New Delhi News: बीसीसीआई का दोबारा ज्वाइंट सेक्रेटरी बनने से रोकने के लिए रोहन देसाई के खिलाफ कैसे हुई साजिश?
भाजपा से जुड़ाव और साफ-सुथरी छवि की वजह से रोहन देसाई को हराने के लिए विपक्ष से मिलकर गोवा क्रिकेट संघ के दागी पदाधिकारियों ने रचा खेल
नई दिल्ली। बीसीसीआई के ज्वाइंट सेक्रेटरी रोहन देसाई के खिलाफ साजिश का खुलासा हुआ है। पहले उनके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर नामाकंन से रोकने की कोशिश हुई और फिर मकसद पूरा होते ही याचिका वापस ले ली गई। गोवा क्रिकेट एसोसिएशन (जीसीए) का हालिया चुनाव खेल जगत में चर्चा का विषय बना है। बीसीसीआई में संयुक्त सचिव रहते हुए रोहन गौंस देसाई ने पारदर्शिता, ईमानदारी और खिलाड़ियों के हित में काम कर गोवा का नाम रोशन किया। मानो यही रोहन का सबसे बड़ा गुनाह बन गया।
देसाई ने गोवा क्रिकेट को परिवारों और भ्रष्टाचार के कब्जे से मुक्त करने की कोशिश की। बीसीसीआई से मिलने वाले करोड़ों रुपये का सही उपयोग खिलाड़ियों तक पहुंचे, इसके लिए उन्होंने कई कदम उठाए। राज्य की भाजपा सरकार के समर्थन से अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम बनाने की दिशा में भी वे कार्य कर रहे थे। रोहन की लोकप्रियता से परेशान होकर गोवा के कुछ पुराने रसूखदार पदाधिकारी उनके खिलाफ एकजुट हो गए। चुनाव में ऐसी साजिश रची गई कि रोहन की जगह वही लोग जीतकर आए, जिन पर स्मगलिंग और फंड घोटालों के आरोप रहे हैं।
जीसीए के नवनिर्वाचित एक पदाधिकारी जहां स्मगलिंग मामले में गिरफ्तार हो चुका है, वहीं दूसरे पदाधिकारी बीसीसीआई की करोड़ों की धनराशि के घोटाले और लॉन्ड्रिंग मामलों में जेल जा चुके हैं। सवाल उठता है कि क्या ऐसे लोग गोवा क्रिकेट का भला करेंगे या फिर संस्था को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करेंगे?
रोहन की लोकप्रियता और भाजपा जुड़ाव को देखते हुए विपक्षी दलों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। गोवा फॉरवर्ड पार्टी के नेताओं ने विरोधी खेमों को मिलाकर रोहन को चुनाव में हराने का इंतजाम किया। बीसीआई की वोटर लिस्ट में उनका नाम शामिल हुआ तो विरोधी हाईकोर्ट चले गए। नतीजा यह हुआ कि रोहन बीसीसीआई में लगातार दूसरी बार संयुक्त सचिव का नामांकन तक दाखिल नहीं कर पाए। फिर जब रोहन नामांकन नहीं कर पाए तो फिर हाईकोर्ट से याचिका वापस ले ली गई। इसी से सारी साजिश का पर्दाफाश होता है।
यह हार सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं है। यह उन हजारों खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और समर्थकों के सपनों की हार है जो गोवा को देश के क्रिकेट नक्शे पर ऊँचा उठता देखना चाहते थे। साजिश भले सफल रही हो, लेकिन खिलाड़ियों का कहना है कि यह रोहन देसाई की नहीं, गोवा क्रिकेट की हार है।

