Jaunpur News: खरीफ फसलों के सामायिक प्रमुख कीट/रोग एवं उनसे बचाव के उपाय
नया सवेरा नेटवर्क
जौनपुर। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने जनपद के किसानों को अवगत कराया है कि खरीफ फसलों में लगने वाले कीटों/रोगों से बचाव के लिए अपने खेत की सतत् निगरानी करते हुए फसल में लक्षण दिखाई देने पर दिये गये विवरण के अनुसार बचाव का कार्य करे। धान का तना छेदक का लक्षण दिखने पर इस कीट की पूर्ण विकसित सूडी हल्के पीले रंग के शरीर तथा नारंगी पीले रंग की सिर वाली होती है जो फसल के लिए हानि कारक है। इसके आक्रमण के फलस्वरूप फसल की वानस्पतिक अवस्था में मृतगोभ तथा बाद में प्रकोप होने पर सफेद बाली बनती है इनके नियन्त्रण हेतु फिप्रोनिल 0.3 प्रतिशत जीआर को 20 कि0ग्रा या कारटाॅप हाइड्रोक्लोराइड 4 प्रतिशत दानेदार चूर्ण 17-18 कि0ग्रा0 प्रति हे0 के दर से प्रयोग करें।
धान की पत्तियों पर भूरा धब्बा की दशा में पत्तियों पर गहरे कत्थई रंग के गोल अण्डाकार धब्बे दिखाई देते है तथा इन धब्बों के चारों तरफ हल्के पीले रंग का घेरा बन जाता है जो इस रोग का विशेष लक्षण है। इसके उपचार हेतु मैंकोजेब 75 प्रतिशत या जिनेब 75 प्रतिशत रसयान को 2 केजी प्रति हे0 की दर से 800 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
यह भी पढ़ें | Jaunpur News: 15 अक्टूबर तक अपना नवीनीकरण अवश्य करा लें श्रमिक : सहायक श्रमायुक्त
धान का गन्धी बग की दशा में यह हरे रंग का बेलनाकार कीट होता है जो बाली से दुध चूसकर फसल को हानि पंहुचाता है। इसके बचाव हेतु मैलाथियान 5 प्रतिशत धूल अथवा फेनवेलरेट 0.4 प्रतिशत धूल 25 किग्रा/हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें।
फफूदी का प्रकोप होने पर बाली में दाने फट जाते है तथा दाने के स्थान पर पीले रंग का चूर्ण दिखाई देता है, उत्पादन के साथ-साथ फसल की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। बीज अगले वर्ष प्रयोग हेतु उपयुक्त नही रह जाता है। इसके उपचार हेतु कार्बेन्डाजिम 12 प्रतिशत मैन्कोजेब 63 प्रतिशत डब्ल्यूपी 1.500 किग्रा या मैन्कोजेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी 2.000 किग्रा अथवा प्रोपिकोनाजोल 25 प्रतिशत ईसी 500 एमएल प्रति हेक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
अरहर/धान का पत्ती लेपटक के दशा में पीले रंग सूडियाॅ पौधे की चोटी की पत्तियों को लपेटकर सफेद जाला बना लेती है और उसी में छिपी पत्तियों को खाती है और बाद में फूलों,फलों को नुकसान पहुचाती है। इनसे बचाव हेतु क्लोरपायरीफास 20 प्रतिशत ईसी को 1.25 एक लीटर प्रति हे0 की दर से 800 ली0 पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
,%20%E0%A4%A8%E0%A4%88%E0%A4%97%E0%A4%82%E0%A4%9C%20%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%BE,%20%E0%A4%9C%E0%A5%8C%E0%A4%A8%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%20%20%E0%A4%AB%E0%A5%8B%E0%A4%A8%20%E0%A4%A80%207355%20358194,%2005452-356555.jpg)