आम करदाताओं के लिए राहत अपेक्षाकृत कम
नया सवेरा नेटवर्क
हैदराबाद। प्रख्यात चार्टर्ड अकाउंटेंट डॉ. सी.ए. मधुसूदन अग्रवाल ने केंद्रीय बजट 2026–27 को 'एकखट्टा–मीठा' बताते हुए कहा कि इसमें सकारात्मक पहलें तो हैं, लेकिन आम करदाताओं के लिए राहत अपेक्षाकृत कम है। उनके अनुसार यह बजट मुख्य रूप से विदेशी कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया प्रतीत होता है। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव और अमेरिका के साथ लंबित टैरिफ समझौते को ध्यान में रखते हुए बजट तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि विदेशी कंपनियों को भारत में डेटा सेंटर स्थापित करने और विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के लिए कई तरह की रियायतें दी गई हैं। इसका स्पष्ट उद्देश्य भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की कमी को दूर करना है। उन्होंने कहा कि बजट में आम नागरिकों के लिए अवसर सृजित करने का प्रयास किया गया है, जिनके परिणाम आगामी वर्षों में सामने आएंगे। न्यू इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के तहत आयकर प्रक्रियाओं में किए गए बदलावों का उन्होंने स्वागत किया। न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) की दरों में संशोधन किया गया है और टीडीएस से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है। अब कम या शून्य टीडीएस कटौती प्रमाणपत्र के लिए करदाताओं को आयकर अधिकारी के पास जाने की आवश्यकता नहीं होगी। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि कुछ वस्तुओं पर सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) कम की गई है, जिससे आयात को बढ़ावा मिलेगा और उपभोक्ताओं को वस्तुएं उचित कीमत पर मिल सकेंगी। हालांकि उन्होंने कहा कि सोने और चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद इन पर ड्यूटी, जीएसटी या अन्य करों में कोई राहत नहीं दी गई, जिससे बाजार निराश हुआ है। उन्होंने शेयर बाजार को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि न केवल किसी तरह की रियायत दी गई, बल्कि एसटीटी कर में बढ़ोतरी कर दी गई, जिससे बाजार में गिरावट देखी गई। पहले ही विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से दूरी बना रहे हैं, ऐसे में कैपिटल गेन टैक्स और एसटीटी में राहत न देना निराशाजनक है। डॉ. अग्रवाल के अनुसार बजट में प्रत्यक्ष कर संरचना में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। केवल टीडीएस और टीसीएस की दरों में कुछ संशोधन किए गए हैं। मार्च में किए गए बदलावों के तहत शिक्षा और मेडिकल टूरिज्म के लिए टीसीएस में कमी की गई है। एनआरआई के लिए राहत देते हुए संपत्ति खरीद पर अब टैन नंबर की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है और वे केवल पैन नंबर के आधार पर टीडीएस जमा कर सकेंगे।
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उन्होंने कहा कि हाउसिंग लोन को लेकर आयकर में कोई नई राहत नहीं दी गई है। हालांकि संशोधित आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि दिसंबर से बढ़ाकर मार्च कर दी गई है। सामान्य करदाताओं के लिए कोई नई छूट नहीं दी गई है, लेकिन आयकर आकलन प्रक्रियाओं में बदलाव किए गए हैं, जिनसे करदाताओं को लाभ मिलने की उम्मीद है। इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा में भी बदलाव किया गया है। फॉर्म-1 और फॉर्म-3 के लिए अंतिम तिथि 31 जुलाई रखी गई है, जबकि बिना ऑडिट वाले मामलों के लिए 31 अगस्त, ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की तिथि 30 सितंबर और रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर तय की गई है। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि जीएसटी से जुड़े फैसले जीएसटी काउंसिल की बैठकों में होते हैं, इसलिए बजट में इस पर कोई बड़ा ऐलान नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि एमएसएमई सेक्टर को समर्थन दिया गया है, कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग के लिए नई योजना लाई गई है और सीजीएमसीजीटीएमसी योजना के तहत बिल डिस्काउंटिंग के लिए प्रावधान किए गए हैं। इसके अलावा रेलवे के लिए सात नए हाई-स्पीड कॉरिडोर, तीन नए आयुर्वेदिक संस्थान, जिला स्तर पर गर्ल्स हॉस्टल, तकनीक को बढ़ावा देने जैसे प्रस्तावों का भी उन्होंने उल्लेख किया। अंत में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर करदाताओं को प्रत्यक्ष लाभ देने के लिए मेडिकल और रिटायरमेंट बेनिफिट से जुड़ी ठोस योजनाएं लाने की आवश्यकता है।
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