Jaunpur News : म्हारी छोरियां छोरो से कम है के... पप्पू ने दंगल की कहानी को किया जीवंत, सफल हुईं बेटियां | Naya Sabera Network

शेर बहादुर यादव ‍@ नया सवेरा

जौनपुर। मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान की एक मूवी आयी थी दंगल, इस मूवी में एक पिता अपनी बेटियों को पहलवान बनाने के लिए खुद भी कड़ी परिश्रम करता है और बेटियों से भी कराता है... कुछ इसी तर्ज पर जौनपुर में भी एक पिता ने अपनी तीन बेटियों के साथ किया। दंगल में एक डॉयलॉग है कि म्हारी छोरियां छोरो से कम है के... कुछ ऐसा ही स्वतंत्र चौहान उर्फ पप्पू ने अपनी बेटियों को बनाया। बेटियां शुरूआत में भले ही सोचती रही हो कि बापू सेहत के लिए तू तो हानिकारक है... लेकिन आज सफल होने पर वह अपनी इस सफलता का श्रेय अपने बापू को ही दे रही हैं। जी हां एक साथ तीन बहनें यूपी पुलिस की कॉप बन गई हैं। यूपी पुलिस की सिपाही बनने पर माता-पिता गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं और खुशी से फूले नहीं समां रहे हैं।

Jaunpur News  Are our girls any less than boys... Pappu brought the story of Dangal to life, the daughters became successful  Naya Sabera Network


  • बेटियों को सफल बनाने में बेच दिया खेत

जौनपुर जिले के मड़ियाहूं तहसील क्षेत्र के महम्मदपुर अजोशी गांव के निवासी पेशे से ठेकेदार स्वतंत्र चौहान उर्फ पप्पू की 4 संतानें हैं जिनमें 3 बेटियां और एक बेटा है। दंगल के पहलवान की तरह स्वतंत्र भी चाहते रहे होंगे कि उन्हें बेटा हो लेकिन ईश्वर के आगे किसकी चली है। स्वतंत्र को एक के बाद एक तीन बेटियां हुई और चौथे नंबर पर उनका बेटा है। स्वतंत्र चौहान ने जो सपना देखा था उसे पूरा करने के लिए उन्होंने न सिर्फ दिन रात मेहनत की बल्कि उस सपने को जीवंत करने के लिए उन्होंने अपना खेत भी बेच दिया।

  • समाज को दिखाया आईना

तीनों बेटियों को पढ़ाने से लेकर दौड़ानें, खेल खेलने और फिट रखने के लिए जो उनसे बन पड़ा उन्होंने किया। आज न सिर्फ उनके गांव के बल्कि जनपद के साथ-साथ पूरा प्रदेश जान गया कि एक साथ तीन बहनें यूपी पुलिस की कॉप बनी है तो वह महम्मदपुर अजोशी गांव की है। स्वतंत्र की तीन पुत्रियां खुशबू, कविता और सोनाली चौहान और एक पुत्र प्रिंस चौहान है। बड़ी पुत्री खुशबू की शादी हो गई है। दूसरे नंबर की पुत्री कविता अविवाहित है। दोनों बहनों ने बीए किया है। तीसरी पुत्री सोनाली का बीए अंतिम वर्ष चल रहा है। बेटा प्रिंस एसआई की तैयारी में लगा हुआ है। माता छाया देवी गृहस्थी संभालती हैं। पिता बाहर रहकर ठेकेदारी का कार्य करते हैं लेकिन दम्पति मिलकर समाज को एक आईना दिखाने का कार्य किया है। 

  • बेटा-बेटी में फर्क न समझें

तीनों बहनों ने संयुक्त रूप से बताया कि मैं हर माता-पिता को यह संदेश देना चाहती हूं कि बेटा और बेटी में किसी भी प्रकार का कोई फर्क न समझें, बेटियों को भरपूर शिक्षा देने का प्रयास करें और साथ में मैं उन बहनों को भी संदेश देना चाहती हूं कि माता-पिता व समाज का कद्र करते हुए आगे बढ़ने का प्रयास करें। इस संसार में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसे हासिल नहीं किया जा सकता है। जब बेटियों से पूछा गया कि आगे क्या तैयारी है? तो बेटियों ने बताया कि यह तो एक ट्रायल था आगे तैयारी चल रही है। 

  • लोगों ने किया जज्बे को सलाम

पिता स्वतंत्र देव का कहना है कि बेटियों को पढ़ने के लिए मैं अपना खेत तक बेच दिया हूं, क्योंकि मेरे अंदर एक जुनून और जज्बा था कि अपने बेटियों को पढ़ा लिखाकर कुछ बनाना है। बेटियों से जो मैं कहता था, उसका वह पालन भी करती थी। खेल में भी उनकी रुचि थी। खेल में भी बेटियों ने बहुत ही मुकाम हासिल किया है और पढ़ाई में भी उनकी रूचि थी। उनके अंदर भी जज्बा था कि हमें कुछ बनना है।


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