Poetry: एक बंदर आया | Naya Savera Network
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'अं ' की मात्रा पर केंद्रित-
बाल कविता
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एक बंदर आया"
जंगल से एक बंदर आया
संग में एक बंदरिया लाया
कंधे पर उसको बैठाया
अपना अंग-अंग मटकाया
रंग-रंग के वो नाच दिखाया
बंदरिया ने झांझ बजाया
बंदर मंद - मंद मुस्काया
बंदरिया को गले लगाया
कलमकार
विजय मेहंदी(कविहृदय शिक्षक)
जौनपुर(उ0प्र0)