Jaunpur News: चौथी बार दुनिया के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में शामिल डॉ. कृष्ण कुमार यादव
नया सवेरा नेटवर्क
सिकरारा, जौनपुर। अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा जारी और एल्सेवियर बीवी द्वारा प्रकाशित दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की प्रतिष्ठित सूची में जौनपुर जिले के सिकरारा क्षेत्र के देहजूरी निवासी , भोपाल स्थित पर्यावरण विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कृष्ण कुमार यादव ने लगातार चौथी बार स्थान प्राप्त किया है। झीलों के शहर भोपाल से अंतरराष्ट्रीय ख्याति अर्जित करने वाले डॉ. यादव ने अपने शोध कार्य, नवाचार और उत्कृष्ट वैज्ञानिक योगदानों के बल पर विश्व स्तर पर भारत का परचम लहराया है। वर्ष 2025 की इस सूची में उन्हें पर्यावरण विज्ञान के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर 552वीं रैंक हासिल हुई है।
स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय हर वर्ष जारी होने वाली इस सूची में वैज्ञानिकों का चयन उनके संपूर्ण करियर डाटा, वर्ष 2024 में किए गए उल्लेखनीय शोध, शोध प्रकाशनों की संख्या व गुणवत्ता तथा उद्धरण मैट्रिक्स के कठोर मूल्यांकन के आधार पर करता है। यही कारण है कि इस सूची को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अत्यंत प्रतिष्ठित और विश्वसनीय माना जाता और इसमें शामिल होना किसी भी वैज्ञानिक के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है और विश्वविद्यालय के शोध स्तर का प्रमाण भी है. डॉ. यादव की इस उपलब्धि ने न केवल जौनपुर जिले का, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश और भारत का नाम विश्व मंच पर गौरवान्वित किया है।
साधारण परिवेश से अंतरराष्ट्रीय पहचान तक का सफर
उत्तर प्रदेश के जौनपुर स्थित देहजुरी गाँव में साधारण परिवेश में जन्मे डॉ. यादव ने अपने शोध और नवाचार के अदम्य जुनून के बल पर वैश्विक वैज्ञानिक मंच पर एक विशिष्ट पहचान बनाई। वर्षों की कठिन साधना, निरंतर शोध और प्रभावशाली योगदान का गौरव केवल चुनिंदा वैज्ञानिकों को ही मिलता है, जिन्हें विश्व की शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान प्राप्त होता है। वरिष्ठ वैज्ञानिकों के बीच डॉ. यादव का एक युवा भारतीय वैज्ञानिक के रूप में लगातार यह उपलब्धि प्राप्त करना उनके अदम्य परिश्रम और क्षमता का प्रमाण है| डॉ. यादव की रैंकिंग में इस साल बड़ा सुधार देखने को मिला है, पर्यावरण विज्ञान में वर्ष 2024 में वह 728 वें स्थान पर थे, जबकि 2025 की सूची में वे 552वें स्थान पर आ गए हैं. यह सम्मान दर्शाता है कि डॉ. यादव ने अनुसंधान और शिक्षा दोनों ही क्षेत्रों में समर्पण एवं गुणवत्ता की नई मिसाल कायम की है|
शोध और नवाचार की उपलब्धियाँ
डॉ. यादव पिछले एक दशक से अधिक समय से पर्यावरण एवं रसायन विज्ञान के क्षेत्र में निरंतर उत्कृष्ट योगदान दे रहे हैं। अब तक वे 350 से अधिक शोध आलेख, 9 पुस्तक अध्याय और 6 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने 4 जर्मन पेटेंट और 2 यूके पेटेंट डिजाइन भी प्रकाशित कर चुके है| उनके शोध कार्यों की वैश्विक मान्यता का प्रमाण है गूगल स्कॉलर पर प्राप्त 16,068 से अधिक उद्धरण, 61 का h-इंडेक्स और 209 का i10-इंडेक्स। ये उपलब्धियाँ उन्हें अपने क्षेत्र का एक अग्रणी विचारक और विश्वस्तरीय वैज्ञानिक स्थापित करती हैं तथा उनके शोध की यही विशेषता है कि वह शैक्षणिक जगत से निकलकर सीधे औद्योगिक अनुप्रयोगों तक अपनी सार्थकता स्थापित करता है। डॉ. यादव की शोध रचनाएँ विश्व की अनेक प्रतिष्ठित और उच्च-प्रभाव वाली पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें जर्नल ऑफ कोऑर्डिनेशन केमिस्ट्री, केमिकल इंजीनियरिंग जर्नल, जर्नल ऑफ एनर्जी स्टोरेज, एनवायरनमेंट इंटरनेशनल, वॉटर रिसर्च, प्रोसेस सेफ्टी एंड एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन, सस्टेनेबल मैटेरियल्स एंड टेक्नॉलॉजीज़, रिन्यूएबल एंड सस्टेनेबल एनर्जी रिव्यूज़, साइंस ऑफ द टोटल एनवायरनमेंट, एडवांस्ड कंपोज़िट एंड हाइब्रिड मैटेरियल्स, जर्नल ऑफ केमिस्ट्री ए तथा जर्नल ऑफ क्लीनर प्रोडक्शन जैसी ख्यातिप्राप्त पत्रिकाएँ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। वे फ्रंटियर्स इन एनवायरनमेंटल साइंस पत्रिका के अतिथि संपादक के रूप में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, वे अनेक अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं के समीक्षक और संपादक के रूप में सक्रिय योगदान देकर वैश्विक शोध समुदाय में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए हैं।"
