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29 दिसंबर 2024 का शुभ मुहूर्त, राहु काल, आज की तिथि और ग्रह | Naya Savera Network



नया सवेरा नेटवर्क

🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞

⛅दिनांक - 29 दिसम्बर 2024
⛅दिन - रविवार
⛅विक्रम संवत् - 2081
⛅अयन - दक्षिणायन
⛅ऋतु - शिशिर
⛅मास - पौष
⛅पक्ष - कृष्ण
⛅तिथि - चतुर्दशी प्रातः 04:01 दिसम्बर 30 तक, तत्पश्चात अमावस्या
⛅नक्षत्र - ज्येष्ठा रात्रि 11:22 तक तत्पश्चात मूल
⛅योग - गण्ड रात्रि 09:14 तक, तत्पश्चात वृद्धि
⛅राहु काल - शाम 04:44 से शाम 06:04 तक
⛅सूर्योदय - 07:23
⛅सूर्यास्त - 05:59
⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में
⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 05:34 से 06:27 तक
⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:20 से दोपहर 01:03 तक
⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:16 दिसम्बर 30 से रात्रि 01:09 दिसम्बर 30 तक
⛅ व्रत पर्व विवरण - मासिक शिवरात्रि, सर्वार्थसिद्धि योग (रात्रि 11:22 से प्रातः 07:20 दिसम्बर 30 तक)
⛅विशेष -  चतुर्दशी को स्त्री सहवास और तिल का तेल खाना व लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

🔹सर्दियों में उपयोगी पुष्टि व शक्तिवर्धक प्रयोग🔹

🔸१] २५ ग्राम देशी काले चने धोकर रात को १२५ मि.ली. पानी में भिगो दें। सुबह इन चनों को खूब चबा – चबाकर खायें, साथ में किशमिश भी खा सकते हैं। ऊपर से चने के पानी में दो चम्मच शहद मिलाकर पी जायें। शरीर बलवान व शक्तिशाली होता है तथा वीर्य पुष्ट होता है।

🔸२] ५० ग्राम गोंद को घी में तल लें। ५० – ५० ग्राम अजवायन, काले तिल व मूँगफली के दानों को अलग – अलग भूनकर सभीको कूट लें। फिर इस मिश्रण को तथा किसे हुए ५० ग्राम सूखे नारियल (खोपरा) को ७५० ग्राम गुड़ में मिला के रख लें । सुबह खाली पेट ५० ग्राम मिश्रण खूब चबा – चबाकर खायें ।इसके १ – २ घंटे बाद हलका सुपाच्य भोजन करें । इससे शरीर पुष्ट होता है, बल-वीर्य की वृद्धि होती है। वायुरोग, बहुमुत्रता व बच्चों की बिस्तर में पेशाब करने की समस्या में भी लाभ होता है।

🔹तुलसी की जीवन में महत्ता व उपयोगिता🔹

🔸‘स्कंद पुराण’ (का.खं. :२१.६६) में आता है : ‘जिस घर में तुलसी – पौधा विराजित हो, लगाया गया हो, पूजित हो, उस घर में यमदूत कभी भी नहीं आ सकते।’

🔸जहाँ तुलसी – पौधा रोपा गया है, वहाँ बीमारियाँ नहीं हो सकतीं क्योंकि तुलसी – पौधा अपने आसपास के समस्त रोगाणुओं, विषाणुओं को नष्ट कर देता है एवं २४ घंटे शुद्ध हवा देता है । वहाँ निरोगता रहती है, साथ ही वहाँ सर्प, बिच्छू, कीड़े-मकोड़े आदि नहीं फटकते। इस प्रकार तीर्थ जैसा पावन वह स्थान सब प्रकार से सुरक्षित रहकर निवास-योग्य माना जाता है। वहाँ दीर्घायु प्राप्त होती है।

🌹 ‘तुलसी निर्दोष है । सुबह तुलसी के दर्शन करो । उसके आगे बैठ कर लम्बे श्वास लो और छोड़ो, स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, दमा दूर रहेगा अथवा दमे की बीमारी की सम्भावना कम हो जायेगी। तुलसी को स्पर्श करके आती हुई हवा रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ाती है और तमाम रोग व हानिकारक जीवाणुओं को दूर रखती है।’

🔸तुलसी रोपने तथा उसे दूध से सींचने पर स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। तुलसी की मिट्टी का तिलक लगाने से तेजस्विता बढ़ती है।

🔸दूध के साथ तुलसी वर्जित है, बाकी पानी, दही, भोजन आदि हर चीज के साथ तुलसी ले सकतें हैं । रविवार को तुलसी ताप उत्पन्न करती है, इसलिए रविवार को तुलसी न तोड़ें, न खायें । ७ दिन तक तुलसी – पत्ते बासी नहीं माने जाते।

🔸विज्ञान का आविष्कार इस बात को स्पष्ट करने में सफल हुआ है कि तुलसी में विद्युत् – तत्त्व उपजाने और शरीर में विद्युत् – तत्त्व को सजग रखने का अद्भुत सामर्थ्य है । थोडा तुलसी – रस लेकर तेल की तरह थोड़ी मालिश करें तो विद्युत् – प्रवाह अच्छा चलेगा ।

🌞🚩🚩 *" ll जय श्री राम ll " 🚩🚩🌞*

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