Poetry: कैसे कहूंँ अलविदा 2024 | Naya Savera Network
नया सवेरा नेटवर्क
कैसे कहूंँ अलविदा 2024
हे दिसंबर ! कैसे कहूँ अलविदा --2024
जाते जाते कितनों के आंँखें कर गए नम
माना कि मेरे हिस्से में आई हैं खुशियांँ,
खुशियांँ भी मना न पाऊंँ जाने कितने को दे गए हो गम
हे दिसंबर ! तुम्हें कैसे कहूंँ अलविदा-- 2024
भूल से भी ना भूलेगा मिटे से भी ना मिटेगा
ज़ख्म है कितना गहरा , बेखबर हो गए हो
तुम क्या जानो ! जाने कितनों की सांँसे थम गईं
हे दिसंबर ! कैसे कहूंँ अलविदा -- 2024
कपकपाती काया के रूह से पूछो-
जाते जाते कितने को दर्द दे गए सिलते सिलते जाने कितने की उंगलियांँ जम गईं
हे दिसंबर! कैसे कहूंँ अलविदा - 2024
(मौलिक रचना)
चेतना प्रकाश चितेरी , प्रयागराज , उत्तर प्रदेश




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