National : मोहम्मद रफ़ी के 100 साल, बेस्टी एज्यूकेशन ने सजाया सुरों की महफ़िल | Naya Savera Network
नया सवेरा नेटवर्क
कतर। साहित्यिक, सामाजिक व सांस्कृतिक संस्था बेस्टी मंच पर 23 दिसंबर को मशहूर गायक मोहम्मद रफी की 100वीं जयंती पर एक ऑनलाइन सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देवभूमि ऋषिकेश (भारत) के मशहूर कलाकार गोपाल भटनागर साहब ने रफ़ी साहब के अमर गीतों को शानदार आवाज़ में प्रस्तुत किया। रफ़ी साहब के बारे में कुछ कहना सूरज को दीपक दिखने जैसा है। मैं वही रफ़ी साहब की बात कर रहा हूँ जो हम सब के दिलों में आज भी ज़िंदा हैं। वही रफ़ी साहब जिनका जन्म अमृतसर के पास कोटला सुल्तान सिंह में हाजी अली मोहम्मद के घर हुआ था। बारह साल की उम्र में रफ़ी अपने पिता हाजी अली मोहम्मद व परिवार के साथ 1926 में लाहौर चले गए। एक तरफ़ रफ़ी साहब को संगीत से बहुत लगाव था तो दूसरी तरफ़ उनके पिता हाजी अली संगीत के सख़्त ख़िलाफ़ थे इसके बावजूद भी अपने धुन के पक्के रफ़ी साहब पिता हाजी अली से चोरी-छिपे ही गीत गाया करते थे। समय बितता गया और उन्हें रेडियो में काम करने का मौक़ा मिला। आगे चलकर तत्कालीन मशहूर संगीत निर्देशक श्याम सुंदर साहब ने उन्हें मुंबई आने का सलाह दिया। और फिर क्या था मुंबई आते ही मुहम्म्मद रफ़ी अपनी आवाज़ से सभी के दिलों में बस गये। रफ़ी साहब ने ही कहा है - ये इश्क़ इश्क़ है इश्क़ इश्क़…… इश्क़ आज़ाद है, इश्क़ आज़ाद है, हिंदू न मुसलमान है इश्क़।


