Varanasi News: भगत सिंह एक बहादुर योद्धा होने के साथ ही विचारक और चिन्तक भी थे: ध्रुव
नया सवेरा नेटवर्क
बनारस। दिशा छात्र संगठन की ओर से शहीद-ए-आज़म भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस के अवसर पर चलाये जा रहे ‘शहीद स्मृति अभियान’ के तहत बीएचयू के वीटी पर सभा एवं सांस्कृतिक सन्ध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत क्रान्तिकारी गीत ' कारवां चलता रहेगा' से की गयी। सभा में उपस्थित छात्रों ने भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव के चित्रों पर माल्यार्पण कर उनको श्रद्धांजलि अर्पित की। सभा का संचालन करते हुए दिशा के ध्रुव ने कहा कि भगतसिंह एक बहादुर योद्धा होने के साथ ही विचारक और चिन्तक भी थे। अंग्रेजो के खिलाफ संघर्ष करते हुए उन्होंने स्पष्ट घोषणा की थी कि वह केवल गोरे साहबों की जगह भूरे साहबों को सत्ता में नहीं लाना चाहते बल्कि एक ऐसा समाज बनाना चाहते हैं जहां एक इंसान द्वारा दूसरे इंसान का शोषण असम्भव बना दिया जाये।
दिशा के ज्ञानप्रकाश ने कहा कि आज देश की आज़ादी के 78 साल बाद भी भगतसिंह और उनके साथियों के सपनों का समाज नहीं बन सका है। भगतसिंह और उनके साथियों का कहना था कि जब तक मुट्ठी भर लोग आम जनता के हक़ों-अधिकारों पर कब्ज़ा जमाये बैठे हुए हैं, तब तक उनकी लड़ाई ज़ारी रहेगी। आज स्थिति यह है कि देश में एक तरफ़ आम मेहनतकश जनता की ज़िन्दगी में समस्याएं रोज़ बढ़ रही हैं। छात्रों-नौजवानों की बड़ी आबादी आज बेरोज़गारी की वज़ह से हताशा-निराशा का शिकार है और आत्महत्या करने तक के क़दम उठा रही है। पढ़े-लिखे युवाओं में भी बेरोज़गारी की दर लगातार बढ़ती जा रही है। हाल ही में आई अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट ने बताया कि देश के युवा बेरोजगारों में 67% संख्या स्नातकों की है।
इन तमाम समस्याओं को जाति-धर्म, मन्दिर-मस्ज़िद आदि की आड़ में छिपाने का काम किया जा रहा है। जबकि भगतसिंह के संगठन एचएसआरए के क्रांतिकारियों ने इस तरह की राजनीति का बहुत विरोध किया था। भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे शहीदों का सपना ऐसे समाज को बनाने का नहीं था, जिसमें ऊपर बैठे हुए मुट्ठी भर लोगों की सुविधाओं में कोई कमी न आये और सारा बोझ आम मेहनतकश जनता पर डाल दिया जाय। ऐसे में यह वक़्त भगतसिंह और उनके साथियों के विचारों से रोशनी लेकर नए समाज को बनाने की लड़ाई में उतर पड़ने का है।कार्यक्रम के दौरान 'मेरा रंग दे बसन्ती चोला', ' आ रे नौजवान', ' साथियों आगे बढ़ो', 'ज़िन्दगी ने एक दिन कहा' आदि गीत गाये गये। कार्यक्रम में संदीप, बीरू, विश्वजीत, तारल्य, दिनेश, अमित, मुकुल आदि छात्र शामिल रहे।




