Article: क्या हम पाकिस्तान में हैं या बांग्लादेश में
नया सवेरा नेटवर्क
मुम्बई से सटे नालासोपारा पालघर में कल ऐसी घटना घटी जिससे यह मन में भाव बना कि क्या हम सनातनी पाकिस्तान में हैं या बंग्लादेश में हैं।जहाॅं हमें अपना ही पर्व मनाने के लिए परमीशन लेना पड़ेगा।कल नालासोपारा ईस्ट में भगवान श्रीराम जी के प्रकटोत्सव के पावन पर्व पर एक शोभायात्रा निकली थी।जिस रास्ते से शोभा यात्रा जानी थी उस रास्ते पर मुसलमानों की घनी आबादी थी। पुलिस वालों ने उस रास्ते पर जाने से मना कर दिया और बैरीकेडिंग कर दिया।जिससे राम भक्त सनातनी नाराज हो गये।और बैरीकेडिंग तोड़कर आगे गये।जिस कारण बैरीकेडिंग की गई थी। हालांकि वहाॅं ऐसा कुछ हुआ नहीं, जिसके चलते प्रशासन द्वारा शोभायात्रा रोंकी गई।और बवाल कराया गया।जबकी उस रास्ते पर रहने वाले रहिवासी जिसमें बहुतायत मुसलमान थे,जमकर प्रभु श्रीराम जी का दर्शन लाभ लिया और स्वागत भी किये।
जिस तरह सुचारू रूप से शोभा यात्रा मुसलमानों की बस्ती से सकुशल होकर सम्पन्न हुई,वह कथित हिन्दू वादी सरकार की कुत्सित मानसिकता पर आघात करती है।और यह सोचने के लिए विवश करती है कि क्या सरकारें नहीं चाहती कि लोग एक इकाई बनकर रहें।भारत अपने पुराने वसुधैव कुटुम्बकम की नीति पर शांतिपूर्वक आगे बढ़े। क्योंकि जिस तरह से कल शोभायात्रा रोंकी गई वह इसी तरफ इशारा कर रही है।किसी भी संगठन ने शोभायात्रा का विरोध घोषित नहीं किया था।यदि सरकार को लगता था कि उस रास्ते पर शोभायात्रा जाने से उत्पात हो सकता है तो उचित सुरक्षा व्यवस्था करती।जो व्यवस्था रोकनें में की,वही व्यवस्था सुरक्षा देने में करनी चाहिए थी।मगर सरकार ने ऐसा न करके यह दर्शाया है कि जनता को हम शांति से जीने नहीं देंगे।
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पहले कांग्रेस थी तो वर्तमान सरकार उनको मुसलमान का हितैषी बता बताकर सत्ता हथिया ली। हिन्दुओं के मन में मुसलमान के प्रति घृणा और मुसलमान के मन में हिन्दू के प्रति घृणा भरके ए सभी राजनीतिक पार्टियां अपना उल्लू सीधा कर रही हैं।कल की घटना चीख चीखकर यही कह रही है। सत्ता लोभियों ने देश के भाईचारे को छिन्न-भिन्न करके रख दिया है।कल की शोभायात्रा का किसी ने कोई विरोध नहीं किया था।किया किसने हिन्दूवाद की दुहाई देने वाली सरकार ने।रोंका किसने सनातन रक्षक सरकार ने। क्यों रोंका,पता नहीं।किसी ने कोई आपत्ति भी नहीं दर्ज कराई थी।चलो मान लिया कि सरकार को इनपुट मिला होगा।तो सरकार चुप क्यों रही।सवाल उठता है कि नहीं।यदि इनपुट मिला था कि उस रास्ते पर बवाल हो सकता है तो बवालियों पर कार्रवाई करने की बजाय शोभायात्रा रोकना सरकार क्यों उचित समझी।मतलब साफ है। सरकार मुद्दा बनाये रखना चाहती है।यह बताने का प्रयास कर रही है कि मुसलमान देश के लिए और हिन्दुओं के लिए बहुत ख़तरनाक हैं।अपनी कमियों को छुपाने के लिए इस तरह के स्टंट रच रही है।जब देखा कि मुसलमान तो कुछ बोल ही नहीं रहा तो,खुद कूद पडी यह कहते हुए कि उस रास्ते पर मत जाओ बवाल हो सकता है।जब सरकार को पता है कि उस रास्ते पर बवाली हैं तो,उनको पकड़कर अंदर करने की बजाय शोभायात्रा रोकना बहुत बड़ा षड़यंत्र की तरफ इशारा कर रही है।
कहीं ऐसा तो नहीं एक गलती को छुपाने के लिए दूसरी जानबूझकर की जा रही है।जिससे जनता का मूड उसे छोड़कर इस पर आ जाय।आपलोग समझ गये होंगे कि हम क्या कहना चाहते हैं। नहीं समझे तो लो बतायें देता हूॅं।इस समय सरकार अपने ही समर्थकों द्वारा भारत के अधिकांश भागों में युजीसी को लेकर विरोध झेल रही है।युजीसी भी किसी ने मांगा नहीं था। फिर यह सरकार सनातनियों में भेद उत्पन्न करने के लिए जबरी ले आई।जिसका सवर्ण समाज जो इस सराकार को सिंहासन पर बैठाया है। विरोध कर रहा है। विरोध करना उचित भी है। क्योंकि सरकार उनको उनके ही देश में हाशिए पर डालती जा रही है।उसी मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए अब हिन्दू मुसलमान करने में लग गई है,ऐसा प्रतीत हो रहा है। क्योंकि अंदर अंदर मुसलमान भी युजीसी के विरोध में है। मुसलमान भी सोचने पर विवश हैं कि युजीसी लागू होने पर सबसे बड़ा खतरा हमीं को झेलना पड़ेगा। इसलिए मुसलमान मौन था। सरकार ने देखा अरे शांति बहुत है।शोले वाला वह डायलाग याद आ गया।अरे भाई इतनी शांति क्यों है। सरकारें यदि विशेषतः कुछ नहीं चाहती तो वह है शांति।जिसका जीता जागता कल का कांड है।जो सरकार द्वारा ही निर्मित किया गया।उसके विश्वसनीय विडियो जो सोशल मिडिया पर कल दिखे। उसमें पुलिस वालों का बाडी लैंग्वेज देखने से ऐसा लगता था।जैसे हम यह शोभायात्रा पाकिस्तान में निकाले हों और वहाॅं की पुलिस अपनी पूरी ताकत से रोकने का प्रयास कर रही है।कुल मिलाकर कल की घटना हम सनातनियों को बहुत क्षुब्ध कर गई।और यह सोचने पर विवश कर रही है कि हम हिन्दुस्थान में हैं या बंग्लादेश पाकिस्तान में।
पं.जमदग्निपुरी
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