Jaunpur News: चौकियां धाम में बासंतिक नवरात्र के प्रथम दिन श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब
जयकारों से वातावरण हुआ भक्तिमय, घण्टे घड़ियालों की रही गूंज
प्रथम दिन सैलपुत्री स्वरूप में भक्तों ने मातारानी का किया दर्शन-पूजन
बिपिन सैनी @ नया सवेरा
जौनपुर। स्थानीय क्षेत्र के मां शीतला चौकियां धाम में वासंतिक नवरात्रि का पहले दिन घट स्थापना के बाद मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा अर्चना की गई। सैल का अर्थ है हिमालय और पर्वतराज। हिमालय के यहां जन्म लेने के कारण शैल पार्वती को शैलपुत्री भी कहा जाता है। पार्वती के रूप में इनको भगवान शंकर की पत्नी के रूप में भी जाना जाता है। वृषभ(बैल) इनका वाहन है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक विधि-विधान के साथ मां दुर्गा के नवस्वरूपों में प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा उपासना की जाती है इससे सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और कष्टों से मुक्ति मिलती है। इनकी आरधना करने से मनोवांछित फल को प्राप्ति होती है।
बताया गया कि चौकियां धाम में प्रातःकाल 4 बजे मन्दिर के कपाट खुलने के पश्चात माला रानी का भाव्य श्रृंगार करके मन्दिर महंत विवेकानंद ने आरती-पूजन किया। मन्दिर खुलने के पूर्व ब्रम्ह मुहुर्त से ही मातारानी के दर्शन के लिये भक्तों की लम्बी कतार लगी रही। दुर्गा सप्तशती पाठ, वैदिक मंत्रोच्चारण, हवन पुजन माता रानी के जयकारों एवं घण्टों की गूंज से सारा वातावरण मनमोहक भक्तिमय हो गया। कतार में खड़े दर्शनार्थी बारी-बारी से दर्शन-पूजन करते हुये नजर आये। वहीं पूर्वांचल के कोने-कोने से आये अद्धालु मुंडन संस्कार, कढ़ाही, पूजन आदि करके परिवार समेत मां के चरणों में मत्था टेकते हुये सुख, शान्ति, समृद्धि, धन, यश, वैभव की कामना किये।
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नवरात्रि का प्रथम दिन होने से व्रती महिलाओं ने अपने घर मे विधि विधान से शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित करके दुर्गा सप्तशती पाठ करके आरती पूजन किया। दूर-दराज से धाम में आने वाले भक्तों का तांता देर शाम तक लगा रहा। वहीं दर्शन-पूजन करने के पश्चात दर्शन पवित्र कुण्ड के बगल में स्थित काल भैरवनाथ एवं मां काली मंदिर में दर्शन-पूजन किये। सुरक्षा की दृष्टि से मन्दिर परिसर में चौकियां चौकी इंचार्ज रामप्रकाश यादव अपने सहयोगी पुलिसकर्मी एवं पीएसी बल के साथ मौजूद रहे।
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