डर बहुत जरूरी है | Naya Savera Network

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हर जीव में डर बहुत जरूरी है।यदि डर न हो तो सभी निरंकुश हो जायेंगे। एक दूसरे को खाकर खुद भी स्वाहा हो जायेंगे।इसलिए डर बहुत जरूरी है।स्वतंत्रता सब जीवों के लिए आवश्यक है। परंतु स्वछंदता किसी भी जीव के लिए हितकर नहीं है। इसलिए एक दूसरे से डरते रहना बहुत जरूरी है। 

परिवार में मुखिया का, समाज में सरपंच का,संगठन में सरगना का,सेना में सरदार का,जनता में प्रशासक का और प्रशासक में शासक का डर बहुत जरूरी है।जिस परिवार में मुखिया का डर नहीं होता वह परिवार बिखर जाता है।जिस समाज में सरपंच का डर नहीं रहता वह समाज बिखर जाता है।जिस संगठन में सरगना का डर नहीं होता है वह संगठन बिखर जाता है।जिस सेना में सरदार का डर नहीं होता वह सेना हमेशा हारती है।

जिस जनता में प्रशासक का डर नहीं होता है वह जनता स्वछंद होकर अपना ही विनाश कर बैठती है।जिस देश का प्रशासक शासक से नहीं डरता वह देश बिखर जाता है।डर के बिना किसी भी परिवार समाज देश का विकास नहीं हो सकता।न ही उस देश परिवार समाज में शांति स्थापित हो सकती है।इसीलिए गोस्वामी तुलसीदास जी लिखा है।भय बिनु होइ न प्रीति बिना डर के प्रेम भी नहीं होता है।

डर के बिना प्रेम का इससे बढ़ियां और सटीक उदारहण कहीं मिलता नहीं है।भगवान श्रीराम चंद्र जी जब लंका पर चढ़ाई करने जा रहे थे तो समुद्र पार करने की विकट समस्या सामने थी।विभीषण के कहने पर भगवान समुद्र से प्रार्थना करने लगे,एक दिन बीता दो दिन बीता तीन दिन बीत गया।तब भगवान श्रीराम चंद्र जी को क्रोध आ गया।और अपने अनुज लक्ष्मण जी से कहे।


ष्लछिमन बान सरासन आनू।
सौषौं वारिधि विसिष कृसानू।।

हे लक्षमण मेरा धनुष बाण लाओ।आज मैं अपने अग्निबाण से समुद्र को ही सोख लेता हूँ।
इसके बाद कहते हैं।

ष्विनय न मानत जलधि जड़, गयउ तीन दिन बीति।
बोले राम सकोप तब, भय बिनु होइ न प्रीति।।

यथा बिना भय के प्रेम हो ही नहीं सकता।भय भी कई तरह का होता है।जिसमें लाज रूपी डर समाज को एक सूत्र में बाँधे रहता है।जिस मनुष्य में लाज नहीं है,वह स्वछंद होकर अनैतिक कार्य में लिप्त हो जाता है। चोरी डकैती छिनैती अपहरण अत्याचार आदि वह सब कार्य करता जो समाज के विपरीत होता है।वह खुद तो विनाशोन्मुखी होता है।साथ में समाज को कोढ़ की तरह दुख देता रहता है।जिस मनुष्य में लाज होती है।वह समाज में विकासोन्मुखी कार्य करता है।अपना विकास तो करता ही है।साथ में देश और समाज का भी विकास करता है।इसीलिए कहना पड़ रहा है।

ष्जिस दिन हया चली जायेगी,उस दिन दानव बन जाऊँगा।
पियूँगा दारू चरस अफीम,मानवता को खा जाऊँगा।।

बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि लाज हर महिला का गहना होती है।मैं कहता हूँ महिला की ही क्यों?लाज हर मानव योनि का गहना है।जब तक ये गहना मानव योनि की आत्मा में रहती है,तब तक मानव मानव रहता है।जिस दिन इस गहने को उतार फेंकता है,उस दिन से वह नर्लज्ज निडर बेफिक्र होकर हर वो कार्य करने में लिप्त हो जाता है।जिससे किसी का भला नहीं होता।निर्लज्ज व्यक्ति सबका नुकसान करता है।
इसलिए लाज रूपी डर सबमें रहना बहुत जरूरी है।लाज के कारण ही बेटा बेटी अपने माँ बाप की सेवा करते हैं।पास पड़ोस की इज्जत करते हैं।किसी की बहू बेटियों पर कुदृष्टि नहीं डालते।सास बहू में सामंजस्य रहता है।जिससे पारिवारिक कलह नहीं होती।परिवार में शांति तो समाज में।समाज में शांति तो देश में।जब हर जगह  शांति तो विकास गतिमान रहता है।लाज के बस ही लोग एक दूसरे का सम्मान करते हैं।एक दूसरे की मर्यादा का भी ध्यान रखते हैं।इसलिए लाज रूपी डर सबमें बहुत जरूरी है।
       दूसरी डर है मर्याद। लोग अपनी मर्यादा बचाने के लिए भी डरते हैं।कहीं समाज में परिवार में मेरे द्वारा कोई ऐसा कार्य न हो जाय जिससे मेरी मर्यादा का हनन हो।इसलिए लोगों में मर्यादा रूपी डर का भी होना जरूरी है।जो लोग अमर्यादित होते हैं उनके अंदर भी किसी का डर नहीं होता।वे लोग भी समाज में परिवार में व देश में कोढ़ की ही तरह होते हैं।जो सदैव दर्द देते रहते हैं।इसलिए मर्यादा रूपी डर लोगों में बहुत जरूरी है।तीसरा है दंड।दंड भी लोगों को मर्यादा में रहने के लिए विवश करता है।
लोग दंड के भय से भी अमर्यादित व्यवहार से दूर रहते हैं।जहाँ लोगों में प्रशासक का भय होता है।वहाँ भी शांति रहती है।लोग स्वछंद नहीं हो पाते।प्रशासक में शासक का भय रहने से प्रशासक भी ढंग से काम करते हैं।जिससे समाज में आराजकता नहीं आती है।लूट मार आतंकी गतिविधियाँ नहीं हो पाती हैं।
जिसका जीता जागता प्रमाण इस समय भारतीय शासन प्रणाली है।आज के कुछ वर्ष पहले तक जहाँ इस देश में आये दिन आतंकी गतिविधियाँ बैखौफ होकर देश को निगलती जा रही थी।वहीं आज एकाध को छोड़कर इस समय भारत शांत है।इसलिए विकास पथ पर अग्रसर है।क्योंकि लोगों में प्रशासक का और प्रशासक में शासक का भय है।यह डर इसी तरह लोगों में समान रूप से जरूरी है।तभी मानव व मानवता दोनों सुरक्षित रहेगी।
पं.जमदग्निपुरी



*उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित म*हाविद्यालय एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं मैनेजमेंट गुरु अनिल यादव की तरफ से देशवासियों को रंगों के पर्व होली की हार्दिक शुभकामनाएं | #NayaSaveraNetwork*
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