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Article: संविधान जन्मकाल से ही खतरे में रहा


नया सवेरा नेटवर्क

आजादी के बाद कुछ समय तक ब्रिटिश व मुगलिया कानून चलता रहा।इसी बीच में सभी मनिषियों नेताओं ने मिलकर एक निर्णय लिया कि देश में अपना विधान होना चाहिए। विदेशी विधान समाप्त कर देना चाहिए।सबकी सहमति से संविधान बनाने की घोषणा हुई।एक ११ सदस्यों वाली समिति बनी जिसमें भारत के विद्वान शामिल किए गये। डॉ राजेन्द्र प्रसाद,वी एन राव डॉ भीमराव अम्बेडकर मुख्य भूमिका में रहे।समिति की अध्यक्षता करने के लिए डॉ भीमराव अम्बेडकर जी नामित हुए। संविधान बनकर तैयार हुआ।उसकी जाॅंच परख हुई।सबकी सहमति ली गई।पर तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल आरक्षण वाले मुद्दे पर असहमत थे।तो डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर जी ने उन्हें संतुष्ट किया और कहा कि यह सोषित वंचित को सहयोग देने के लिए है।और १० वर्ष बाद यह स्वत: समाप्त हो जायेगा।इसके बावजूद भी पटेल जी मान नहीं रहे थे।उनका मानना था कि इससे देश पिछड़ जायेगा।और ये आरक्षण देश में कोढ़ की बीमारी बन जायेगा। जिससे देश में जाति गत वैमनस्यता फैलेगी।देश की गति रुकेगी।आरक्षित जातियां अकर्मण्य बनेगी।तब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी ने कहा कि आरक्षण केवल शिक्षा के लिए दिया जायेगा।तब जाकर पटेल जी ने अपनी सहमति दी।और २६ जनवरी १९५२ में अपना संविधान पूरे देश में लागू हुआ।उसी के निमित्त हर भारतीय २६ जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में हर वर्ष विभिन्न आयोजनों द्वारा मनाता है। सबके सपने सच हुए थे। सबमें खुशी थी कि समता मूलक देश का निर्माण होगा।

        लेकिन हुआ उसके बिल्कुल उलट।लागू होने के बाद से ही सत्ता लोभियों ने संविधान का कत्ल करना शुरू कर दिया।सत्ता पर जमें रहने के लिए फेवीकोल रूपी आरक्षण का उपयोग करना शुरू कर दिए। वक्फ बोर्ड,मंडल कमीशन, पर्सनल ला बोर्ड,सेकुलर,३७०,३० ए,३५ए एस सी एस टी आदि देश को विघटित करनेवाली,समाज में विखंडन पैदा करने वाली धाराओं और विधानों को  जबरी घुसेड़ा गया।संविधान की आत्मा के साथ वैसे ही खिलवाड़ किया जा रहा है जैसे आजादी के बाद से आज तक सवर्णों के साथ किया जा  रहा है।जिस देश की प्रगति में देश को आजाद कराने में सबसे अधिक भागीदारी सवर्णों  रही।उसी के साथ आजादी के बाद से आज तक भेद भाव किया जा रहा है।आज भी स्वर्ण अपने लिए किसी सरकार से कुछ नहीं मांगा।जबकी सवर्णौ में कितने ऐसे गरीब हैं जिनके यहां तीनों समय चूल्हा नहीं जलता।इसके बावजूद भी जितनी सरकारें आज तक आई सबने सवर्णों का ही सामाजिक शारीरिक  आर्थिक और मानसिक दोहन किया।इस आजाद भारत में स्वर्ण तीसरे दर्जे का प्राणी बनकर गया है।धोबी का कुत्ता बना दिया गया है।

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       आज सवर्ण सोचता है कि सरकार की नजर में हम सभी सिर्फ दूध देने वाली गाय हैं।जब दूध की जरूरत होगी तभी खरी चूनी मिलेगी। नहीं तो डंडे मारकर खदेड़ दिये जाओगे।डंडे खाने के लिए।और सुनवाई कहीं नहीं होगी।यदि किसी दरवाजे पर न्याय मांगने जाओगे तो वहाॅं तिरस्कार और डंडा ही मिलेगा। सवाल ए उठता है कि जो हमारे सवर्ण बलिदानियों ने आजाद भारत के लिए सबकुछ न्यौछावर किया था।क्या इसलिए कि हमारे वंशज आजादी के बाद भी गुलाम ही रहेंगे।क्या देशभक्त बलिदानियों ने इसीलिए बलिदान दिया था कि जो भी सत्ता पर बैठेगा वह दो मुहा सांप होगा।जो दोनों तरफ से केवल और केवल जहर उगलेगा।

