसा रोग दिखने पर श्साफश् (कार्बेडाजिम 12 प्रतिशत और मैनकोजेब 63 प्रतिशत W.P.) या मेटालैक्सिल़+मैकोजेब का 1 ग्राम प्रति लीटर की दर से छिड़काव करें।
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कद्दूवर्गीय फसलें, लौकी, तोरई और खीरा आदि में फफूंदजनित रोगों से बचाव हेतु थायोफिनेट मिथाइल या फफूदनाशक ‘‘साफ‘‘ नामक दवा का 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव कराये। अमरूद छाल खाने वाली इल्ली दिखने पर सुराख को पेट्रोल या क्लोरोपाइरीफॉस से भीगी रूई से बंद कर गीली मिट्टी लगा दें। महत्वपूर्ण सावधानियां डॉ. राणा ने विशेष जोर देते हुए कहा कि कीटनाशक का छिड़काव करते समय किसान भाई मास्क, दस्ताने और चश्मे का प्रयोग अवश्य करें, छिड़काव हमेशा शाम के समय हवा की दिशा में खड़े होकर करें और खाली डिब्बों को मिट्टी में दबा दें।उद्यान विभाग का लक्ष्य है कि इन सामयिक तकनीकी सलाहों को अपनाकर किसान भाई अपनी फसल की गुणवत्ता और पैदावार सुनिश्चित कर सकें।
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