जब बिखर जाते हों मत दिखाई पड़ो | Naya Savera Network
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जब बिखर जाते हों मत दिखाई पड़ो (ग़ज़ल)
जब बिखर जाते हों मत दिखाई पड़ो
दिन गुज़र जाते हों मत दिखाई पड़ो
तुम तुम्हारे नियम ढंग जो कुछ भी हो
उनसे डर जाते हों मत दिखाई पड़ो
होगी मुश्किल बहुत जब नज़र आये हम
जो अखर जाते हों मत दिखाई पड़ो
वक़्त की चोट है मत कुरेदो इसे
घाव भर जाते हों मत दिखाई पड़ो
जीते जी गालियाँ, मरने पर श्राद्ध से
पुरखे तर जाते हों मत दिखाई पड़ो
नाव जर्जर लिए हम भँवर में भी हैं
हम जो मर जाते हों मत दिखाई पड़ो
वंदना
अहमदाबाद


