Poerty: अन्तिम चरण.....!
नया सवेरा नेटवर्क
अन्तिम चरण.....!
आजकल.....!
नर्सरी और कॉन्वेंट स्कूलों में
पेरेंट्स टीचर मीटिंग का....!
लघु रूप में कहे तो....पी.टी.एम. का
अनिवार्य रूप से चलन है....
पैरेंट्स को भी....बिना तर्क के...
यह मीटिंग बहुत ही पसन्द है...
इसके उलट प्यारे....!
देख-देख कर इस मीटिंग को....!
मुझ जैसों को भरपूर होती जलन है..
क्योंकि...हमारे समय में तो पिताजी
केवल एडमिशन भर कराते थे...
और..मानो या न मानो...इसका भी
घर वालों पर....और माता जी पर...
भरपूर अहसान जताते थे....
आगे....जिस भी किसी दिन....!
कहीं राह चलते....या फिर....
किसी आयोजन में क्लास टीचर से..
पिताजी की....कुछ देर अकेले में....
मुलाकात हो जाती...
सच बताऊँ यारों....
पी.टी.एम का कोरम.....!
बस उसी दिन पूरा हो जाता....
कैसे कहूँ मित्रों...उन दिनों....
हममें तो होती ही नहीं थी....!
कोई भी....कैसी भी अच्छाई....
लिहाज़ा....उसी रात में ही ...!
ठीक-ठाक होती थी हमारी धुनाई....
बस कलेजा एक माँ का होता....!
जो चुप करा ही लेती थी,
हमारी सिसकी और रुलाई.....
पर....एक बात गौरतलब है प्यारे...
उन दिनों की पी.टी.एम.....!
नहीं होती थी रिजल्ट ओरिएंटेड...
टीचर कोई नहीं होता था ब्लंट...
सभी बच्चे होते थे.....!
ऑटोमैटिकली ओबीडिएन्ट...
नहीं करते थे वे...कोई भी स्टंट....
कभी नहीं कहते थे टीचर...
कि आप ख़ुद ही बिगाड़ रहे हो
अपने बच्चों का फ्यूचर....
घुरहू,कतवारू और मंगरु सभी...!
बन सकते थे ब्रिलियंट....
ज्ञान इतना टीचर्स....!
कक्षा में ही दिया करते थे सफ़ीशिएंट
सबके लिए प्यारे...
एक ही होती थी उनकी स्क्रिप्ट...
पैरेंट्स भी कभी नहीं होते थे....!
उन दिनों आज के जैसे रिएक्शनिस्ट
अब तो टीचर्स ही बदल रहे हैं स्क्रिप्ट
एक ही दिन में....शिफ्ट दर शिफ्ट..
यहाँ तक कि टीचर और बच्चों में भी
चल रहा है कॉन्फ्लिक्ट....
मित्रों...वैसे तो यह परिवर्तन....!
मुताबिक देशकाल और वातावरण है
पर कभी-कभी लगता है....!
गला काट प्रतिस्पर्धा के दौर का,
यह चल रहा अंतिम चरण है....
रचनाकार.....
जितेन्द्र कुमार दुबे
अपर पुलिस उपायुक्त, लखनऊ
