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Jaunpur News: तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ शुभारंभ

नया सवेरा नेटवर्क

जौनपुर। तिलकधारी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जौनपुर के ऐतिहासिक बलरामपुर हाल में  तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी का विषय “अणु से पारिस्थितिकी तंत्र तक: स्थायी संसाधन प्रबंधन के माध्यम से वैश्विक सुरक्षा” रखा गया है। 

कॉन्फ्रेंस के मुख्य अतिथि महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय आजमगढ़ के कुलपति प्रो. संजीव सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि यदि प्रकृति का तापमान अनियंत्रित रूप से बढ़ता है तो यह मानवता के लिए विनाशकारी सिद्ध हो सकता है। भारतीय संस्कृति में सदैव विश्व कल्याण की भावना निहित रही है, इसलिए हमें केवल अपने तक सीमित न रहकर समग्र विश्व के हित के बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह नहीं सोचना चाहिए कि यदि कहीं और संकट उत्पन्न हो रहा है तो उसका प्रभाव हम पर नहीं पड़ेगा, क्योंकि आज की दुनिया परस्पर जुड़ी हुई है।

उन्होंने कहा कि संसाधनों का उपयोग अत्यंत सोच-समझकर करना होगा, क्योंकि पृथ्वी पर उपलब्ध सभी संसाधन सीमित हैं। हमें यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन असीमित मात्रा में उपलब्ध हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कभी पंजाब और हरियाणा की धरती को अत्यंत उर्वर माना जाता था और उसे “सोना उगलने वाली भूमि” कहा जाता था, किंतु  उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग के कारण कई स्थानों पर भूमि की उर्वरता प्रभावित हो रही है। अधिक उत्पादन की होड़ में संतुलन बिगड़ने लगा है, इसलिए संसाधनों के दोहन में सावधानी और संतुलन आवश्यक है।


उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पीने योग्य पानी की कीमत अत्यधिक बढ़ सकती है। लगभग 30–35 वर्ष पहले बोतलबंद पानी को एक विशेष स्टेटस के रूप में देखा जाता था, किंतु आज लगभग हर व्यक्ति बोतलबंद पानी पी रहा है और सीधे नल का पानी पीने से लोग बचने लगे हैं। यह स्थिति भविष्य में संभावित जल संकट की ओर संकेत करती है।

 संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर के परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या, खाद्य संकट, ऊर्जा संकट और पर्यावरण संकट आने वाले समय की बड़ी चुनौतियाँ हैं। इनसे निपटने के लिए हमें अभी से संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की आदत डालनी होगी। उन्होंने डिजिटल युग की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें वर्चुअल फ्रॉड जैसी समस्याओं के प्रति भी जागरूक रहना चाहिए।

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अपने संबोधन के अंत में उन्होंने सभी को पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दिलाते हुए कहा कि हम सबको “वर्षा मित्र” और “वृक्ष मित्र” बनने का प्रयास करना चाहिए। जल और बिजली की बचत करें, एसी का तापमान 24 डिग्री या उससे अधिक रखें, अधिक से अधिक पेड़ लगाएँ और उनका संरक्षण करें। प्रकृति का संरक्षण करते हुए ही हम सुरक्षित और समृद्ध विश्व के निर्माण में योगदान दे सकते हैं। विशिष्ट अतिथि फिशरीज लब लखनऊ के प्रमुख वैज्ञानिक प्रो.ललित कुमार त्यागी ने मॉलिक्यूल, इकोसिस्टम सस्टेनेबल रिसोर्स मैनेजमेंट ग्लोबल सिक्योरिटी और कंजर्वेशन पर विचार व्यक्त किया। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि जो लोग हमारी लाइफ से काम करना चाहते हैं उनके लिए वहां डिसर्टेशन की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने मत्स्य संबंधी विविध पहलुओं पर प्रकाश डाला।  प्रथम तकनीकी सत्र में सी एस एस एस के प्रोफेसर विजय कुमार उमराव ने ज्योग्राफिकल इंडिकेशन पर प्लांटेशन एंड क्रॉप पर अपने विचार रखें। द्वितीय तकनीकी सत्र में एडीजी आईसीएआर नई दिल्ली के डॉ. विश्व बंधु पटेल ने हॉर्टिकल्चर साइंस एंड इनोवेशन पर अपने विचार रखें।  इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके साथ ही प्रातः स्मरणीय ठाकुर तिलकधारी सिंह जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया गया।

इस अवसर पर कार्यक्रम में विज्ञान संकाय, मानविकी संकाय, कृषि संकाय तथा भौतिक विज्ञान विभाग के समन्वयक क्रमशः डॉ. प्रेम चंद, प्रो. रमेश सिंह, प्रो. ए. के. शुक्ला तथा प्रो. विजय कुमार सिंह प्रो.राहुल सिंह प्रो अजय कुमार दुबे प्रो राजदेव दुबे प्रो सुधांशु सिन्हा आदि उपस्थित रहे। संगोष्ठी के सह-संयोजक के रूप में प्रो. नीतू सिंह, डॉ. डी. बी. मिश्रा, प्रो. मनोज कुमार सिंह, डॉ. मिथिलेश कुमार, डॉ. के. बी. यादव, प्रो. माया सिंह एवं प्रो. पंकज कुमार गौतम ने सक्रिय भूमिका निभाई। वहीं आयोजन सचिव के रूप में डॉ. अजय कुमार, डॉ. शुभम सिंह, डॉ. ज्ञानेश्वर शर्मा, डॉ. शैलेन्द्र कुमार सिंह, डॉ. विशाल सिंह एवं डॉ. बलवंत सिंह ने कार्यक्रम के सफल संचालन में अपने दायित्वों का निर्वहन किया। कार्यक्रम में प्रो. नलिन कुमार मिश्र, प्रो. हरिओम त्रिपाठी, प्रो. ज्ञानेन्द्र धर दुबे, डॉ. देवव्रत मिश्रा, डॉ. शैलेन्द्र सिंह ‘वत्स’ सहित महाविद्यालय के अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। तीन दिनों तक चलने वाली इस अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश-विदेश के विद्वान अपने शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे तथा पर्यावरण संरक्षण और सतत संसाधन प्रबंधन के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श करेंगे। कार्यक्रम का संचालन प्राण विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ आशा रानी ने किया।

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