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वैश्विक योगदान और संपादकीय भूमिकाएँ
डॉ. यादव वर्तमान में अनेक प्रतिष्ठित शैक्षणिक पदों पर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। वे मध्यांचल विश्वविद्यालय, भोपाल में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं, जहाँ वे विद्यार्थियों की शैक्षणिक उन्नति के साथ-साथ अपने अनुसंधान कार्यों को भी नई दिशा प्रदान कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, वे पारुल विश्वविद्यालय, गुजरात तथा सविता विश्वविद्यालय, तमिलनाडु में एडजंक्ट प्रोफेसर के रूप में संबद्ध हैं और वहाँ महत्वपूर्ण शोध परियोजनाओं में सहयोग देने के साथ-साथ युवा शोधार्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी उनका योगदान उल्लेखनीय है—वह अल-अयेन विश्वविद्यालय में विज़िटिंग प्रोफेसर के रूप में सक्रिय भूमिका निभाते हुए वैश्विक शोध कार्यों को गति प्रदान कर रहे हैं। इन प्रतिष्ठित संबद्धताओं से उनके वैज्ञानिक प्रभाव और वैश्विक पहचान का स्पष्ट आभास होता है। साथ ही, वे दक्षिण कोरिया, पुर्तगाल, सऊदी अरब, मलेशिया, वियतनाम, यूनाइटेड किंगडम, अल्जीरिया, संयुक्त राज्य अमेरिका और थाईलैंड सहित अनेक देशों के वैज्ञानिकों के साथ सहयोग कर चुके हैं, जो उनके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित व्यापक शोध-नेटवर्क और विश्वसनीयता को दर्शाता है।"
पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान की दिशा में
डॉ. यादव का शोध कार्य बहुआयामी और समसामयिक पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान पर केंद्रित है। उनके अनुसंधान विषयों में फ्लोराइड प्रदूषण और उसका मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव, अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादन, जल संसाधन प्रबंधन, बहु-स्तरीय प्लास्टिक के उत्पादन एवं पुनर्चक्रण में प्रगति तथा खाद्य पदार्थों से उत्पन्न स्वास्थ्य समस्याएँ विशेष रूप से शामिल हैं। इसके साथ ही वे कैडमियम, क्रोमियम और आर्सेनिक जैसे अकार्बनिक प्रदूषकों तथा औद्योगिक अपशिष्टों के हानिकारक प्रभावों पर भी गहन शोध कर रहे हैं। इन अनुसंधानों के परिणाम यदि व्यावहारिक रूप से लागू किए जाएँ, तो पर्यावरण प्रदूषण से जुड़ी अनेक जटिल समस्याओं का प्रभावी समाधान संभव हो सकता है और सतत विकास के मार्ग को सुदृढ़ किया जा सकता है। इन क्षेत्रों में उनका शोध भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए ऐसे स्थायी समाधान सुझाता है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं।
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा जारी शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की प्रतिष्ठित सूची में शामिल होकर डॉ. कृष्ण कुमार यादव ने वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। उनका शैक्षणिक शोध और नवाचारपूर्ण कार्य न केवल वैज्ञानिक जगत को प्रभावित कर रहा है, बल्कि अनगिनत छात्रों और युवा शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन रहा है। उनकी यह उपलब्धि जौनपुर जैसे छोटे से नगर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक की प्रेरणादायक यात्रा का प्रतीक है।
डॉ. यादव का शोध कार्य आज न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व के वैज्ञानिक समुदाय के लिए गर्व का विषय है। उनकी इस उल्लेखनीय सफलता पर जिले के शिक्षकों, बुद्धिजीवियों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उन्हें हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। इस अवसर पर डॉ. यादव ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि जौनपुर जिले के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्टता की ओर अग्रसर हों और अपने कार्यों से जिले व देश का नाम रोशन करें।


