National News : ‘अज्ञेय शब्द सृजन सम्मान’ से कथाकार भगवानदास मोरवाल को नवाजा गया | Naya Savera Network
नया सवेरा नेटवर्क
बेंगलूरु। दक्षिण की प्रसिद्ध साहित्यिक संस्था ‘शब्द’ ने रविवार 22 दिसंबर, 2024 को अपने 27वें वार्षिकोत्सव-सह-पुरस्कार अर्पण समारोह में एक लाख रुपए के तीसरे ‘अज्ञेय शब्द सृजन सम्मान’ से कथाकार भगवानदास मोरवाल को नवाजा । सम्मानित विभूति को एक लाख रुपए की नकद राशि के अलावा मैसूर का पारंपरिक पेटा, अंगवस्त्रम, स्मृति चिह्न, प्रशस्ति फलक एवं श्रीफल भी भेंट किए गए।
अज्ञेय शब्द सृजन सम्मान’ ग्रहण करते हुए कथाकार भगवानदास मोरवाल ने कहा कि एक सर्जक में ऐतिहासिक निरपेक्षता और अपने लोक जीवन की समझ का होना निहायत जरूरी होता है । ‘शब्द’ संस्था ने अपना प्रतिष्ठित ‘अज्ञेय शब्द सृजन सम्मान’ देकर मेरी ऐतिहासिक निरपेक्षता और समझ पर मुहर लगायी है ।
इस अवसर पर समारोह के मुख्य अतिथि प्रख्यात कन्नड़ कथाकार हम्पा नागराजय्या ने कहा कि साहित्य की संगति के लिए सहृदय होना बहुत जरूरी है । शब्द प्रकाश भी है और ज्योति भी । किंतु शब्द सबसे अधिक अर्थयुक्त तब होता है, जब निःशब्द होता है। यही शब्द व्यंजित होता है । साहित्यकार इसी शब्द की साधना करता है ।
समारोह की शुरुआत में ‘शब्द’ के अध्यक्ष डॉ श्रीनारायण समीर ने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि ‘शब्द’ के पुरस्कारों का ध्येय साहित्य और साहित्यकार को समाज के विचार-केंद्र में लाने और समादृत करने का प्रयास है । दक्षिण की यह प्रयास उत्तर में यदि कोई हलचल ला सका तो हम भारत भाव को सशक्त करने का अपना प्रयास सफल समझेंगे । मालूम हो कि ‘अज्ञेय शब्द सृजन सम्मान’ समाजसेवी और अज्ञेय साहित्य के मर्मज्ञ बाबूलाल गुप्त के फाउंडेशन के सौजन्य से तथा ‘दक्षिण भारत शब्द हिंदी सेवी सम्मान’ बेंगलूरु एवं चेन्नई से प्रकाशित अखबार समूह ‘दक्षिण भारत राष्ट्रमत’ के सौजन्य से प्रदान किए जाते हैं । कार्यक्रम का कुशल संचालन ‘शब्द’ की सचिव डॉ उषारानी राव ने किया और धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम संयोजक श्रीकान्त शर्मा ने ।
समारोह के प्रथम सत्र में नाट्य संस्था ‘कलायन’ द्वारा दो नाटकों का भी मंचन किया गया । नाटक के सभी रंगकर्मी आई टी प्रोफेशनल हैं,जिन्होंने अपने शानदार अभिनय से दर्शकों को देर तक अभिभूत किए रखा। जैसाकि विदित है कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु की ‘शब्द साहित्यिक संस्था’ द्वारा किसी भी विधा में उत्कृष्ट लेखन को बढ़ावा देने के लिए हर साल दिए जानेवाले एक लाख रुपए का साल 2024 के ‘अज्ञेय शब्द सृजन सम्मान’ की घोषणा की गई थी l इस साल इस सम्मान के लिए हिंदी के प्रतिष्ठित कथाकार भगवानदास मोरवाल के वर्ष 2021 में राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली से प्रकाशित इतिहास के बिसरे नायकों के आख्यान अर्थात ‘ख़ानज़ादा’ उपन्यास का चयन किया गया था l निर्णायक मंडल ने इस बार के ‘अज्ञेय शब्द सृजन सम्मान’ के लिए अपनी संस्तुति में कहा है कि ‘भगवानदास मोरवाल समकालीन हिंदी कथा साहित्य में सामाजिक यथार्थ एवं विडंबनाओं के सशक्त कथाकार हैं।उनका‘ख़ानज़ादा’ उपन्यास मुग़ल आक्रान्ताओं से लोहा लेते हिन्दुस्तानी शासकों की संघर्षगाथा और मेवातियों की शौर्यगाथा के अनछुए पहलुओं के रूपायन के द्वारा हिंदी साहित्य के कथा-परिसर को समृद्ध करता है।‘ मोरवाल के इस उपन्यास के केंद्र में मेवात की ऐतिहासिकता है l यह उपन्यास मेवात के अंतिम शासक हसन खाँ मेवाती की देशभक्ति को बड़ी शिद्दत से उकेरता है l लोदी, सादात और मुग़ल राजवंशों से लोहा लेनेवाले मेवातियों की गाथा ‘ख़ानज़ादा’ उपन्यास का भारत में तो उर्दू में अनुवाद हुआ ही, बल्कि पाकिस्तान के लाहौर से भी इसका उर्दू में अनुवाद प्रकाशित हुआ इस पुरस्कार का निर्णय हिंदी भाषा और साहित्य के सर्जक विद्वानों की पाँच सदस्यीय मूल्यांकन समिति की संस्तुति के आधार पर निर्णायक मंडल ने सर्वसम्मति से किया ।
उक्त पुरस्कार का मूल्यांकन दैनिक ‘जनसत्ता’ के पूर्व संपादक ओम थानवी की अध्यक्षता में कथालोचक डॉ. अरविन्द कुमार, शिक्षाविद डॉ भंवर सिंह शक्तावत एवं विदुषी रमिता सिंह की मूल्यांकन समिति ने किया । जैसाकि भगवानदास मोरवाल को इसी साल अप्रेल में भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता द्वारा वर्ष 2024 के लिए एक लाख रुपए के 'कर्तृत्व समग्र सम्मान' से भी नवाजा गया था l ‘अज्ञेय शब्द सृजन सम्मान’ से सम्मानित होनेवाले उपन्यास ‘ख़ानज़ादा’ सहित अब तक इनके ग्यारह उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं l इन ग्यारह उपन्यासों में ‘काला पहाड़’, ‘बाबल तेरा देस में’, ‘हलाला’, ‘ख़ानज़ादा’ और इसी साल प्रकाशित उपन्यास ‘काँस” की पृष्ठभूमि मेवात है lदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में लगने के साथ ही इनके लेखन पर 70 से अधिक पी-एच०डी. हो रहे जिनमें 26 शोधार्थी डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त कर चुके है l
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