      आजादी के दिन से ही देश में कभी धर्म के नाम से तो कभी जाति के नाम से इन सत्तासीनों ने कभी भी हमें चैन से जीने नहीं दिया।कभी हिन्दू मुसलमान तो कभी दलित सवर्ण तो कभी दलित पिछड़ा करके लड़ाते ही आ रहा है।इस अगड़े पिछड़े की लड़ाई में सत्तासीन तो मजबूत होते जा रहे हैं।मगर देश और देशवासी पिछड़ते जा रहे हैं।आज हमारी योग्यता का उपयोग अमेरिका इंग्लैंड कनाडा आदि देश करके हमसे कोसों दूर निकल लिए।हम आज भी उसी आरक्षण रूपी महामारी की चपेट में हैं। वर्तमान सरकार नारा दी कि एक रहोगे सेफ रहोगे।बटोगे तो कटोगे।क्या यूजीसी में आरक्षण लगा के ही एकता का सूत्र काम करेगा।यह तो बहुत बड़ा बंटवारा कर दिया।क्या आरक्षण के सहारे ही विकसित किया जायेगा।ऐसे तो हम पुनः १९वीं सदी की तरफ चले जायेंगे। विकसित क्या खाक होवेंगे।जैसे आज हमारे जितने योग्य हैं आरक्षण के चलते विदेश चले जा रहे हैं।वैसे ही अच्छी पढ़ाई के लिए भी योग्य बच्चे देश से बाहर चले जायेंगे।जो उनकी फीस से देश की कमाई होनी है,वह विदेशी कमायेंगे।तो प्रगति उनकी होगी कि हमारी।कम अक्ल वालों को लेकर देश का कौन सा विकास कर पाओगे।ऋण लोगे कहीं से विकास के लिए।पता चलेगा सब आरक्षित वर्ग को खुश करने में चला गया।विकास कैसे करोगे।इस तरह तो समाज में और असुंतलन होगा।विकास की गति बाधित होगी।आपसी भाईचारा छिन्न भिन्न होगा।

       जो दबा कुचला है उसका सहयोग करके उसे अच्छा जीवन जीने के लिए अच्छी और उचित शिक्षा तब तक दीजिए वो भी मुफ्त में।जब तक की वह इस काबिल न बन जाय कि बिना बैसाखी के वो खड़ा हो जाय।उसे इस लायक बनने में जो भी सहयोग करते बने करिए।जिससे वह देश के ऊपर निर्भर न होकर देश को गति देने में अपनी भूमिका निभाए।उसे उचित और मुफ्त शिक्षा दो,उसके परिवार की भी व्यवस्था देखो।जिससे उसका परिवार उसे शिक्षित बना सके।केवल फीश माफ कर देने व गणवेश भर देने से वह शिक्षित नहीं हो पायेगा।जब उसका परिवार भी इस लायक रहेगा कि उसे ऊंची शिक्षा के लिए समय दे सके।तब जाकर उनका विकास होगा।जातीय भेद भाव स्कूल से खत्म करो।फार्म में जो जाति का कालम है उसे हटाओ।जिससे एक दूसरे को बच्चे आपस में नाम से जानें।जाति से नहीं।तब समता आयेगी।एक तरफ सरकारें कहती हैं जाति सम्बंधित भेद खत्म होना चाहिए।और यह संविधान में भी निहित है।इसको नहीं लागू कर रही हैं।उल्टे और अधिक जातिगत वैमनस्यता फैला रही हैं।सिर्फ सत्ता में जमें रहने के लिए।यही काम कमोबेश कांग्रेस करती रही,यही काम बसपा सपा आदि पार्टियां करती रही।हश्र आज एक एक वोट के लिए घिघिया रही हैं।अब वही कार्य भाजपा भी करने को आतुर है।और पार्टियां तो दो चार सिट इज्जत बचाने भर की पा जा रही हैं।मगर भाजपा पुनः १९वीं सदी वाली पार्टी बनकर रह जायेगी।इसलिए हिन्दुत्व वाली पार्टी है तो वही बनी रहे। हिन्दुओं को एक करे।जाति पाति की विदाई करे।और सबका विकास सबका साथ और सबका विश्वास जीते।एक जाति की हिमायती न बने।नहीं तो माया मुलायम लालू की गति तो ठीक है।इनकी दुर्गति हो जायेगी।२४०से २ पर आने में समय नहीं लगेगा।जैसे आज कांग्रेस मुक्त भारत होने में तो समय लग रहा भाजपा मुक्त भारत होने में समय भी नहीं लगेगा।अन्य पार्टियां तो कई वैसाखी पर टिकी हैं। भाजपा तो बस एक ही वैसाखी पर है।और जब उसी वैसाखी को तोड़ डालेगी तो बताओ कैसे खड़ी रह पायेगी। इसलिए एक सूत्रीय कार्यक्रम पर चलने में भाजपा की भी भलाई है,और देश की भी। क्योंकि भाजपा का हटना भी देश के हित में नहीं है।अन्य पार्टियां देश लूटने के लिए इसमें घी डाल रही हैं।देश और स्व हित में सोचना अब भाजपा को है।भाजपा का तो नारा है एक निशान एक देश एक विधान।तो अलग अलग करने की खुराफात किस खुशफहमी में सूझी।क्या? भाजपा भी कांग्रेस बनना चाह रही है।

पं.जमदग्निपुरी

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वरिष्ठ भाजपा नेता ज्ञानप्रकाश सिंह की तरफ से गणतंत्र दिवस 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं


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