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Hyderabad News: भाषा और भावना आपस में प्रेम व भाईचारा को बढ़ाते है : वेमुला श्रीनिवासुलु


'विसंगति और विडंबना के चितेरे : श्रीलाल शुक्ल' पर संगोष्ठी आयोजित  

नया सवेरा नेटवर्क

हैदराबाद।  पं. श्रीलाल शुक्ल स्मारक राष्ट्रीय संगोष्ठी समिति, भाग्यनगर, हैदराबाद एवं दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, (आंध्र एवं तेलंगाना)  हैदराबाद के संयुक्त तत्वावधान में  ' विसंगति और विडंबना के चितेरे: श्रीलाल शुक्ल' विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन डॉ. सीमा मिश्रा के संयोजन में हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी, मुख्यमंत्री कार्यालय, तेलंगाना सरकार,  वेमुला श्रीनिवासुलु ने अपने वक्तव्य में 'वसुधैव कुटुंबकम' की बात की। उन्होंने कहा कि भाषा कोई भी हो किंतु हृदय से हम सब मनुष्य हैं। भाषा और भावना आपस में प्रेम व भाईचारा को बढ़ाते है। सभी भाषाओं की अपनी मिठास है। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय कान्यकुब्ज ब्राह्मण महासभा की राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष एवं हिंदी सेवी डॉ. सीमा मिश्रा के द्वारा कान्यकुब्ज ब्राह्मण शिरोमणि, ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता पद्मभूषण पं. श्रीलाल शुक्ल से भेंटवार्ता आशीर्वाद प्राप्त करके उनके समग्र साहित्य का समाजशास्त्रीय अध्ययन पर शोधोपाधि केवल तीन वर्षों के भीतर प्राप्त करना एक बड़ी उपलब्धि हैं और अपने लेखक साहित्यकार के साथ अन्य चार लेखक को पर डाक विभाग, दूरसंचार मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा विशेष डाक टिकट व पोस्टल कवर निकलवा कर उन्ही पर निरंतर अनवरत 18 वर्षों से देश एवं विश्व के गणमान्यो को आमंत्रित कर अपने बुते राष्ट्रीय संगोष्ठियों एवं एक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी, हैदराबाद महानगर में धैर्यता पूर्वक करके एक कीर्तिमान स्थापित कर दिखलाया।


 वे निश्चय ही विशेष बधाई की पात्र है।  दक्षिण भारत के प्रसिद्ध साहित्यकार एवं कार्यक्रम के अध्यक्ष, प्रो. ऋषभ देव शर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा कि हर रचनाकार श्रीलाल शुक्ल नहीं होता।   आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय, के पूर्व न्यायाधीश, जस्टिस वामन राव, अपने वक्तव्य में बताया कि दक्षिण प्रांत में हिंदी पुस्तकों का अभाव है। आगे उन्होंने कहा कि यदि आज श्रीलाल शुक्ल जी होते तो आज की व्यवस्था पर क्या कहते /क्या लिखते ? दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, (आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना) के सचिव प्रभारी, राधाकृष्ण मिरियाला, ने अपने वक्तव्य में हर्षित होते हुए कहा कि सभा में इस प्रकार के कार्यक्रम होते रहने चाहिए।  

आंध्र प्रदेश सरकार के (पूर्व) अपर पुलिस महानिदेशक पं. श्रीराम तिवारी, ने अपने वक्तव्य में आशीर्वचन देते हुए कहा कि 'सत्य को खोजना ही जीवन का लक्ष्य है।'  उन्होंने कहा कि कर्म हमेशा मनुष्य के साथ चलता है, जो जैसा करता है, उसे वैसे ही फल की प्राप्ति होती है।उन्होंने कहा कि जैसा कि रामचरित मानस में लिखा है कि 'कर्म प्रधान विश्व रचि राखा, जो जस करहि सो तस फल चाखा। '  कानपुर, उत्तर प्रदेश से पधारे अखिल भारतीय कान्यकुब्ज ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री: पं. महेश मिश्रा ने अपने वक्तव्य में कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में एक उपन्यास अवश्य पढ़ना चाहिए और वो है 1968 में श्रीलाल शुक्ल जी द्वारा रचित वृहत उपन्यास 'रागदरबारी ही है।

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 और आगे कहा कि उनके महासभा की पहेली विदुषी बहना है जिन्हे कान्यकुब्ज ब्राह्मण शिरोमणि, ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता पद्मभूषण पं. श्रीलाल शुक्ल जी का निरंतर आशीर्वाद  प्राप्त हुआ है। इसी श्रृंखला में तेलंगाना राज्य के खुफिया तंत्र विभाग, के (से.नि.) अपर पुलिस अधीक्षक  अनिल कुमार वाजपेई, ने विगत 18 वर्षों से होती आ रही संगोष्ठियों में विश्व के गणमान्य अतिथियों एवं समाज को एकत्रित करने का साहसपूर्ण कार्य करने के लिए अखिल भारतीय कान्यकुब्ज ब्राह्मण महासभा की अनवरत तीसरी बार बनी राष्ट्रीय महिला अध्यक्षा डॉ. सीमा मिश्रा को विशेष बधाई दी। इस अवसर पर दक्षिण भारत कान्यकुब्ज ब्राह्मण महासभा, कान्यकुब्ज ब्राह्मण समिति  के सदस्य गण पं.अरुण कुमार शुक्ल,  पं.अशोक शुक्ल, अमेरिका से पधारी माधुरी क्लेटन,  के.नागेश्वर राव, डॉ. निलय शर्मा, चौहान जगत सिंह, पं. दुर्गा प्रसाद मिश्रा, पं. बलवीर पांडे, पूर्णिमा पांडे आदि उपस्थित रहे।

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